नक्षत्र शनिवार, जुलाई 18, 2026

आज का नक्षत्र

शनिवार, जुलाई 18, 2026
पूर्वा फाल्गुनी - 18:01:05 तक

नक्षत्र पंचांग का सबसे मुख्य अंग है यह हिंदू चंद्रमास का एक दिन होता है। तिथि के आधार पर ही सभी वार, त्यौहार, महापुरुषों की जयंती, पुण्यतिथि आदि का निर्धारण होता है। एक तिथि तब पूर्ण मानी जाती है जब चंद्रमा सूर्य से 12 डिग्री पर स्थित होता है। तिथियां 16 होती हैं जिनमें अमवास्या व पूर्णिमा मास में एक बार ही आती हैं जबकि अन्य तिथियां दो बार आती हैं। वैदिक ज्योतिष में परिभाषित एक महीने में कुल 30 तिथियां होती हैं। पहले पंद्रह तीथों को शुक्ल पक्ष में, जबकि अगले पंद्रह तीथों को कृष्ण पक्ष में शामिल किया जाता है। 12 डिग्री पर चंद्रमा के झुकाव के साथ, माह के एक तिथि का समापन होता है। एक तिथि में पांच भाग होते हैं जिन्हें नंदा, भद्रा, रिक्ता, जया और पूर्णा कहा जाता है।

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शुभ मुहूर्त

FAQs

आज का नक्षत्र क्या होता है?

आज का नक्षत्र दिन में चंद्रमा की स्थिति के अनुसार निर्धारित होता है और यह किसी खास दिन चंद्रमा के जो नक्षत्र (सितारा) में होने को दर्शाता है।

नक्षत्र की गणना कैसे होती है?

आज के नक्षत्र के क्या लाभ होते हैं?

आज का नक्षत्र भारतीय वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा की 27 नक्षत्रों में से उस दिन के चंद्रमा के गोचर को दर्शाता है, जिसे जानना शुभ कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। नक्षत्र का निर्धारण चंद्रमा की स्थिति और गति के आधार पर किया जाता है, जिससे यह स्थानानुसार भिन्न हो सकता है। इसका उपयोग विवाह, गृह प्रवेश, व्यवसाय प्रारंभ, आदि शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त निकालने में होता है। इसके अलावा, जन्म के समय जो नक्षत्र होता है, उसे जन्म नक्षत्र कहा जाता है, जो व्यक्ति के स्वभाव और भाग्य को प्रभावित करता है.

नक्षत्र कैलकुलेट करने का तरीका चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है। चंद्रमा 27 नक्षत्रों के वृत्त का चक्कर लगभग 27 दिनों में लगाता है, इसलिए हर दिन नक्षत्र बदलता रहता है। नक्षत्रों को 27 भागों में बाँटा गया है, प्रत्येक का आकार 13 अंश 20 मिनट होता है। किसी दिन का नक्षत्र जानने के लिए उस दिन सूर्योदय के समय चंद्रमा की राशि और स्थिति देखी जाती है। चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वही आज का नक्षत्र माना जाता है, पर स्थान के अनुसार यह थोड़ा समयानुसार भिन्न हो सकता है क्योंकि चंद्रमा की स्थिति अलग-अलग जगह पर थोड़ी भिन्न होती है

नक्षत्रों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इनके आधार पर वैदिक ज्योतिष में व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे स्वास्थ्य, धन, विवाह, करियर आदि की भविष्यवाणी की जाती है। नक्षत्रों के देवता, ग्रह, और उनकी विशेषताएँ ज्योतिषीय विश्लेषण में उपयोगी होती हैं। इसके अलावा, नक्षत्रों के आधार पर नामकरण भी किया जाता है। नक्षत्रों के अनुसार सही दिन और समय पर किए गए कार्य शुभफल देते हैं और मनोकामनाएँ पूरी होती हैं.

नक्षत्रों का स्थान संबंधित क्षेत्र या स्थानानुसार चंद्रमा की वास्तविक स्थिति पर निर्भर करता है, इसीलिए आज का नक्षत्र स्थानिक आधार पर एक-दूसरे से भिन्न हो सकता है। भाग्यशाली कार्यों के लिए यही नक्षत्र देखा जाता है ताकि फलदायी निर्णय लिए जा सकें। नक्षत्रों की गणना में सूर्य और चंद्रमा के साथ ही पंचांग के अन्य तत्व जैसे तिथि, योग, करण भी शामिल होते हैं, जिनका सामूहिक अध्ययन करके शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम समय चुना जाता है.

इस प्रकार आज का नक्षत्र जानना और समझना भारतीय परंपरा और ज्योतिष में गहरा महत्व रखता है। यह न केवल शुभ समय निर्धारण में सहायक है, बल्कि व्यक्ति की जन्मकुंडली, स्वभाव, स्वास्थ्य, और जीवन के निर्णयों में मार्गदर्शन करता है। नक्षत्र के विभिन्न पहलुओं को समझकर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता, समृद्धि और स्थिरता प्राप्त कर सकता है.