15 जून 2017 से भारत में ‘डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग योजना’ की शुरुआत की गई थी। इस योजना के अंर्तगत हर रोज सुबह 6 बजे देश भर में फ्यूल की कीमतों को रिवाइज किया जाता है। इस योजना की शुरुआत से पहले फ्यूल की कीमतों को दो हफ्ते में एक बार रिवाइज किया जाता था।
इस सिस्टम की वजह से कस्टमर्स को तो फायदा हुआ ही साथ ही ऐसे डीलर्स को भी फायदा हुआ जो अपने फायदे के लिए अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतों पर आधारित थे। डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम की बदौलत कस्टमर्स भी रोजाना तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों के बारे में जान पाते हैं।
यहां आप अपने शहर में पेट्रोल की कीमतों के बारे में पता कर सकते हैं। हर रोज सुबह 6 बजे तेल की कीमतों को देश भर में मौजूद फ्यूल स्टेशंस के द्वारा रिवाइज किया जाता है। किसी भी दिन भारत में पेट्रोल की कीमतों में होने वाले बदलाव को बहुत से फैक्टर्स प्रभावित करते हैं। भू-राजनीतिक मामलों से लेकर सप्लाई और मांग की इक्वेशन और टैक्स से लेकर राज्य की नीतियों तक ऐसे बहुत से फैक्टर हैं जो अलग-अलग जगहों पर तेल की कीमतों में होने वाले बड़े बदलावों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
टैक्स के साथ-साथ केंद्र सरकार बेस प्राइस और कैप प्राइस की मदद से तेल की कीमतों को कंट्रोल करती है। बेस प्राइस और कैप प्राइस जैसी टर्म्स का इस्तेमाल डीलर्स द्वारा, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (BPCL) जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से तेल खरीदने के दौरान किया जाता है। ये सभी फैसले नेचुरल गैस और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन आने वाले पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल द्वारा लिए जाते हैं।
भारत में पेट्रोल की कीमतों का निर्धारण विभिन्न प्रकार के टैक्स पर भी निर्भर करता है। पेट्रोल की कीमतें मुख्य रूप से डीलर द्वारा चुकाए जाने वाले चार्ज/कमीशन के बेस प्राइस, एक्साइज ड्यूटी और वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) आदि के आधार पर तय की जाती हैं। आपको बता दें कि वैल्यू एडेड टैक्स विभिन्न राज्यों में अलग-अलग होता है।
भारत में फ्यूल रेट का कैलकुलेशन विभिन्न फैक्टर्स के आधार पर किया जाता है। कच्चे तेल की कीमत, मांग और आपूर्ति के डायनामिक्स, टैक्स और एक्सचेंज रेट जैसे फैक्टर्स की बदौलत फ्यूल की कीमत निर्धारित की जाती है।