आज का पंचांग (18 जून , 2026)

18

June
2026

05:39 - 19:1418:37 - 29:06
June 18, 2026
moon

12, चतुर्दशी

शुक्ल पक्ष, 2082 विक्रम सम्वत

पूर्वाषाढ़ा

नई दिल्ली, India

आज का पंचांग

चतुर्थी - 19:01:27 तक

पुष्य - 11:33:37 तक

करण

वणिज - 08:16:47 तक, विष्टि - 19:01:27 तक

पक्ष

शुक्ल

योग

व्याघात - 17:35:20 तक

वार

गुरूवार

सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
सूर्योदय

05:23:06

सूर्यास्त

19:21:05

चन्द्र राशि

कर्क

चन्द्रोदय

08:39:00

चन्द्रास्त

22:32:00

ऋतु

ग्रीष्म

हिन्दू मास एवं वर्ष
शक सम्वत

1948  पराभव

विक्रम सम्वत

2083

काली सम्वत

5127

प्रविष्टे / गत्ते

4

मास पूर्णिमांत

ज्येष्ठ

मास अमांत

ज्येष्ठ

दिन काल

13:57:59

अशुभ समय (अशुभ मुहूर्त)
दुष्टमुहूर्त

10:02:25 से 10:58:17 तक, 15:37:37 से 16:33:29 तक

कुलिक

10:02:25 से 10:58:17 तक

कंटक

15:37:37 से 16:33:29 तक

14:06:50 से 15:51:35 तक

कालवेला / अर्द्धयाम

17:29:21 से 18:25:13 तक

यमघण्ट

06:18:57 से 07:14:49 तक

यमगण्ड

05:23:06 से 07:07:50 तक

गुलिक काल

08:52:35 से 10:37:20 तक

शुभ समय (शुभ मुहूर्त)
अभिजीत

11:54:09 से 12:50:01 तक

दिशा शूल
दिशा शूल

दक्षिण

चन्द्रबल और ताराबल
ताराबल

अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती

चन्द्रबल

वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ

शुभ मुहूर्त

FAQs

पंचांग क्या होता है?

पंचांग एक पारंपरिक हिंदू कैलेंडर है जो किसी दिन के शुभ या अशुभ मुहूर्त को दर्शाता है। यह बताता है कि किसी विशेष कार्य को करने के लिए वह दिन अनुकूल है या नहीं।

पंचांग कैसे ढूंढें?

पंचांग में दिखने वाले “पाँच मुख्य अंग” कौन-कौन से हैं और उनका क्या महत्व है?

मेरे शहर/पता के अनुसार “आज का पंचांग” क्या बदल सकता है?

रोजाना पंचांग देखने से क्या लाभ मिलता है?

“शुभ मुहूर्त” व “अशुभ काल” का क्या अर्थ है?

पंचांग में “तिथि” का क्या मायना है और यह कैसे पहचानी जाती है?

वैदिक ज्योतिष में पंचांग को समय का प्रतिनिधि माना जाता है। जहाँ आधुनिक युग में लोग समय जानने के लिए कैलेंडर और घड़ी का सहारा लेते हैं, वहीं हिंदू धर्म के अनुयायी समय की गणना और शुभ-अशुभ मुहूर्त जानने के लिए पंचांग का प्रयोग करते हैं। पंचांग के माध्यम से केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की जानकारी ही नहीं मिलती, बल्कि दिनभर के सभी शुभ और अशुभ मुहूर्तों का भी विवरण प्राप्त होता है।

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो पंचांग एक वैदिक समय निर्धारण उपकरण है — एक प्रकार की वैदिक घड़ी — जो केवल उस विशेष भौगोलिक स्थान के लिए मान्य होती है, जिसके अनुरूप वह तैयार किया गया हो। यही कारण है कि विश्व के प्रत्येक नगर के लिए अलग-अलग पंचांग बनाए जाते हैं।

पंचांग के पांच प्रमुख अंग होते हैं:

  • तिथि
  • नक्षत्र
  • योग
  • करण
  • वार (सप्ताह का दिन)
  • राहु काल
  • शुभ मुहूर्त
इन पांच अंगों के साथ-साथ पंचांग तैयार करने वाले विद्वान लग्न, सूर्योदय-सूर्यास्त, चंद्रोदय, दिन और रात की अवधि, चंद्रमा और सूर्य की राशि स्थितियाँ आदि के आधार पर विभिन्न शुभ और अशुभ योगों का विश्लेषण करते हैं।