महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर हालात साफ किए। उन्होंने सोमवार को मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर कहा कि सरकार का मकसद हिंदी भाषी या अन्य भाषा बोलने वाले ड्राइवरों को मराठी का विशेषज्ञ बनाना नहीं है। उन्हें केवल कामकाज और यात्रियों से बुनियादी बातचीत के लिए जरूरी मराठी का ज्ञान होना चाहिए।
मराठी भाषा सीखने के दबाव को लेकर प्रदर्शन शुरू
उनका ये बयान तब आया है जब मराठी सीखने के कथित दबाव और ऑटो चालकों के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में मुंबई के कई इलाकों पर ऑटो रिक्शा चालक और मालिक विरोध प्रदर्शन करने पर उतर आए हैं। प्रदर्शन में शामिल हिंदी भाषी ऑटो रिक्शा ड्राइवरों ने दावा किया कि वे पिछले 40-50 वर्षों से मुंबई में रह रहे हैं और यहीं ऑटो रिक्शा चलाकर अपना परिवार चला रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें मराठी भाषा से कोई आपत्ति नहीं है और वे मराठी समझते हैं तथा कुछ हद तक बोल भी लेते हैं।
सीएम फडणवीस ने और क्या कहा?
फडणवीस ने कहा कि महायुति सरकार भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी का कार्यात्मक ज्ञान हासिल करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा।
महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने शुरू किया है अभियान
गौरतलब है कि महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से राज्यभर में ऑटो और टैक्सी चालकों के मराठी भाषा के व्यावहारिक ज्ञान की जांच के लिए अभियान शुरू किया है। इसी अभियान को लेकर सीएम ने यह बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि ड्राइवरों को भाषा सीखने के लिए पहले ही अतिरिक्त समय दिया गया है और अब तक किसी का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया है।
क्या बोले थे परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक
इससे पहले परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी इसे लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि जिन ड्राइवरों में जरूरी मराठी दक्षता नहीं पाई जाएगी, उन्हें शुरुआत में भाषा सीखने का अवसर दिया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं करने पर उनका लाइसेंस और बैज तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद भी नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर लाइसेंस और बैज रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है।
सरनाईक ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस अभियान का उद्देश्य किसी की आजीविका प्रभावित करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि ड्राइवरों को मराठी में बुनियादी संवाद करने में परेशानी न हो और महाराष्ट्र की भाषा, पहचान तथा संस्कृति का संरक्षण हो।
