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Delhi Chunav: दिल्ली की महरौली विधानसभा में किन मुद्दों पर होगा इस बार का चुनाव? लोगों ने बयां किया सबकुछ

Delhi Politics: दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम सियासी दलों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। अलग-अलग विधानसभा सीट से लोगों की राय सामने आ रही है। इसी बीत महरौली विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने अपनी परेशानी बयां की है। यहां पिछले पांच सालों में कोई विकास नहीं हुआ है।

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महरौली विधानसभा में क्या हैं इस बार के चुनावी मुद्दे?

Mehrauli Assembly Constituency: दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां जोरों पर हैं। एक तरफ आम आदमी पार्टी अपने पिछले 10 सालों के काम को लेकर जनता के बीच जाकर वोट मांग रही है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी लोगों के बीच आम आदमी पार्टी की नकामियों को लेकर जा रही है। इस पर दिल्ली की महरौली विधानसभा में जाकर समाचार एजेंसी आईएएनएस ने लोगों से बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के बारे में जाना। महरौली विधानसभा से आम आदमी पार्टी के नेता नरेश यादव वर्तमान में विधायक हैं।

महरौली के लोगों का दर्द- पानी और सीवर की कोई सुविधा नहीं

स्थानीय निवासी सूरज ने बताया, "हमारे यहां कोई काम नहीं हुआ। जो गंगाजल देने का वादा किया था, वह भी अब तक पूरा नहीं हुआ। पिछले 10 सालों से यही स्थिति है, पानी की लाइन तक नहीं डाली गई। जो पुरानी लाइन कांग्रेस के समय डाली गई थी, वही अब भी चल रही है। पानी और सीवर की कोई सुविधा नहीं है, गलियों में सीवर का पानी बह रहा है। लेकिन, किसी ने भी इसे ठीक कराने की कोशिश नहीं की। आम आदमी पार्टी ने जो वादे किए थे, वह अब तक पूरे नहीं हुए। मोहल्लों और बस्तियों में, बड़े-बुजुर्गों को पेंशन भी नहीं दी गई। अब चुनाव नजदीक है, तो पेंशन के आवेदन बांटे जा रहे हैं और कई और घोषणाएं की जा रही हैं, जो सिर्फ चुनावी फायदे के लिए की जा रही हैं। युवाओं को जो भी फायदा होना चाहिए, वह तो केजरीवाल सरकार नहीं कर रही है। जो लोग वोट मांगते हैं, उनका काम भी कोई नहीं कर रहा। पांच सालों में कोई ठोस काम नहीं हुआ है, सिर्फ घोषणाएं की गई हैं, जो अब चुनावी फायदे के लिए हो रही हैं।"

स्थानीय बोले- हमारे इलाके में सड़कों की हालत बहुत खराब है

राम प्रकाश ने बताया, " मौजूदा सरकार और उनके विधायक के कामों से मैं खुश नहीं हूं। हमारे इलाके में सड़कों की हालत बहुत खराब है, पानी की समस्या भी बनी हुई है। हमारे इलाके में आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश यादव हैं, जो पिछले दस साल से यहां हैं, लेकिन उन्होंने कोई काम नहीं किया। चुनाव के समय वह आते हैं, इसके बाद उनका नामोनिशान भी नहीं मिलता। सड़कों पर गड्ढे हैं, नल से गंदा पानी आ रहा है, जिससे लोग बीमार हो रहे हैं। सड़कों पर अक्सर हादसे होते हैं और लोग घायल होते हैं। उन्होंने जो विदेशों जैसी सड़कें बनाने का वादा किया था, वह भी पूरा नहीं हुआ। मोहल्ला क्लिनिकों की हालत इतनी खराब है कि वे कूड़े के ढेर बन गए हैं और वहां आम आदमी पार्टी के कुछ लोग बैठकर शराब पीते हैं और मस्ती करते हैं। अगर आप चाहें तो मैं आपको लाडो सराय या मुखिया कॉलोनी ले जाकर दिखा सकता हूं कि वहां कोई भी काम नहीं हुआ है। केवल आम आदमी पार्टी का प्रचार हो रहा है, उनके पोस्टर छप रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यही है कि काम कुछ नहीं हुआ। हम और महरौली की पूरी जनता इनसे खुश नहीं है।"

महरौली विधायक नरेश यादव से लोगों की नाराजगी

वार्ड नंबर दो में रहने वाले महेंद्र ने बताया, "यहां हमारे इलाके में आम आदमी पार्टी ने जो वादे किए थे, जैसे सुंदर सड़कें बनवाने और विदेशों जैसी सुविधाएं देने की, वो कुछ भी पूरा नहीं हुआ। पानी की किल्लत खत्म करने की बात की थी, लेकिन वो भी अब तक हल नहीं हुई। सड़कें, पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के मामले में कोई सुधार नहीं हुआ। विधायक ने कोई खास काम नहीं किया है, और मुझे तो बिल्कुल संतुष्टि नहीं है उनके कार्यों से। यहां पर कुछ भी ठोस काम नहीं हुआ, बस वादे ही किए गए थे जो अब तक पूरे नहीं हुए।"

तारादेवी ने बताया, "मेरे इलाके में पानी की बहुत समस्या है। हमें गर्मियों में तो पानी ही नहीं मिलता है। सर्दियों में तो थोड़ा बहुत पानी फिर भी आ जाता है, लेकिन गर्मियों में बहुत दिक्कत होती है। हमारे इलाके में सड़कें भी बहुत खराब हैं। नालियां तक रोड पर बहती रहती है। हमें परेशानी बहुत है। कोई देखने वाला नहीं है। मेरी पूरी गली में नाली का पानी ऊपर तक बहता रहता है। हम बहुत परेशानी में रहते हैं।"

(IANS)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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