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तालिबान को मान्यता देने की कार्रवाई शुरू, मॉस्को ने आतंकवादी सूची से हटाया, अफगानिस्तान ने फैसले का किया स्वागत

Russia Removes Taliban From Terrorist List: अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान को अभी तक किसी भी देश ने औपचारिक रूप से वैध नेतृत्व के तौर पर स्वीकृति नहीं दी है। हालांकि, चीन व यूएई ने इसके राजदूतों को स्वीकार कर लिया है और अब रूस ने तालिबान को आतंकवादी सूची से हटाया है।

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मॉस्को ने तालिबान को आतंकवादी सूची से हटाया

Photo : AP

Russia Removes Taliban From Terrorist List: अफगानिस्तान की कार्यवाहक सरकार के विदेश मंत्रालय ने तालिबान को आतंकवादी समूहों की सूची से हटाने के रूसी स्टेट ड्यूमा (संसद के निचले सदन) के फैसले का स्वागत किया है। रूस की इंटरफैक्स समाचार एजेंसी के हवाले से समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि रूसी स्टेट ड्यूमा ने मंगलवार को अफगानिस्तान के वर्तमान शासक तालिबान को प्रतिबंधित समूहों की सूची से हटाने के लिए आवश्यक तीन रीडिंग में से पहले बिल को मंजूरी दे दी। बता दें, रूस ने 2003 में तालिबान को आतंकवादी संगठन घोषित किया था।

मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी ने बुधवार शाम को अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट के जरिए खुशी जताई। कहा, अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात के विदेश मंत्रालय ने रूस में प्रतिबंधित संगठनों की सूची से 'तालिबान आंदोलन' को हटाने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव को मंजूरी देने के रूसी संघ की संसद के फैसले का स्वागत किया है।"

रूस और अफगानिस्तान के बीच फिर शुरू होंगे द्विपीक्षय संबंध

बयान में कहा गया, यह कदम एक प्रशंसनीय है और इसका उद्देश्य अफगानिस्तान और रूसी संघ के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने तथा बाधाओं को दूर करने वाला है। इसी तरह, अफगान कार्यवाहक सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने स्थानीय मीडिया को बताया कि यह निर्णय अफगानिस्तान और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के काबिज होने के बाद से ही रूस के रवैये में नरमी आई थी। राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने जुलाई 2024 में कहा था- रूस अफगानिस्तान के तालिबान आंदोलन को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोगी मानता है।

अभी तक नहीं मिली है मान्यता

बता दें, अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान को अभी तक किसी भी देश ने औपचारिक रूप से वैध नेतृत्व के तौर पर स्वीकृति नहीं दी है। हालांकि, चीन और यूएई ने इसके राजदूतों को स्वीकार कर लिया है। अब रूस के इस कदम पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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