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माता वैष्णों के भक्त ठहरने की न लें टेंशन! खुलने वाला है शुभ्रा भवन; एक साथ 200 लोग उठा सकेंगें लाभ

जम्मू-कश्मीर में माता वैष्णो देवी तीर्थयात्रियों के ठहरने के लिए ‘शुभ्रा भवन' का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इसमें कई सुविधाएं प्रदान की जाएंगी जिसमें 200 लोगों के रहने की क्षमता है। यहां एक केंद्रीकृत सूचना और पंजीकरण केंद्र, दुकान, जलपान कियोस्क, बैंक व जल एटीएम और कर्मचारियों के लिए 18 आधुनिक आवासीय कक्ष शामिल हैं।

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शुभ्रा भवन

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

जम्मू: जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए उत्कृष्ट सुविधाओं से सुसज्जित एक अत्याधुनिक बहु-उपयोगी परिसर ‘शुभ्रा भवन’ का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इसे अगले सप्ताह जनता को समर्पित किया जाएगा। नवनिर्मित सुविधा केंद्र 18,000 वर्ग फुट में फैला है और इसके निर्माण पर 6.50 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। अधिकारी ने कहा कि इसका उद्घाटन श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा 18 दिसंबर को किया जाएगा।

मिलेंगी ये सुविधाएं

पवित्र तीर्थयात्रा के पारंपरिक मार्ग पर दर्शनी ड्योढ़ी से लगभग आधा किलोमीटर दूर बाणगंगा पर शुभ्रा भवन का निर्माण किया गया है। इसमें कई सुविधाएं प्रदान की जाएंगी जिसमें 200 लोगों के रहने की क्षमता वाला एक विशाल प्रतीक्षा लाउंज, माओं के लिए कमरा, एक केंद्रीकृत सूचना और पंजीकरण केंद्र, दुकान, जलपान कियोस्क, बैंक व जल एटीएम और कर्मचारियों के लिए 18 आधुनिक आवासीय कक्ष शामिल हैं।

अधिकारी ने कहा कि परिसर में एक आपदा प्रबंधन स्टोर भी है और यह तीर्थयात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे, ‘एक्सेस कंट्रोल’ और आग की चेतावनी देने वाली प्रणाली सहित अन्य सुरक्षा प्रणालियों से लैस है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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