इलेक्शन

हिमाचल चुनाव:'रिवाज' बदलने की तैयारी में भाजपा,राहुल फिर भी दूर, क्या दक्षिण के भरोसे कांग्रेस

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 9, 2022, 06:10 PM IST

Himachal Assembly Election 2022:हिमाचल प्रदेश उत्तर भारत के उन राज्यों में से एक है, जहां पर कांग्रेस अभी भी तीसरे और चौथे दल के नंबर पर नहीं पहुंची है। और पुराना रिकॉर्ड ऐसा रहा है कि वह 5 साल से ज्यादा सत्ता से दूर भी नहीं रही है। इसके बावजूद राहुल गांधी अभी तक प्रचार के लिए नहीं पहुंचे हैं।

KEY HIGHLIGHTS
  • यूपी की तरह हिमाचल में प्रियंका ने संभाल रखी है कमान।
  • राहुल गांधी का भारत जोड़ो यात्रा पर फोकस।
  • पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता चुनावी प्रचार में उतरे।

Himachal Assembly Election 2022: हिमाचल विधानसभा चुनाव के लिए 12 नवंबर को वोटिंग है। और एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर है। इन चुनावों में भाजपा जहां लगातार दूसरी बार सत्ता में आने की कोशिश में है। वहीं कांग्रेस उस रिकॉर्ड को बरकार रखने के लिए दांव लगा रही है, जिसमें कोई भी सरकार रिपीट नहीं हो पाई है। इन चुनावों में भाजपा ने रिवाज बदलेगा के नारे के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह से लेकर सभी प्रमुख नेताओं को मैदान में उतार दिया है, वहीं कांग्रेस की तरफ से उनके प्रमुख राहुल गांधी की दूरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी अभी तक हिमाचल प्रदेश में प्रचार के लिए नहीं आए हैं। सारा दारोमदार स्थानीय नेताओं और प्रियंका गांधी पर दिख रहा है।

राहुल गांधी ने बना रखी है दूरी

हिमाचल प्रदेश उत्तर भारत के उन राज्यों में से एक है, जहां पर कांग्रेस अभी भी तीसरे और चौथे दल के नंबर पर नहीं पहुंची है। और पुराना रिकॉर्ड ऐसा रहा है कि वह 5 साल से ज्यादा सत्ता से दूर भी नहीं रही है। ऐसे में इस बार भी उसके वापसी की मजबूत उम्मीद कांग्रेस के स्थानीय नेता कर रहे हैं। ऐसे में स्टार प्रचारकों की लिस्ट में शामिल होने के बावजूद राहुल गांधी अभी तक प्रचार के लिए नहीं पहुंचे हैं। जो कई सारे सवाल खड़े कर रहे हैं। जबकि इसके पहले वह 2007, 2012 और 2017 के चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार कर चुके हैं। ऐसी संभावना है कि वह चुनाव प्रचार के आखिरी दिन हिमाचल प्रदेश पहुंच सकते हैं।

यूपी की तरह हिमाचल में प्रियंका ने संभाल रखी है कमान

जिस तरह 2022 के यूपी विधान सभा चुनाव में गांधी परिवार की ओर से प्रियंका गांधी ने कमान संभाल रखी थी। कुछ उसी तरह प्रियंका गांधी हिमाचल में भी केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से पार्टी की कमान संभाल हुए हैं। वह लगातार राज्य में रैलियां कर रही हैं। और ऐसा पहली बार है जब वह हिमाचल में चुनाव प्रचार कर रही है। हालांकि उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी का जादू नहीं चल पाया था। और उसे 403 विधानसभा सीटों में से केवल 2 सीट पर जीत मिल पाई थी। ऐसे में हिमाचल में उनका कितना जादू चलेगा इसका पता 8 दिसंबर को परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।

दक्षिण भारत पर राहुल का फोकस

भले ही गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। लेकिन अभी तक राहुल गांधी का फोकस दक्षिण भारत ही रहा है। जहां वह भारत जोड़ो यात्रा पर फोकस किए हुए हैं। इसी वजह से अभी तक एक बार भी गुजरात में भी चुनाव प्रचार के लिए नहीं गए हैं। राहुल गांधी की अगुआई वाली भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर को शुरू हुई थी। पिछले 2 महीने में यात्रा के सफर को देखा जाय तो वह अभी दक्षिण भारत में ही जारी है। अब तक यह तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से गुजर चुकी है। अगर 2019 के लोक सभा चुनाव में प्रदर्शन को देखा जाय तो कांग्रेस ने इन राज्यों में 27 सीटें जीती थी। जिसमें केरल में 15, तमिलनाडु में 8, तेलंगाना में 3 और कर्नाटक में एक सीट मिली थी। जबकि पूरे देश से उसे 52 सीटें मिली थी। और इस समय राहुल गांधी केरल के वायनाड से ही सांसद हैं। 2019 को लोक सभा चुनाव में राहुल गांधी को गांधी परिवार के गढ़ अमेठी से हार का सामना करना पड़ा था।

भाजपा को मिलेगा फायदा

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां है। एक तो वह इस बार का चुनाव राज्य में कांग्रेस का चेहरा रहे और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बिना लड़ रही है। वीरभद्र सिंह का निधन हो चुका है। जबकि दूसरी चुनौती पार्टी के अंदर जारी कलह है। चुनाव से पहले पार्टी के कई नेता साथ छोड़ चुके हैं। जिसमें कार्यकारी अध्यक्ष हर्ष महाजन ने कांग्रेस छोड़ भाजपा ज्वाइन कर ली है। पूर्व टेलीकॉम मंत्री सुखराम के पोते आश्रय शर्मा,लखविंदर राणा भाजाप शामिल हो चुके हैं। और 5 बार के विधायक राम लाल ठाकुर ने नाराज होकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष का पद छोड़ दिया है। ऐसे में राहुल गांधी की रैलियों से दूरी क्या कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित होगी। इसके लिए 8 दिसंबर का इंतजार करना होगा।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

और पढ़ें
End of Article