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तो क्या सोनिया के बाद प्रियंका गांधी रायबरेली से लड़ेंगी चुनाव? कांग्रेस ने दिया बड़ा संकेत

Lok Sabha Election 2024: सोनिया गांधी पहली बार राज्यसभा का चुनाव लड़ रही हैं, मतलब साफ है कि कांग्रेस इस बार रायबरेली से किसी अन्य उम्मीदवार को मैदान पर उतारेगी। मगर वो कौन होगा? इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नही हैं, हालांकि यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इस ओर इशारा किया है।

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रायबरेली सीट पर कांग्रेस कौन लड़ेगा लोकसभा चुनाव?

Photo : Times Now Digital

Congress Plan For Raebareli Seat: क्या प्रियंका गांधी वाड्रा अपनी मां सोनिया गांधी की सीट रायबरेली से आगामी लोकसभा चुनाव लड़ेंगी? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि सोनिया ने राज्यसभा चुनाव के लिए राजस्थान से नामांकन दाखिल किया है। अब उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने ये साफ कर दिया है कि इस सीट से गांधी परिवार का ही सदस्य चुनाव लड़ेगा। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या राहुल गांधी अठेमी में मिली हार के बाद अब रायबरेली में किस्मत आजमाएंगे या फिर पहली बार प्रियंका चुनावी मैदान में ताल ठोकेंगी?

रायबरेली सीट से कांग्रेस किसे देगी टिकट?

माना जाता रहा है कि यूपी अमेठी और रायबरेली कांग्रेस का गढ़ है, मगर पिछली बार के लोकसभा चुनाव के नतीजे याद किया जाए तो अमेठी से राहुल गांधी को भाजपा की स्मृति ईरानी ने करारी मात दी थी। अब बची है रायबरेली की सीट, मगर सोनिया गांधी के फैसले से ये साफ हो गया है कि वो अब इस सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगी, क्योंकि वो राजस्थान से राज्यसभा चुनाव लड़ रही हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से गांधी परिवार के एक सदस्य के चुनाव लड़ने का संकेत देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने शनिवार को कहा, 'यह सीट गांधी परिवार के पास रहेगी।'

'गांधी परिवार से रायबरेली के लोगों का गहरा नाता'

मीडिया के साथ बातचीत के दौरान अजय राय ने कहा, 'रायबरेली के लोगों का गांधी परिवार के साथ पीढ़ियों से गहरा नाता रहा है। यह सीट गांधी परिवार की है और गांधी परिवार के पास रहेगी।' यह पूछे जाने पर कि गांधी परिवार से कौन वहां से चुनाव लड़ेगा, राय ने कहा, 'इस पर निश्चित रूप से उन लोगों (गांधी परिवार) द्वारा निर्णय किया जाएगा।'

आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी सोनिया गांधी

साल 2004 से रायबरेली सीट से सांसद, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बृहस्पतिवार को अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों को सूचित किया कि वह स्वास्थ्य कारणों से आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। रायबरेली के लोगों को संबोधित अपने पत्र में 77 वर्षीय नेता सोनिया गांधी ने लिखा, 'इस निर्णय के बाद मुझे सीधे तौर पर आपकी सेवा का अवसर नहीं मिलेगा, लेकिन मेरा दिल और आत्मा हमेशा आपके साथ रहेगी। मुझे पता है कि आप पहले की तरह मेरे और मेरे परिवार का साथ भविष्य में भी देंगे।'

प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी चुनाव?

ऐसी अटकलें हैं कि सोनिया गांधी के रायबरेली सीट छोड़ने के बाद उनकी बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं। इस बीच, मीडिया के साथ बातचीत में अजय राय ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जब काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन के लिए गए तो कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा, 'सभी भाजपा नेता जब काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन के लिए आते हैं तो उन्हें कैमरे के साथ आने दिया जाता है। लेकिन राहुल गांधी को कैमरे के साथ मंदिर नहीं जाने दिया गया और अभी तक प्रशासन द्वारा कोई फोटो जारी नहीं की गई।' कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के उत्तर प्रदेश पहुंचने के दूसरे दिन राहुल गांधी ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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