Bihar CM Full List in Hindi: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दोनों चरणों का मतदान सम्पन्न हो चुका है। पहले चरण में 6 नवंबर को और दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान हुआ। अब सभी को शुक्रवार 14 नवंबर का इंतजार है, जब मतगणना होगी और पता चलेगा कि बिहार में अगले पांच साल तक किस पार्टी या गठबंधन का राज रहेगा। देश के आजाद होने के बाद बिहार अब तक कुल 23 मुख्यमंत्री देख चुका है। सभी मुख्यमंत्रियों के बारे में यहां जानें। यहां हम आपको बिहार के अब तक के सभी मुख्यमंत्रियों की लिस्ट दे रहे हैं -
1. श्री बाबू
श्रीकृष्ण सिंह यानी श्रीबाबू बिहार के पहले मुख्यमंत्री थे। उनके बारे में यह मशहूर है कि उन्होंने कभी भी अपने लिए प्रचार नहीं किया, लेकिन फिर भी हर बार चुनाव जीते। श्रीबाबू बिहार के इकलौते मुख्यमंत्री रहे, जो पहले प्रधानमंत्री बने और फिर मुख्यमंत्री बनाए गए। श्री बाबू बिहार के विकास के लिए इतने समर्पित थे कि मुख्यमंत्री रहते हुए वह अपनी ही पार्टी की केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ अनशन पर बैठ गए। श्रीबाबू के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
2. दीप नारायण सिंह
दीप नारायण सिंह बिहार के दूसरे मुख्यमंत्री बने। हालांकि, वह एक मुख्यमंत्री थे और उनका कार्यकाल सिर्फ 17 दिन का था। दीप नारायण सिंह ने अपने शुरुआती करियर में उन्होंने स्कूल इंस्पेक्टर के तौर पर काम किया था। दीप बाबू के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
3. पंडित विनोदानंद झा
पंडित विनोदानंद झा बिहार के तीसरे मुख्यमंत्री रहे। विनोदानंद झा भी अपने दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों की तरह स्वतंत्रता सेनानी थे। लेकिन की जो कहानी सबसे ज्यादा मशहूर है वह मछली कांड है। उन्होंने कुछ कांग्रेस नेताओं साल 1963 में अपनी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया। विनोदानंद झा के कामराज्ड होने की कहानी भी काफी मशहूर है। यहां क्लिक करके जानिए कामराज्ड होने का क्या मतलब है और विनोदानंद झा का सफर कैसा रहा।
4. कृष्ण वल्लभ सहाय
बिहार के चौथे मुख्यमंत्री कृष्ण वल्लभ सहाय थे। वह एक ऐसे मुख्यमंत्री थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि जमींदार उन्हें अपना जानी दुश्मन समझते थे। आरोप तो यहां तक हैं कि जेपी की पैरवी पर उन्हें जवाहर लाल नेहरू ने शिखर तक पहुंचाया। कृष्ण वल्लभ सहाय के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
5. महामाया प्रसाद सिन्हा
महामाया प्रसाद बिहार के पांचवें और पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। बिहार में स्टेट ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों के साथ किराए को लेकर छात्रों की नोंक-झोंक के बाद उनके आंदोलन को नेतृत्व देकर वह काफी मशहूर हुए। उन्होंने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और जब वह भाषण देते हुए 'मेरे जिगर के टुकड़े' कहते हुए गुस्से में अपना कुर्ता फाड़ लेते थे तो छात्रों पर जादू सा कर देते थे। महामाया प्रसाद सिन्हा के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
6-7. सतीश प्रसाद सिंह और बीपी मंडल
बिहार के छठे मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिंह सिर्फ 5 दिन के लिए इस पद पर रहे। सियासत के साथ उन्होंने फिल्मों में भी हाथ आजमाया, लेकिन राजनीति की तरह सिनेमा का करियर भी लंबा नहीं चला। सातवें मुख्यमंत्री बीपी मंडल 51 दिन के लिए सीएम के पद पर रहे। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में तीन साधु-संतों को मंत्री बनाया। सतीश प्रसाद सिंह और बीपी मंडल के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
8. भोला पासवान शास्त्री
भोला पासवान शास्त्री बिहार के आठवें मुख्यमंत्री बने। वह तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। एक बार 100 दिन के लिए, फिर 13 दिन के लिए और अंत में 222 दिन के लिए राज्य के सीएम पद पर रहे। भोला पासवान शास्त्री की ईमानदारी काफी मशहूर थी। वह पेड़ के नीचे कैबिनेट मीटिंग लेते थे और झोपड़ी में रहते थे। भोला पासवान शास्त्री के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
9. 'सरदार' हरिहर सिंह
हरिहर सिंह बिहार के नौवें मुख्यमंत्री रहे। महात्मा गांधी आजादी की लड़ाई के दौरान सतपहाड़ी क्षेत्र में आए थे। इस दौरान उनसे मिलने आए दो युवकों से उन्होंने बात की और गांधी जी काफी प्रसन्न हुए। जाते-जाते महात्मा गांधी बोले- आज से तुम दोनों के ऊपर इस इलाके की जिम्मेदारी है, तुम दोनों यहां के 'सरदार' हो। इसके बाद हरिहर सिंह के नाम के साथ सदा के लिए सरदार जुड़ गया। हरिहर सिंह भोजपुरी कवि भी थे। हरिहर सिंह के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
10. दारोगा प्रसाद राय
बिहार के 10वें मुख्यमंत्री के तौर पर दारोगा प्रसाद राय ने शपथ ली थी। बिहार राजपथ परिवहन ने पनी नौकरी में कोताही बरतने के आरोप में एक कंडक्टर को सस्पेंड कर दिया। आदिवासी कंडक्टर को सस्पेंड करने और सस्पेंशन वापस ने लेने का खामियाजा मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय को अपनी कुर्सी गंवाकर देना पड़ा। जब झारखंड पार्टी के नेता बागुन सुम्ब्रई ने उनकी सरकार से समर्थन वापस ले लिया। दारोगा प्रसाद राय के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
11. कर्पूरी ठाकुर
कर्पूरी ठाकुर बिहार के 11वें मुख्यमंत्री बने। वह दो बार इस पद तक पहुंचे, लेकिन कार्यकाल ज्यादा दिन नहीं चला। उन्हों शिक्षा व्यवस्था में एक अनोखा प्रयोग किया था। जिसके बाद अंग्रेजी विषय में फेल होने के बावजूद भी मैट्रिक की परीक्षा में छात्र को पास मान लिया जाता था। इस तरह से पास होने वाले छात्रों को लोग तंज कसते हुए कर्पूरी डिवीजन से पास कहने लगे थे। कर्पूरी ठाकुर के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
12. केदार पांडे
केदार पांडे बिहार के 12वें मुख्यमंत्री बने। वह केंद्र सरकार में भी रेल और ग्रामीण विकास मंत्री बने। एक समय वह बिहार में कांग्रेस के यंग टर्क्स कहे जाने वाले ग्रुप में शामिल थे। केदार पांडे 1972 से 1973 तक एक साल 105 दिन तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। 1977 में आपातकाल की समाप्ति के बाद वह 11 महीने तक जेल में भी रहे। केदार पांडे के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
13. अब्दुल गफूर
अब्दुल गफूर बिहार के 13वें मुख्यमंत्री बने। बिहार में छात्र आंदोलन चल रहा था, जिसका नेतृत्व जय प्रकाश नारायण यानी जेपी कर रहे थे। आंदोलन की आंच दिल्ली तक भी पहुंची और जब मुख्यमंत्री इंदिरा गांधी ने मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर से पूछा तो उन्होंने इसे छोटा आंदोलन कहकर टाल दिया। सीएम गफूर के निर्देश पर पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया और 8 लोगों की मौत हो गई। इसमें लालू यादव के भी मारे जाने की अफवाह फैली। यहां से यह आंदोलन बड़ा होता चला गया और केंद्र की इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ आवाज उठने लगी। अब्दुल गफूर के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
14. जगन्नाथ मिश्र
जगन्नाथ मिश्र बिहार के 14वें मुख्यमंत्री बने। वह तीन बार बिहार के सीएम रहे और बिहार में कांग्रेस के अब तक के अंतिम मुख्यमंत्री भी रहे। अयोध्या में विवादित ढांचा ढहने पर जगन्नाथ मिश्र ने आंसू भी बहाए। राजनीति में अपनी अंतिम पारी के लिए वह जेडीयू होते हुए भाजपा में भी शामिल हुए। जगन्नाथ मिश्र ने ही बिहार में उर्दू को राजकीय भाषा का दर्जा दिया। चारा घोटाला मामले में जगन्नाथ मिश्र को जेल भी जाना पड़ा। जगन्नाथ मिश्र के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
15. रामसुंदर दास
रामसुंदर दास बिहार के 15वें मुख्यमंत्री बने। आपातकाल के बाद कांग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा, लेकिन केंद्र में जनता पार्टी की सरकार भी ज्यादा दिन नहीं चली। 1980 में एक बार फिर कांग्रेस सत्ता में लौटी और इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं। उन्होंने 9 राज्यों की गैर कांग्रेसी सरकारों को बर्खास्त कर दिया। इनमें बिहार में मुख्यमंत्री रामसुंदर दास की सरकार भी थी। रामसुंदर दास के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
16. चंद्रशेखर सिंह
चंद्रशेखर सिंह बिहार के 16वें मुख्यमंत्री बने। चंद्रशेखर सिंह ने 1952 के पहले बिहार विधानसभा चुनाव में वैध उम्र न होते हुए भी चुनाव लड़ा और जीता भी। जब वह मुख्यमंत्री थे तो वह बिना लाल बत्ती की गाड़ी के अचान कहीं भी पहुंच जाते थे और जमीनी हकीकत जानते थे। इसकी वजह से उन्हें लोग धोती-कुर्ते वाला IAS कहने लगे थे। चंद्रशेखर सिंह के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
17. बिंदेश्वरी दुबे
बिंदेश्वरी दुबे बिहार के 17वें मुख्यमंत्री बने। बिंदेश्वरी दुबे से जुड़ा एक अहम किस्सा काफी रोचक है, जिसमें आपातकाल का बदला लेने के लिए बिहार के डॉक्टरों ने उनके खिलाफ प्रचार की कमान थाम ली और उन्हें हराकर ही दम लिया। बिंदेश्वरी दुबे के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
18-19. भागवत झा आजाद और सत्येन्द्र नारायण सिन्हा
भागवत झा आजाद बिहार के 18वें और सत्येन्द्र नारायण सिन्हा 19वें मुख्यमंत्री रहे। भागवत झा को शेर-ए-बिहहार नाम से भी जाना जाता था। वह राजनेता के साथ साहित्याकर भी थे। 19वें मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा को लोग प्यार से छोटे साहब कहते थे। बिनोदानंद झा के बाद उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय था, लेकिन उन्होंने केबी सहाय का नाम आगे बढ़ा दिया। भागवत झा आजाद और सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
20. लालू प्रसाद यादव
लालू प्रसाद यादव बिहार के 20वें मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, मेरा जन्म 1948 में हुआ और मेरे डर से अंग्रेज 1947 में ही गायब हो गए। वह बिहार ही नहीं देश की राजनीति में सबसे चर्चित और विवादित नेता हैं। जेपी आंदोलन से निकले लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री बनने के बाद भी लंबा समय पटना वेटनरी कॉलेज के पिऑन क्वार्टर में बिताया। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने पार्टी तोड़कर अपनी अलग पार्टी बना ली थी। लालू प्रसाद यादव के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
21. राबड़ी देवी
राबड़ी देवी बिहार की 21वीं और अब तक की इकलौती महिला मुख्यमंत्री बनीं। 25 जुलाई 1997 को जब राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो वह इस दौरान तीन बार लड़खड़ाई भी। इसको लेकर विपक्ष ने उनका खूब मजाक बनाया। दरअसल राबड़ी देवी को भी एक रात पहले ही पता लगा था कि वह मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं। राबड़ी देवी के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
22. नीतीश कुमार
नीतीश कुमार बिहार के 22वें और मौजूदा मुख्यमंत्री हैं। उनके कामों को देखते हुए उन्हें लोग सुशासन बाबू के नाम से जानते हैं। नीतीश कुमार साल 2000 में 7 दिन के लिए मुख्यमंत्री रहे थे। वह अब तक 9 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं और बिहार के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सीएम की कुर्सी पर रहने वाले शख्स बन चुके हैं। एक समय ऐसा भी आया था जब वह अपने पहले दो चुनाव हारने के बाद राजनीति छोड़ने का मन बना चुके थे। नीतीश कुमार के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
23. जीतन राम मांझी
जीतन राम मांझी बिहार के 23वें मुख्यमंत्री रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जेडीयू ने NDA से नाता तोड़ लिया था। लेकिन बिहार की 40 में से सिर्फ 2 सीटें जीतने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया और जीतन राम मांझी को कुर्सी थमा दी। लेकिन कुछ ही समय बाद जीतन राम मांझी के बयानों से नीतीश कुमार और पार्टी को दिक्कत होने लगी। मुख्यमंत्री रहते हुए जब वह दिल्ली गए हुए थे, तब उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया और बाद में उन्होंने अपनी पार्टी बना ली। जीतन राम मांझी के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
