नक्षत्र पंचांग का सबसे मुख्य अंग है यह हिंदू चंद्रमास का एक दिन होता है। तिथि के आधार पर ही सभी वार, त्यौहार, महापुरुषों की जयंती, पुण्यतिथि आदि का निर्धारण होता है। एक तिथि तब पूर्ण मानी जाती है जब चंद्रमा सूर्य से 12 डिग्री पर स्थित होता है। तिथियां 16 होती हैं जिनमें अमवास्या व पूर्णिमा मास में एक बार ही आती हैं जबकि अन्य तिथियां दो बार आती हैं। वैदिक ज्योतिष में परिभाषित एक महीने में कुल 30 तिथियां होती हैं। पहले पंद्रह तीथों को शुक्ल पक्ष में, जबकि अगले पंद्रह तीथों को कृष्ण पक्ष में शामिल किया जाता है। 12 डिग्री पर चंद्रमा के झुकाव के साथ, माह के एक तिथि का समापन होता है। एक तिथि में पांच भाग होते हैं जिन्हें नंदा, भद्रा, रिक्ता, जया और पूर्णा कहा जाता है।
आज का नक्षत्र दिन में चंद्रमा की स्थिति के अनुसार निर्धारित होता है और यह किसी खास दिन चंद्रमा के जो नक्षत्र (सितारा) में होने को दर्शाता है।