इलेक्शन

Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025: दिल्ली के दंगल में कुल कितने उम्मीदवार आजमा रहे अपनी किस्मत? एक क्लिक में जानें सबकुछ

Delhi Assembly Election 2025: क्या आप जानते हैं इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में कितने उम्मीदवारों की किस्मत दाव पर लगी है? निर्वाचन आयोग ने इसकी जानकारी साझा करते हुए ये बताया है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुकाबले में 1,040 उम्मीदवार हैं। आपको इससे जुड़ी हर अहम बात बताते हैं।

Image

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में कुल 1040 उम्मीदवार

Delhi Chunav 2025: दिल्ली में पांच फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कुल 1,040 उम्मीदवार मैदान में हैं। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के अनुसार, 1,522 उम्मीदवारों ने चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। जांच के दौरान 477 नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में कुल 1040 उम्मीदवार

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 17 जनवरी थी, जिस दिन सबसे अधिक 680 नामांकन दाखिल हुए जबकि 16 जनवरी को 500 नामांकन दाखिल हुए थे। नामांकन पत्रों की जांच शनिवार को पूरी हो गई, जबकि 20 जनवरी तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं।

दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव में कड़ी टक्कर होने की संभावना है, जिसमें सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दिल्ली में 25 साल से अधिक समय तक सत्ता से बाहर रहने के बाद वापसी के प्रयास में है। मतगणना आठ फरवरी को होगी।

विभिन्न दलों के धार्मिक कार्ड खेलने की वजह से केंद्रबिंदु में ‘नरम हिन्दुत्व'

दिल्ली का विधानसभा चुनाव ‘नरम हिन्दुत्व’ की राह पकड़ चुका है, क्योंकि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच पुजारियों और इस तरह के लोगों का सबसे बड़ा हितैषी बनने की होड़ लगी हुई है। पांच फरवरी को होने वाले चुनाव में यह देखने को मिल रहा है कि आम आदमी पार्टी ‘धर्म’ का दामन थामकर ‘चुनावी वैतरणी’ पार करना चाहती है। ‘आप’ ऐसा करके भाजपा को उसी के अंदाज में पराजित करना चाहती है। अरविंद केजरीवाल-नीत पार्टी ने हाल ही में घोषणा की है कि यदि उनकी पार्टी दिल्ली में सत्ता में लौटती है तो ‘पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना’ लागू की जाएगी, जिसके तहत मंदिर के पुजारियों तथा गुरुद्वारे के ग्रंथियों को प्रतिमाह 18 हजार रुपये का मानदेय दिया जाएगा। इसके जवाब में भाजपा मंदिरों और गुरुद्वारों सहित विभिन्न पूजा स्थलों को हर महीने 500 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा कर सकती है।

दोनों दलों ने गरीब और हाशिये पर पड़े हिंदुओं को धोखा देने और वोट बैंक को मजबूत करने के लिए एक-दूसरे पर अवैध प्रवासियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की पहली वर्षगांठ पर शहर के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में एक रैली को संबोधित करते हुए ‘‘जय श्री राम’’ का नारा लगाया था और झुग्गीवासियों से सरकार बदलकर दिल्ली के "मुक्तिदाता" बनने का आग्रह किया। भाजपा ने सत्तारूढ़ पार्टी पर वाल्मीकि मंदिर क्षेत्र में 44 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए अर्जी देने और केजरीवाल पर ‘‘दलित विरोधी होने का आरोप लगाया। नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से केजरीवाल के खिलाफ मैदान में उतरे भाजपा उम्मीदवार प्रवेश वर्मा ने 14 जनवरी को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ‘‘केजरीवाल के कहने पर’’ वाल्मीकि मंदिर क्षेत्र में मतदाताओं की जांच तो कर रहा है, लेकिन मस्जिदों और दरगाहों के बारे में कुछ नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग को आप प्रमुख के कहने पर हिंदुओं को "लक्षित और बदनाम करने" से बचना चाहिए।

खुद को ‘‘हनुमान भक्त’’ कहते हैं आप के मुखिया और पूर्व सीएम केजरीवाल

आप प्रमुख खुद को ‘‘हनुमान भक्त’’ कहते हैं और उन्होंने वाल्मीकि मंदिर और प्राचीन हनुमान मंदिर में प्रार्थना करने के बाद नई दिल्ली सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। मुख्यमंत्री आतिशी ने कालकाजी मंदिर और इलाके के एक गुरुद्वारे में पूजा-अर्चना करने के बाद नामांकन से संबंधित जुलूस की शुरुआत की। जंगपुरा से मैदान में उतरने के बाद दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जम्मू में वैष्णो देवी समेत कई प्रमुख मंदिरों के दर्शन करने गए। उन्होंने भी नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले काली का आशीर्वाद लिया।

सिसोदिया ने निर्वाचन क्षेत्र के किलोकरी इलाके में अंगूरी देवी मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद जंगपुरा में अपना अभियान शुरू किया। इन सभी मंदिरों की यात्राओं को पार्टी ने सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से प्रचारित-प्रसारित किया। आप ने "सनातन सेवा समिति" के लिए पदाधिकारियों की नियुक्ति भी की है, जो अपनी अनुदान योजना के कार्यान्वयन की देखरेख करने वाली है। भाजपा ने अपने मंदिर प्रकोष्ठ प्रमुख करनैल सिंह को शकूर बस्ती से आप नेता एवं पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ मैदान में उतारा है। सत्तर-सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के लिए मतदान पांच फरवरी को होगा। वर्ष 1998 से दिल्ली की सत्ता से बाहर भाजपा 2015 से सत्तारूढ़ आप को सत्ताच्युत करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article