तिथि रविवार, जुलाई 12, 2026

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रविवार, जुलाई 12, 2026

पूर्णिमांत - कृष्ण, त्रयोदशी - 22:32:30 तक, आषाढ, विक्रम सम्वत - 2083

अमांत - कृष्ण, त्रयोदशी - 22:32:30 तक, ज्येष्ठ, शक सम्वत - 1948  पराभव

आज की तिथि (Aaj ki Tithi) आषाढ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी - 22:32:30 तक है, जो रविवार को हिंदू पंचांग के अनुसार है। तिथि हिंदू कैलेंडर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे शुभ-अशुभ मुहूर्त, त्योहार, व्रत, और सामाजिक कार्यों का निर्धारण होता है।

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शुभ मुहूर्त

FAQs

तिथि क्या है?

तिथि हिंदू पंचांग का एक दिन होता है, जो सूर्य और चंद्रमा की आकाशीय स्थिति के आधार पर निर्धारित होता है।

तिथि जानने के क्या फायदे हैं?

क्या हर जगह एक ही तिथि होती है?

शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में क्या अंतर है?

अमांत और पूर्णिमांत पंचांग किसे कहते हैं?

तिथि क्या है और प्रकार


तिथि का अर्थ है चंद्रमा और सूर्य की स्थिति के आधार पर हिन्दू महीनों के एक विशिष्ट दिन का निर्धारण। प्रत्येक मास में 30 तिथियां होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष (अमावस्या से पूर्णिमा) और 15 कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा से अमावस्या)। तिथियों के नाम हैं: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या और पूर्णिमा।

तिथि की गणना कैसे होती है?

तिथि गणना सूर्य और चंद्रमा की आकाशीय स्थिति से होती है। साधारणतः, चंद्रमा की लोंगिट्यूड (डिग्री) में से सूर्य की लोंगिट्यूड घटाकर जो फर्क मिलता है, उसे 12 से विभाजित करने पर पता चलता है कि कौनसी तिथि चल रही है। एक तिथि 12 डिग्री के अंतर से बनती है, कृपया उदाहरण देखें:
  • सूर्य की लोंगिट्यूड: 160°
  • चंद्रमा की लोंगिट्यूड: 338°
  • अंतर: 338 - 160 = 178°
  • तिथि: 178 ÷ 12 = 14.83 → 15वीं तिथि (पूर्णिमा के बाद 14 तिथियां)
तिथि दिन के अलग-अलग समय पर शुरू हो सकती है और 19 से 27 घंटे तक चल सकती है, इसीलिए पंचांग में तिथि बदलने का समय निर्धारित होता है।

तिथि स्थान अनुसार क्यों बदलती है?

तिथि का निर्धारण स्थानीय समय, सूर्य-चंद्रमा की स्थिति और भूगोल पर निर्भर करता है। अलग-अलग क्षेत्र का सूर्योदय/सूर्यास्त समय और टाइम ज़ोन अंतर, तिथि में भिन्नता लाते हैं। भारत के बाहर तो एक ही तिथि कभी-कभी अलग तारीखों पर आ सकती है। अलग-अलग पद्धतियों (अमान्ता, पूर्णिमान्ता) और परंपराओं के कारण भी तिथि बदल सकती है।

तिथि के लाभ

तिथि का सही ज्ञान से शुभ कार्य, विवाह, यात्रा, व्रत, यज्ञ, पूजा आदि का सर्वोत्तम समय चुना जा सकता है। तिथि आधारित मुहूर्त से भाग्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यवसाय और समृद्धि में सुधार संभव है। हर तिथि का भाव, स्वामी और महत्व अलग है:
  • तृतीया: नाखून, बाल काटने, मुंडन हेतु उत्तम।
  • चतुर्थी: बाधाओं के निवारण के लिए सही।
  • सप्तमी: यात्रा, खरीदारी के लिए उपयुक्त।
  • पूर्णिमा: व्रत, यज्ञ, कथा आदि के लिए शुभ।

तिथि का पंचांग में महत्व

पंचांग में तिथि के साथ वार, नक्षत्र, योग, करण का भी महत्व है। इनका संयोग हर कार्य के निर्वहन हेतु सबसे शुभ समय बताता है।