2026 Mundan Muhurat Shubh Dates: हिंदू धर्म में जन्म के बाद बच्चे के पहले बाल उतारने की परंपरा को मुंडन संस्कार या चौल कर्म कहा जाता है। यह संस्कार बच्चे के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। लड़कों का मुंडन आमतौर पर 1, 3, 5 या 7 जैसे विषम वर्षों में किया जाता है, जबकि लड़कियों का मुंडन सम वर्षों जैसे 2, 4, 6, 8 में किया जाता है। कई परिवारों में कुल परंपरा के अनुसार बच्चे के पहले या तीसरे वर्ष में ही यह संस्कार कर दिया जाता है। मुंडन केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण हैं।
महीनों को अनुसार मुंडन के शुभ मुहूर्त 2026
जनवरी 2026: मुंडन के शुभ मुहूर्त
- 21 जनवरी 2026 (बुधवार): सुबह 07:14 से रात 02:49 तक (अगले दिन तक)
- 29 जनवरी 2026 (गुरुवार): सुबह 07:32 से दोपहर 01:57 तक
फरवरी 2026: मुंडन के शुभ मुहूर्त
- 11 फरवरी 2026 (बुधवार): सुबह 10:53 से रात 11:03 तक (अगले दिन तक)
- 12 फरवरी 2026 (गुरुवार): सुबह 07:02 से दोपहर 01:43 तक
- 18 फरवरी 2026 (बुधवार): शाम 05:00 से रात 09:16 तक
- 26 फरवरी 2026 (गुरुवार): सुबह 06:49 से दोपहर 12:12 तक
- 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार): सुबह 10:49 से रात 10:35 तक
मार्च 2026: मुंडन के शुभ मुहूर्त
- 6 मार्च 2026 (शुक्रवार): सुबह 09:30 से शाम 05:56 तक
- 16 मार्च 2026 (सोमवार): सुबह 09:43 से रात 06:30 तक (अगले दिन तक)
- 25 मार्च 2026 (बुधवार): सुबह 06:20 से दोपहर 01:52 तक
- 27 मार्च 2026 (शुक्रवार): सुबह 10:09 से सुबह 06:17 तक (अगले दिन तक)
अप्रैल 2026: मुंडन के शुभ मुहूर्त
- 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार): सुबह 08:45 से सुबह 06:09 तक (अगले दिन तक)
- 13 अप्रैल 2026 (सोमवार): सुबह 05:58 से रात 01:11 तक (अगले दिन तक)
- 23 अप्रैल 2026 (गुरुवार): सुबह 05:48 से रात 08:52 तक
मई 2026: मुंडन के शुभ मुहूर्त
- 1 मई 2026 (शुक्रवार): सुबह 05:40 से रात 10:55 तक
- 4 मई 2026 (सोमवार): सुबह 09:58 से रात 09:27 तक (अगले दिन तक)
- 11 मई 2026 (सोमवार): दोपहर 03:27 से रात 01:29 तक (अगले दिन तक)
जून 2026: मुंडन के शुभ मुहूर्त
- 17 जून 2026 (बुधवार): सुबह 05:22 से रात 09:41 तक
- 24 जून 2026 (बुधवार): सुबह 05:24 से रात 09:24 तक (अगले दिन तक)
- 25 जून 2026 (गुरुवार): सुबह 05:24 से शाम 04:30 तक
जुलाई 2026: मुंडन के शुभ मुहूर्त
- 2 जुलाई 2026 (गुरुवार): सुबह 09:28 से रात 09:26 तक (अगले दिन तक)
- 3 जुलाई 2026 (शुक्रवार): सुबह 05:27 से सुबह 11:23 तक
- 9 जुलाई 2026 (गुरुवार): सुबह 10:40 से दोपहर 02:56 तक
- 15 जुलाई 2026 (बुधवार): सुबह 11:53 से रात 09:47 तक
- 20 जुलाई 2026 (सोमवार): शाम 07:10 से सुबह 04:04 तक (अगले दिन तक)
क्या हैं मुंडन के धार्मिक कारण?
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, बच्चा जब मां के गर्भ में रहता है, तब उसके जन्मकालीन बालों में पूर्व जन्मों के संस्कार और ऋण जुड़े होते हैं। मुंडन संस्कार से इन बालों को हटाकर बच्चे को पिछले जन्मों के बंधनों से मुक्ति मिलती है। इससे बच्चे का जीवन नई शुरुआत के साथ शुद्ध और पवित्र होता है। यजुर्वेद में मुंडन को बल, आयु, स्वास्थ्य और तेज की वृद्धि करने वाला महत्वपूर्ण संस्कार बताया गया है। यह संस्कार बच्चे के लिए आरोग्य, दीर्घायु और बुद्धि की कामना के साथ किया जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से क्या हैं मुंडन के लाभ?
वैज्ञानिक रूप से देखें तो गर्भ में बच्चे के सिर पर जो बाल होते हैं, उनमें कई हानिकारक बैक्टीरिया और अशुद्धियां जमा हो जाती हैं, जो सामान्य धुलाई से पूरी तरह साफ नहीं होती हैं। मुंडन से सिर पूरी तरह साफ हो जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है। इसके अलावा मुंडन के बाद सिर पर सीधी धूप पड़ने से विटामिन डी की प्राप्ति होती है, जो हड्डियों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी है। सिर की त्वचा पर रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे नए बाल मजबूत और घने उगते हैं। शरीर का तापमान संतुलित रहता है और मस्तिष्क का विकास अच्छा होता है। दांत निकलते समय होने वाला दर्द और बुखार कम परेशान करता है।
मुंडन के लिए शुभ मुहूर्त है आवश्यक
मुंडन संस्कार शुभ मुहूर्त में करने से बच्चे के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पंचांग के अनुसार मुंडन संस्कार में कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। इसमें शुभ मास जैसे चैत्र, वैशाख, आषाढ़ (आषाढ़ी एकादशी से पहले), माघ और फाल्गुन मास मुंडन के लिए उत्तम हैं। ज्येष्ठ मास में बड़े बच्चों का मुंडन न करें और ज्येष्ठ में जन्मे बच्चे का मुंडन भी टालें।
शुभ तिथियां: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथियां शुभ मानी जाती हैं।
शुभ वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार शुभ हैं। शुक्रवार को लड़कियों का मुंडन न करें।
शुभ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, पुनर्वसु, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठ, श्रवण, धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र मुंडन के लिए सर्वोत्तम हैं।
लग्न का विचार: द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, षष्ठम, सप्तम, नवम या द्वादश राशि का लग्न या इनका नवांश शुभ होता है।
वर्जित समय: जन्म मास, जन्म नक्षत्र या चंद्रमा के चतुर्थ, अष्टम, द्वादश भाव में होने पर मुंडन टालें। कुछ परंपराओं में जन्म नक्षत्र या जन्म राशि को ही शुभ मानते हैं।
मुंडन के बाद करें ये काम
मुंडन संस्कार बच्चे के भविष्य के लिए कल्याणकारी होता है, लेकिन शुभ मुहूर्त का चयन बहुत जरूरी है। कुल परंपरा का भी सम्मान करें। मुहूर्त निश्चित करने के लिए किसी विद्वान ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें। मुंडन के बाद कटे बालों को नदी या पवित्र जल में विसर्जित करें और दान-पुण्य करें। यह संस्कार बच्चे को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है। परिवार की परंपरा और श्रद्धा से इसे संपन्न करें ताकि बच्चे का जीवन सुखमय और स्वस्थ रहे।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी मुहूर्त पंचांग के अनुसार हैं। मुंडन जैसे संस्कार के लिए बच्चे की कुंडली और स्थानीय पंडित जी से परामर्श अवश्य लें। ये जानकारी केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
