Aja Ekadashi Vrat Katha in Hindi, अजा एकादशी व्रत कथा: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की भक्ति के लिए खास माना जाता है। साल में आने वाली अलग-अलग एकादशियों की अपनी धार्मिक मान्यताएं और कथाएं हैं। इन्हीं में से एक है अजा एकादशी। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और नाम स्मरण करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा मिलती है।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - आज कौनसी एकादशी है, आज 7 सितंबर की एकादशी का नाम क्या है
अजा एकादशी की कथा भी काफी भावपूर्ण है। इसमें ऐसे राजा की कहानी बताई गई है, जिसे जीवन में एक के बाद एक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। राजपाट चला गया, परिवार बिछड़ गया और उन्हें बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताना पड़ा। लेकिन उन्होंने सत्य का साथ नहीं छोड़ा। यहां पढ़ें अजा एकादशी व्रत कथा, आज एकादशी की कहानी क्या है, 7 सितंबर अजा एकादशी कथा इन हिंदी।
अजा एकादशी व्रत कथा इन हिंदी
पौराणिक कथा के अनुसार राजा हरिश्चंद्र अपनी सच्चाई, दया और धर्म के लिए प्रसिद्ध थे। वह हमेशा सत्य बोलने और अपने वचन को निभाने के लिए जाने जाते थे। लेकिन एक समय उनके जीवन में ऐसी परिस्थितियां आईं कि उन्हें अपना पूरा राजपाट खोना पड़ा। मुश्किल इतनी बढ़ गई कि उनकी पत्नी और पुत्र भी उनसे अलग हो गए। जिस राजा के पास कभी सब कुछ था, वही अब सामान्य जीवन जीने को मजबूर हो गए। कहा जाता है कि परिस्थितियों के कारण उन्हें एक चांडाल के यहां सेवक के रूप में काम करना पड़ा। इतना सब कुछ होने के बावजूद उन्होंने सत्य और धर्म का रास्ता नहीं छोड़ा।
एक दिन राजा हरिश्चंद्र बेहद परेशान और दुखी बैठे हुए थे। तभी वहां से ऋषि गौतम का गुजरना हुआ। उन्होंने राजा को इस अवस्था में देखा तो उनकी परेशानी का कारण पूछा। राजा ने ऋषि को अपने जीवन में आई सभी परेशानियों के बारे में बताया। उन्होंने अपनी स्थिति से बाहर निकलने का उपाय भी पूछा। ऋषि गौतम ने तब उन्हें अजा एकादशी के व्रत के बारे में बताया। उन्होंने राजा को इस व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ करने की सलाह दी। ऋषि की बात मानकर राजा हरिश्चंद्र ने अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की और उपवास रखा। उन्होंने पूरे मन से भगवान का स्मरण किया। कथा में बताया जाता है कि राजा ने रात में जागकर भगवान की भक्ति भी की। उनके मन में कोई लालच नहीं था। वह केवल अपने दुखों से मुक्ति और भगवान की कृपा की कामना कर रहे थे।
एकादशी की कहानी क्या है
धार्मिक मान्यता के अनुसार अजा एकादशी के व्रत के प्रभाव से राजा हरिश्चंद्र के जीवन के संकट दूर होने लगे। उन्हें अपना परिवार और खोया हुआ राजपाट वापस मिल गया। कथा के अनुसार आगे चलकर मृत्यु के बाद उन्हें बैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई। यही वजह है कि भक्त अजा एकादशी की कथा को श्रद्धा से पढ़ते और सुनते हैं।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
