By Election Result and Congress: उप चुनाव की लड़ाई को वैसे तो भाजपा बनाम क्षेत्रीय दल के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन इस लड़ाई के नतीजो ने कांग्रेस के लिए भी 2 अहम संदेश दे दिए हैं। पहला संदेश यह है कि कांग्रेस के लिए उसके बागी, खतरनाक साबित हो रहे हैं। जबकि दूसरा संदेश दक्षिण भारत के तेलंगाना से है। जहां पर पार्टी राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा निकलने के बावजूद, मुख्य विपक्षी दल भी नहीं रह गई और भाजपा से पिछड़कर तीसरे नंबर पर आ गई। इन परिणामों से कांग्रेस को 2 बड़े झटके लगे हैं।
कांग्रेस को बड़े झटके
अगर उप चुनावों के परिणामों को देखा जाय तो चाहे भाजपा हो या फिर दूसरे आरजेडी, शिव सेना वह भले ही भाजपा को झटका नहीं दे पाए, लेकिन अपनी सीटें बरकरार रखी हैं। लेकिन कांग्रेस ऐसा भी नहीं कर पाई है। पहले तो उसके हाथ से हरियाणा की आदमपुर सीट निकल गई। और दूसरी तरफ तेलंगाना की मुनूगोड़े सीट पर भी, उसे हार का सामना करना पड़ा है। जहां उसे केवल 22,449 वोट हासिल हुए हैं। खास बात यह है कि पहले यह सीट कांग्रेस के पास थी। तेलंगाना की सीट पर टीआरएस उम्मीदवार ने भाजपा उम्मीदवार को 10,311 वोटों से हराया। यानी कांग्रेस यहां पर भाजपा से भी पिछड़ गई।
वोटिंग के दौरान तेलंगाना में थे राहुल गांधी
तेलंगाना की मुनूगोड़े सीट पर कांग्रेस की हार इसलिए भी कई सवाल खड़ी करती है, क्योंकि वोटिंग के दौरान राहुल गांधी के नेतृत्व में निकली भारत जोड़ा यात्रा का पड़ाव तेलंगाना में था। राहुल गांधी 24 अक्टूबर से 7 नवंबर के दौरान तेलंगाना में ही भारत जोड़ो यात्रा का अगुआई कर रहे थे। इसके बावजूद मुनूगोड़े सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई । और इस सीट पर टीआरएस को सफलता मिल गई। अहम बात यह है कि साल 2023 में तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। और अगर इन चुनावों में टीआरएस बनाम भाजपा के समीकरण बनते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
भारत जोड़ो यात्रा राहुल गांधी के लिए बनेगी रीलांच प्लेटफॉर्म !
राहुल गांधी की अगुआई वाली भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर को शुरू हुई थी। और इस दौरान वह कुल 12 राज्यों से होकर गुजरेगी। पिछले 2 महीने के सफर को देखा जाय तो यात्रा अभी दक्षिण भारत में ही जारी है। अब तक यह तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से गुजर चुकी है। अगर 2019 के लोक सभा चुनाव में प्रदर्शन को देखा जाय तो कांग्रेस ने इन राज्यों में 27 सीटें जीती थी। जिसमें केरल में 15, तमिलनाडु में 8, तेलंगाना में 3 और कर्नाटक में एक सीट मिली थी। जबकि पूरे देश से उसे 52 सीटें मिली थी। यानी आधी सीटों से ज्यादा कांग्रेस को इन राज्यों में मिली थी। ऐसे में अगर उसका असर चुनावों में नहीं दिखता है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा सेटबैक साबित होगा।
