Gemini Yearly Horoscope 2023, Mithun Rashifal 2023 In Hindi (मिथुन वार्षिक राशिफल 2023): मिथुन राशि का स्वामी बुध होता है। इस राशि के जातक प्रबंधकीय सेवा में उच्च पदों की प्राप्ति करते हैं। उच्च प्रशासनिक सेवाओं में होते हैं। राजनीति में उच्च पदों को प्राप्त करते हैं। न्यायिक सेवाओं में जाते हैं। मिथुन का भी स्वामी बुध है।वृष,तुला,मकर और कुम्भ इसकी मित्र राशियां हैं। कन्या राशि इसकी स्व स्वामी राशि है जिसका भी स्वामी बुध ही है। इस राशि के लोग राजनीतिक पार्टी के प्रवक्ता तथा बहुत अच्छे कथावाचक भी होते हैं
मिथुन राशि 2023 का राशिफल (Mithun Rashi 2023)
स्वास्थ्य-मार्च तक फिर नवम्बर में हेल्थ में थोड़ी प्राब्लम रहेगी। जून के बाद स्वास्थ्य सुख बेहतर हो जाएगा। 15 सितम्बर से अक्टूबर के मध्य स्किन प्राब्लम तथा लीवर प्राब्लम की संभावना रहेगी। जिनको गले में दिक्कत रहती है तथा जिनको स्किन की समस्या है वो लोग सितम्बर से दिसम्बर के मध्य सावधानी बरतेंगे।
जाँब व व्यवसाय- इस वर्ष आप जाँब व व्यवसाय में उन्नति करेंगे। इस वर्ष जाँब के ही सिलसिले में 15 मार्च के बाद विदेश जाने का सुअवसर प्राप्त हो सकता है। इस वर्ष पदोन्नति या जाँब चेंज के अवसर मिलेंगे। व्यवसाय सुख मध्यम लेकिन अप्रैल व जून माह में थोड़ा परेशान रह सकते हैं। अगस्त के बाद कोई नया व्यवसाय आरम्भ कर सकते हैं।
लव लाइफ तथा दाम्पत्य जीवन- युवाओं को प्रेम में सफलता मिलेगी। विवाह के मार्ग प्रशस्त होंगे। वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। मार्च से जून तक का समय प्रेम में विवाद का हो सकता है। जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति जुलाई व नवम्बर माह में सावधान रहना होगा।
आर्थिक स्थिति- 15 मार्च तक थोड़ी परेशानी रहेगी। अप्रैल से जुलाई फिर सितम्बर के बाद धन प्राप्ति के सुखद संयोग बनेंगे। इस वर्ष मार्च के बाद जमीन या मकान क्रय करेंगे। वाहन भी खरीद सकते हैं। इस वर्ष स्वर्ण तथा हीरे के आभूषण भी लेंगे। वर्ष के प्रारम्भिक दो माह में धन का व्यय होता रहेगा। इस वर्ष धन तो आएगा लेकिन व्यय भी ज्यादा होगा। धन का व्यय गृह निर्माण व संतान के शिक्षा इत्यादि कार्यों में होगा।
शुभ समय-15 फरवरी से मई तक फिर अगस्त से सितम्बर तक शुभ समय है। नवम्बर का महीना बहुत बेहतर है। अक्टूबर से दिसम्बर तक का समय आर्थिक सृष्टि से बहुत श्रेयष्कर है।
उपाय- प्रतिदिम श्री सूक्त का पाठ करें। श्री गणेश उपासना करें। दुर्गासप्तशती के सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करें। बुध,शुक्र व शनि के बीज मंत्र का जप करें। प्रत्येक बुधवार को गाय को पालक खिलाएं। भैरो उपासना करते रहें। श्री गणेश जी को प्रतिदिन दूर्वा अर्पित करें।
