'वंदे मातरम' के छंदों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर बॉलीवुड तक पहुंच गया है। हाल ही में वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर (Sharmila Tagore) के एक बयान पर बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कंगना ने शर्मिला टैगोर की सोच को "सीमित और बनावटी" बताते हुए कला व कविता के प्रति उनकी समझ पर सवाल खड़े किए हैं।
क्या था शर्मिला टैगोर का बयान?
'वंदे मातरम' के दो से अधिक छंद (स्टैंजा) गाने को लेकर जारी चर्चा के बीच शर्मिला टैगोर ने अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि 'वंदे मातरम' के बाकी के छंद उन लोगों के लिए गाना या स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है जो केवल एक ईश्वर में विश्वास रखते हैं, क्योंकि इसमें देवी-देवताओं और मूर्तियों के रूप में राष्ट्र की वंदना का उल्लेख है।
कंगना रनौत का पलटवार
शर्मिला टैगोर के इस बयान का स्क्रीनशॉट अपने इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए कंगना रनौत ने लंबी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, "मैं इस बात की तारीफ करती हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम को लेकर अपनी आपत्तियां जाहिर कीं। लेकिन एक कलाकार के तौर पर मुझे हैरानी है कि आर्ट और कविता को लेकर उनकी सोच इतनी सीमित और बनावटी कैसे हो सकती है? किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। एक कवि मनचाहा असर पैदा करने के लिए अलग-अलग तरह की कल्पनाओं का इस्तेमाल करता है और शानदार समानताएं बनाता है।"
कंगना ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आजादी के संग्राम की आत्मा और भावना है। इसके जरिए बंकिम बाबू देशवासियों को अपनी आंतरिक शक्ति जगाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। कंगना ने सवाल उठाते हुए लिखा कि कला के इतने महान और ऐतिहासिक नमूने को महज एक धार्मिक रीति-रिवाज या पूजा-पद्धति मान लेना बेहद संकीर्ण सोच है। कंगना ने आगे कहा कि कविता में 'शक्ति' का जिक्र ताकत और पावर के प्रतीक के तौर पर देखा जा सकता है। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि इस गाने पर बात करते समय वे "हिंदू-मुस्लिम सोच" से ऊपर उठें।
उन्होंने लिखा, "स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए जिनकी मांसपेशियां लोहे की, हड्डियां फौलाद की और नसें ऐसी हों जिनमें बिजली की कड़क दौड़ती हो। वे कोई मौसम का अनुमान नहीं लगा रहे थे, वे बस 'शक्ति' के जागरण की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम वाली मानसिकता से बाहर निकलें। भले ही हम एक ही ईश्वर में विश्वास क्यों न करते हों, डॉक्टर भी ऊर्जा को शक्ति ही कहते हैं। आइए हम एक-दूसरे को अपने समझकर गले लगाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और मुझे आपकी उस कसकर गले लगाने वाली झप्पी (हग) से भी कोई ऐतराज नहीं है, जैसा आप हमेशा मुझे देती हैं।"
