क्राइम

साइको किलर मर्डर से पहले करता है ये हरकतें,अगर श्रद्धा भी पहचान जाती तो न होती शिकार !

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 15, 2022, 02:50 PM IST

Shraddha Murder Case: साइको किलर पूरी तैयारी के साथ वारदात को अंजाम देते हैं। और कई बार इसके लिए वह लंबे समय से प्लानिंग करते हैं। हत्या को कैसे अंजाम दिया जाय, इसके लिए मूवी से लेकर वीडियो गेम तक इस्तेमाल करता है। कई बार सामाजिक तिरस्कार और अतीत की कोई घटना भी उन्हें हैवान बना देती है।

KEY HIGHLIGHTS
  • 12 साल पहले देहरादून में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी पत्नी के 72 टुकड़े कर दिए थे।
  • मुंबई में एक प्रेमी ने फिल्म प्रोड्यूसर की हत्या कर 300 टुकड़े कर दिए थे।
  • आफताब ने श्रद्धा के 35 टुकड़े कर डाले।

Shraddha Murder Case: उन्नतीस साल की श्रद्धा वालकर की हत्या के खुलासे ने पूरे देश में सनसनी फैला दी है। जिस आफताब (Aftab) से वह प्यार करती थी, उसी ने उसके 35 टुकड़े कर डाले । इस हत्या से लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं, कि आखिर कोई व्यक्ति हैवानियत की इस हद तक कैसे पहुंच सकता है। जाहिर है कि यह कोई आम कातिल का काम नहीं हो सकता है। क्राइम की भाषा में आफताब जैसे लोगों को साइको किलर (Psycho killers )कहा जाता है।

क्या होता है साइको किलर

न्यूज एजेंसी दाइचे वैले ने कातिल की साइकोलॉजी पर एक स्टडी करते हुए 2016 में एक रिपोर्ट जारी की थी, उसके अनुसार सीलियर किलर और साइको किलर जैसे लोग कई हफ्तों पहले ही तैयारी शुरू कर देते हैं।

इस तरह के लोग अधिकतर डायरी लिखते हैं, जिसमें वे वारदात की हर बारीकी को समझते हैं, वे उसके इर्दगिर्द एक कहानी रचते हैं। वो यह भी सोचते हैं कि वारदात को अंजाम देते वक्त वो क्या पहनेंगे, सुसाइड नोट लिखते हैं।

हथियार पास हो, तो उसके साथ खेलते रहते हैं, ना हो, तो उसकी कल्पना करते हैं। ये लोग अच्छी खासी रिसर्च भी करते हैं। वो इस तरह की दूसरी घटनाओं के बारे में पढ़ते हैं, डॉक्यूमेंट्री देखते हैं, वीडियो देखते हैं।

इस सबका मकसद पुरानी घटनाओं की नकल करना और योजना बनाना होता है। इसके अलावा वो ऐसी वीडियो गेम भी खेलते हैं जिसमें उन्हें लोगों पर गोलियां चलानी होती है।

इन लोगों का आफताब जैसा भी मकसद हो सकता है। जो अपने प्रेमिका से छुटकारा पाना चाहते हैं। या फिर कोई मानसिक तनाव और सामाजिक बहिष्कार जैसे भी कारण हत्या के लिए उकसाते हैं।

भारत के प्रमुख साइको किलर्स की कहानी

ऐसा नहीं है कि आफताब कोई पहला व्यक्ति है, जिसने इस बेरहमी से अपने लिव-इन पार्टनर श्रद्धा की हत्या की हो। देश में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पर कातिल ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थी..

देहरादून में पत्नी के 72 टुकड़े कर दिए थे- साल 2010 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी ने अपनी पत्नी अनुपमा की बेरहमी से हत्या कर दी थी। करीब 2 दिन तक पत्नी के शव को बाथरूम में रखा। घर में मौजूद बच्चों को भी इसने हत्या की भनक तक न लगने दी। उसके बाद इसने किचन के ही चाकू से पत्नी के 72 टुकड़े किए और उन टुकड़ों को अलग-अलग प्लास्टिक की थैलियों में भरकर फ्रीजर में डाल दिया।और फिर थोड़े-थोड़े टुकड़ों को जंगल में फेंकने लगा।

मुबंई में 2008 में नीरज ग्रोवर मर्डर केस भी हैवानियत की इसी श्रेणी में आता है। हम आपको बता दें नीरज ग्रोवर एक टीवी प्रोड्यूसर था जिसका मर्डर होता है। पूरा मामला त्रिकोणीय प्रेम का था।नेवी ऑफिसर मैथ्यू के द्वारा अभिनेत्री मारिया सुसाइराज के घर नीरज की हत्या हो जाती है। और उसके बाद दोनों मिलकर 300 टुकड़े कर देते हैं।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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