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White Buransh: प्रकृति का अनमोल गिफ्ट है 'सफेद बुरांस', समुद्रतल से 1800 ऊंचाई पर खिला

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  • Updated Feb 26, 2023, 08:34 PM IST

White Buransh: प्रदेश में इतनी कम ऊंचाई पर सफेद बुरांस कहीं भी नहीं खिलता है। ये ऊंचाई सिर्फ लाल बुरांस के लिए मुफीद है। यही नहीं, हिमालयी क्षेत्र में खिलने वाले सफेद बुरांस के पेड़ भी इस पेड़ की तुलना में काफी बौने होते हैं। ये पेड़ लगभग 20 मीटर ऊंचा है, जबकि सामान्य पेड़ पांच से छह मीटर ऊंचे होते हैं।

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सफेद बुरांस

Photo : IANS

White Buransh: मध्य हिमालयी क्षेत्रों में अमूमन लाल बुरांस की लालिमा और अद्भुत छठा बसंत की शुरूआत में देखने को मिलती है। लेकिन इन सबसे अलग और अद्भुत है सफेद बुरांस का पहाड़ी जीवन के सामान्य वातावरण में खिलना। सामान्य तौर पर उत्तराखंड (Uttarakhand) में वृक्ष पर खिलने वाला लाल बुरांस का फूल समुद्र तल से 1500 से 2500 मीटर के मध्य खिलता है। उससे ऊपर खिलने वाला बुरांस के सामान प्रजाति वाले पुष्प में सफेदी और गुलाबीपन होता है, जिसे जहरीला माना जाता है। लेकिन सफेद बुरांस (White Buransh) का सामान्य ऊंचाई पर खिलना अद्भुत तो है ही, साथ ही ये शोध का विषय भी है।

ये कुदरत का करिश्मा ही है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उगने वाला सफेद बुरांस का फूल जोशीमठ ब्लॉक में समुद्रतल से 1800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सेलंग गांव में खिल रखा है। लोग हैरत में हैं कि आखिर ये सफेद बुरांस इतनी कम ऊंचाई पर कैसे खिल रहा, जबकि इस ऊंचाई पर राज्य वृक्ष लाल बुरांस का फूल ही खिलता है। इन दिनों भी इस पेड़ के आसपास का पूरा क्षेत्र लाल बुरांस की लालिमा बिखेर रहा है। सफेद बुरांस समुद्रतल से 2900 मीटर से 3500 मीटर की ऊंचाई तक खिलता है, लेकिन सेलंग का ये सफेद बुरांस पिछले कई सालों से उत्सुकता जगाता आ रहा है।

प्रदेश में इतनी कम ऊंचाई पर सफेद बुरांस कहीं भी नहीं खिलता है। ये ऊंचाई सिर्फ लाल बुरांस के लिए मुफीद है। यही नहीं, हिमालयी क्षेत्र में खिलने वाले सफेद बुरांस के पेड़ भी इस पेड़ की तुलना में काफी बौने होते हैं। ये पेड़ लगभग 20 मीटर ऊंचा है, जबकि सामान्य पेड़ पांच से छह मीटर ऊंचे होते हैं। सेलंग निवासी कल्पेश्वर भंडारी बताते हैं कि पहाड़ के भूगोल से परिचित हर व्यक्ति इस बुरांस को देखकर आश्चर्यचकित हुए बिना नहीं रहता। लिहाजा इस दुर्लभ पेड़ को संरक्षित किए जाने की जरूरत है। वन विभाग को इस दिशा में पहल करनी चाहिए।

वनस्पति शास्त्री एवं राजकीय महाविद्यालय जोशीमठ वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर सुमन राणा कहते हैं कि कभी-कभी किन्हीं कारणों से सफेद बुरांस का बीज निचले स्थानों पर पहुंच जाता है। अलग एन्वायरनमेंटल सेटअप के कारण इसके पेड़ की प्रथम व द्वितीय पीढ़ी में मॉफरेलॉजिकल बदलाव आ जाता है। यही नहीं, पांचवीं व छठी पीढ़ी में तो आनुवांशिक गुणों के बदलने की भी संभावना रहती है। ऐसे में ये नई प्रजाति या सब प्रजाति बन जाती है। प्रोफेसर सुमन राणा के अनुसार सफेद बुरांस का ये पेड़ अभी प्रथम पीढ़ी का है, यानी इसमें सिंगल स्टेम है। लिहाजा ये बदलाव अस्थायी बदलाव माना जाएगा।

ये सफेद बुरांस रोडोडेंड्रॉन कैम्पेनुलेटम प्रजाति का है। स्थानीय भाषा में सफेद को लोग चिमुल, रातपा जैसे नामों से जानते हैं। छह महीने बर्फ की चादर ओढ़े रहने पर मार्च आखिर से जब बर्फ पिघलनी शुरू होती है, तब सफेद बुरांस के तने बाहर निकलते हैं और इन पर फूल खिलने लगते हैं। सामान्य तौर पर सफेद बुरांस के फूल एक से दो माह तक खिले रहते हैं। कई जगह देर से बर्फ पिघलने पर ये देर से भी खिलता है।

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