वैदिक ज्योतिष में राहु काल को एक अशुभ समय माना गया है। यह समय प्रतिदिन कुछ अवधि के लिए आता है और इस दौरान शुभ कार्य करना वर्जित समझा जाता है। राहु काल का संबंध छाया ग्रह राहु से होता है, जो व्यक्ति के जीवन में भ्रम, अस्थिरता और अचानक आने वाली बाधाओं का संकेतक माना गया है। इसी कारण हमारे शास्त्रों में इस समय को सावधानी से बिताने की सलाह दी गई है।
राहु काल का महत्व क्यों है?
राहु काल का महत्व इसलिए है क्योंकि इस समय किए गए नए कार्यों में बाधा आने की संभावना अधिक रहती है। विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार की शुरुआत, यात्रा की शुरुआत जैसे कार्य राहु काल में करने से बचना चाहिए। हालांकि पूजा-पाठ, जप-तप या पहले से चल रहे कार्य इस समय में किए जा सकते हैं। कई बार लोग इसे अंधविश्वास समझते हैं, लेकिन अनुभव से देखा गया है कि राहु काल में निर्णय लेने से मन में उलझन बढ़ जाती है और परिणाम अपेक्षा के अनुसार नहीं मिलते।
| दिन | राहु काल | यमगंडम | गुलिका |
|---|---|---|---|
| सोमवार | 7:30 – 9:00 | 10:30 – 12:00 | 13:30 – 15:00 |
| मंगलवार | 15:00 – 16:30 | 9:00 – 10:30 | 12:00 – 13:30 |
| बुधवार | 12:00 – 13:30 | 7:30 – 9:00 | 10:30 – 12:00 |
| गुरुवार | 13:30 – 15:00 | 6:00 – 7:30 | 9:00 – 10:30 |
| शुक्रवार | 10:30 – 12:00 | 15:00 – 16:30 | 7:30 – 9:00 |
| शनिवार | 9:00 – 10:30 | 13:30 – 15:00 | 6:00 – 7:30 |
| रविवार | 16:30 – 18:00 | 12:00 – 13:30 | 15:00 – 16:30 |
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राहु काल दिन का वह समय होता है जिसे वैदिक ज्योतिष में अशुभ माना गया है। यह समय छाया ग्रह राहु के प्रभाव में रहता है, इसलिए इस दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।