2026 Annaprashan Muhurat Dates: 2026 में अन्नप्राशन के कितने मुहूर्त हैं, नोट करें अन्नप्राशन संस्कार 2026 की डेट व तिथि
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Dec 31, 2025, 02:01 PM IST
2026 Annaprashan Muhurat Dates: बच्चे के जन्म के लगभग 6 माह बाद उसको पहली बार ठोस भोज ग्रहण कराया जाता है। इस प्रक्रिया को ही अन्नप्राशन संस्कार कहा जाता है। 6 माह तक बच्चा सिर्फ दूध पर रहता है। इस संस्कार का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। इस कारण इसको शुभ मुहूर्त में ही किया जाता है। आइए जानते हैं साल 2026 में अन्न प्राशन के शुभ मुहूर्त क्या हैं, 2026 में बच्चे को अन्नप्राशन कब करा सकते हैं।
साल 2026 में अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
2026 Annaprashan Muhurat Dates: हर माता-पिता के लिए बच्चे की पहली उपलब्धियां अनमोल होती हैं। बच्चे का पहला शब्द बोलना, पहली मुस्कान, पहला कदम और पहली बार ठोस भोजन करना आदि ये पल जीवनभर याद रहते हैं। जन्म के शुरुआती छह महीनों तक शिशु केवल मां का दूध या फॉर्मूला मिल्क पीता है। उसके बाद जब बच्चा पहली बार अर्ध-ठोस या ठोस भोजन ग्रहण करता है, तो यह उसके विकास का एक बड़ा पड़ाव होता है। हिंदू धर्म में इस अवसर को विशेष संस्कार के रूप में मनाया जाता है, जिसे अन्नप्राशन या अन्नप्रासन कहा जाता है। संस्कृत में इसका अर्थ 'अन्न से परिचय' या 'अन्न का प्राशन' है। यह संस्कार बच्चे को ठोस भोजन से जोड़ने का प्रतीक है और उसके स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा सुख-समृद्धि की कामना के साथ किया जाता है।
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इस संस्कार को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। दक्षिण भारत विशेषकर केरल में इसे चोरूनु, बंगाल में मुखे भात, और उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में भात खुलाई कहा जाता है। हर जगह की परंपरा में थोड़ा अंतर होता है, लेकिन मूल उद्देश्य एक ही है। बच्चे को नए भोजन से परिचित कराना और शुभकामनाएं देना होता है। यह शुभ मुहूर्त में किया जाता है। आइए जानते हैं कि 2026 में अन्नप्राशन का शुभ मुहूर्त क्या है?
जनवरी 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 1 जनवरी 2026: सुबह 07:48 से सुबह 10:22 तक
सुबह 11:51 से दोपहर 04:45 तक
शाम 07:01 से रात 10:50 तक
शाम 08:38 से रात 10:50 तक
सुबह 11:57 से शाम 05:40 तक
फरवरी 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 6 फरवरी 2026: सुबह 07:38 से सुबह 08:01 तक
सुबह 09:29 से दोपहर 02:20 तक
शाम 04:40 से रात 11:32 तक
मार्च 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 4 मार्च 2026: शाम 07:37 से रात 09:50 तक 5 मार्च 2026: सुबह 07:43 से दोपहर 12:36 तक
दोपहर 02:54 से रात 09:40 तक
सुबह 09:44 से दोपहर 04:14 तक
शाम 06:32 से रात 10:40 तक
अप्रैल 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 2 अप्रैल 2026: सुबह 07:18 से सुबह 08:51 तक 3 अप्रैल 2026: सुबह 10:45 से दोपहर 01:00 तक
दोपहर 03:20 से रात 10:12 तक
दोपहर 02:01 से रात 11:12 तक
मई 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 1 मई 2026: दोपहर 01:30 से शाम 08:22 तक
- 4 मई 2026: सुबह 06:47 से सुबह 10:53 तक 11 मई 2026: शाम 05:24 से शाम 07:42 तक
रात 10:02 से मध्यरात्रि 12:00 तक
जून 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 17 जून 2026: सुबह 05:54 से सुबह 08:02 तक
दोपहर 12:42 से शाम 07:34 तक
रात 09:41 से रात 10:03 तक
जुलाई 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 1 जुलाई 2026: सुबह 09:30 से सुबह 11:44 तक
शाम 04:26 से रात 10:28 तक
शाम 04:19 से रात 10:22 तक
शाम 07:51 से रात 10:13 तक
दोपहर 03:08 से रात 09:11 तक
दोपहर 02:33 से शाम 08:36 तक
शाम 04:44 से रात 09:56 तक2026 गृहप्रवेश मुहूर्त
अगस्त 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 3 अगस्त 2026: सुबह 09:37 से दोपहर 04:31 तक
शाम 06:36 से रात 10:30 तक
शाम 08:10 से रात 09:36 तक
सितंबर 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 17 सितंबर 2026: दोपहर 03:39 से शाम 08:13 तक 21 सितंबर 2026: सुबह 08:41 से शाम 05:04 तक
शाम 06:33 से रात 09:31 तक
दोपहर 01:07 से शाम 06:20 तक
शाम 07:46 से रात 11:15 तक
अक्टूबर 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 12 अक्टूबर 2026: सुबह 07:19 से सुबह 09:35 तक
सुबह 11:57 से शाम 05:10 तक
शाम 06:35 से रात 10:03 तक
नवंबर 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 6 नवंबर 2026: दोपहर 12:22 से दोपहर 02:04 तक 11 नवंबर 2026: सुबह 07:40 से सुबह 09:54 तक
दोपहर 12:03 से दोपहर 01:41 तक
दोपहर 02:53 से शाम 07:47 तक
रात 10:03 से मध्यरात्रि 12:20 तक
दिसंबर 2026: अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्त
- 3 दिसंबर 2026: सुबह 07:29 से दोपहर 12:14 तक 14 दिसंबर 2026: सुबह 07:37 से सुबह 11:34 तक
दोपहर 01:06 से शाम 05:55 तक
दोपहर 02:20 से दोपहर 03:52 तक
दोपहर 01:44 से रात 09:50 तक
दोपहर 12:00 से दोपहर 01:20 तक
कब करें अन्न प्राशन?
हिंदू परंपरा में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत सही समय पर करना आवश्यक माना जाता है। मुहूर्त की गणना पंचांग, नक्षत्र, तिथि और बच्चे की कुंडली के आधार पर की जाती है। अन्नप्राशन के लिए बच्चे का जन्म नक्षत्र सबसे महत्वपूर्ण होता है। सामान्य नियम के अनुसार लड़कों के लिए यह संस्कार जन्म के 6वें, 8वें, 10वें या 12वें महीने में किया जाता है। वहीं, लड़कियों के लिए 5वें, 7वें, 9वें या 11वें महीने में अन्नप्राशन शुभ माना जाता है।
2026 में अन्नप्राशन के लिए शुभ मुहूर्त चुनते समय बच्चे की राशि, नक्षत्र और परिवार की कुल परंपरा का भी ध्यान रखें। पंचांग में शुभ तिथि, नक्षत्र (जैसे पुष्य, अश्विनी, रोहिणी आदि) और अभिजित मुहूर्त को प्राथमिकता दी जाती है। सही मुहूर्त में किया गया यह संस्कार बच्चे को स्वास्थ्य, बुद्धि और सफलता प्रदान करता है।
अन्नप्राशन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
अन्नप्राशन हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक है। यह बच्चे के जीवन में पोषण और विकास की नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। परंपरागत विधि में बच्चे को चावल की खीर या अन्य सात्विक भोजन का पहला निवाला खिलाया जाता है। इसके साथ ही प्रतीकात्मक रूप से मीठा, नमकीन, खट्टा, कड़वा और तीखा स्वाद चखाया जाता है, ताकि बच्चा जीवन के सभी रसों को समझे और संतुलित रहे। पूजा में भगवान गणेश और कुल देवता की आराधना की जाती है, मंत्रोच्चारण होता है और परिवार के बड़े-बुजुर्ग बच्चे को आशीर्वाद देते हैं। यह संस्कार न केवल शारीरिक पोषण से जुड़ा है, बल्कि बच्चे की बुद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना भी करता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किया गया अन्नप्राशन बच्चे के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है और उसे मजबूत बनाता है।
अन्नप्राशन कैसे करें?
बच्चे को नए कपड़े पहनाएं और स्नान कराएं। घर में पूजा स्थल सजाएं, गणेश जी और कुल देवता की पूजा करें। चावल की खीर या सात्विक भोजन तैयार करें।
पंडित जी से मंत्रोच्चारण करवाएं और बच्चे को पहला निवाला खिलाएं। परिवार और रिश्तेदारों को आमंत्रित करें, आशीर्वाद लें और दान-पुण्य करें।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी मुहूर्त पंचांग के अनुसार हैं। अन्नप्राशन जैसे संस्कार के लिए बच्चे की कुंडली और स्थानीय पंडित जी से परामर्श अवश्य लें। ये जानकारी केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।