OpenAI May Bankrupt: ओपनएआई (OpenAI), जो कि प्रमुख एआई स्टूडियो है और नॉन-टेक्निकल बैंकग्राउंड लोगों को रोजमर्रा के कामों में एआई का यूज करने में मदद करने को लेकर फोकस में रही है, को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
अपने एआई चैटबॉट, चैटजीपीटी (ChatGPT) के जरिए जनरेटिव एआई में एक प्रमुख यूनिट के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश में, सैम ऑल्टमैन के नेतृत्व वाली एआई डेवलपमेंट स्टूडियो चैटजीपीटी संभावित वित्तीय संकट के कगार पर है।
डेली खर्च हो रहे 5.8 करोड़ रु
एनालिटिक्स इंडिया मैगजीन की रिपोर्ट के अनुसार ओपनएआई के लिए अपनी एआई सर्विसेज में से केवल एक चैटजीबीटी को मैंटेन रखने का ऑपरेशनल खर्च लगभग 700,000 डॉलर (5.80 करोड़ रुपये) प्रति दिन है।
नतीजतन तेजी से ओपनएआई के फाइनेंशियल रिसॉर्सेज कम हो रहे हैं। जीपीटी-3.5 और जीपीटी-4 को मोनेटाइज करने के प्रयासों के बावजूद, कंपनी को अभी तक वो रेवेन्यू लेवल हासिल नहीं हुआ है जो इसकी लागत को कवर करता हो।
शुरुआत रही थी दमदार
हालाँकि ओपनएआई और चैटजीपीटी ने शुरुआत में यूजर्स के रिकॉर्ड-तोड़ इनफ्लो के साथ एक मजबूत लॉन्च का आनंद लिया था, लेकिन हाल के महीनों में इसके यूजर्स की संख्या में धीरे-धीरे गिरावट देखी गयी है। सिमिलरवेब डेटा के अनुसार, जुलाई 2023 में जून की तुलना में इसके यूजर्स बेस में 12 प्रतिशत की कमी देखी गई, जो 1.7 अरब यूजर्स से घटकर 1.5 यूजर्स रह गया।
यह डेटा विशेष रूप से चैटजीपीटी वेबसाइट पर आने वाले यूजर्स से जुड़ा है और ओपनएआई के एपीआई को नियोजित करने वाले यूजर्स इसमें शामिल नहीं है।
कितने रेवेन्यू की थी उम्मीद
ओपनएआई ने 2023 में 20 करोड़ डॉलर यानी करीब 1660 करोड़ रु का सालाना रेवेन्यू का अनुमान लगाया है। वहीं इसे 2024 में करीब 8200 करोड़ रु के रेवेन्यू की उम्मीद थी। मगर मौजूदा हालातों के मद्देनजर इसका रेवेन्यू इस लेवल पहुंचना बहुत मुश्किल है।
