Viral Video: 'बेटे तो फिर भी बेगाने हो जाते हैं, बेटियां तो ताउम्र दिल के करीब रहती हैं...' समाज में कही जाने वाली यह पुरानी कहावत सोनीपत के एक वृद्धाश्रम के बाहर धू-धू कर जलती चिता के धुएं में उड़ती नजर आई। जिस पिता ने कभी अपनी खून-पसीने की कमाई से बेटियों को पढ़ाया, काबिल बनाया और खुद पाई-पाई जोड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य का सपना देखा, उसी पिता की अंतिम यात्रा में कांधा देने वाला खून का कोई रिश्ता मौजूद नहीं था। जिसने भी यह नजारा देखा उसका दिल पसीज गया।
शिवचरण गुप्ता का जीवन संघर्ष और सफलता से भरा था। कभी मुंबई में उनका करोड़ों रुपये का कपड़ा कारोबार था। उन्होंने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर अच्छी परवरिश दी, जिनमें से दो बेटियां सरकारी शिक्षिका भी बनीं। हालांकि, जिंदगी के एक मोड़ पर व्यापार में नुकसान हुआ और पत्नी के साथ वे सोनीपत आ गए। डेढ़ साल पहले पत्नी का साथ छूटा, तो अकेलापन और बढ़ गया। बेसहारा होकर उन्होंने समाज कल्याण शिक्षा समिति के वृद्धाश्रम को अपना आशियाना बना लिया।
बेटियों ने आने से कर दिया इनकार
आश्रम प्रबंधकों के अनुसार, पिछले 20 दिनों से शिवचरण जी की तबीयत बेहद खराब थी। बेटियों (जो नेपाल, मुंबई और यूपी के आजमगढ़ में रहती हैं) को लगातार स्थिति से अवगत कराया जा रहा था। लेकिन काम की व्यस्तता और दूरी का हवाला देकर किसी ने भी पिता का हाल जानने आने की जरूरत नहीं समझी। धीरे-धीरे फोन पर भी बात होना बंद हो गई। आखिरकार, मंगलवार को बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। पिता के निधन के बाद वृद्धाश्रम के कार्यकर्ताओं ने जब बेटियों से संपर्क किया और शव को सुरक्षित रखने का प्रस्ताव दिया ताकि वे पहुंच सकें, तो जवाब और भी चौंकाने वाला था। बेटियों ने आने से साफ इनकार कर दिया और दूरी व समय की कमी की बात कही। इतना ही नहीं, एक बेटी ने अंतिम संस्कार के खर्च के नाम पर 5,100 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए और कहा कि दाह संस्कार का वीडियो बनाकर भेज दिया जाए। देखें वीडियो...
वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार
सोनीपत के श्मशान घाट पर सामाजिक संस्था के सदस्यों ने अपने हाथों से मुखाग्नि दी और पिता के फर्ज को अजनबियों ने निभाया। इस दौरान एक मोबाइल फोन के जरिए बेटियों को वीडियो कॉल पर जोड़ा गया। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि चिता से धुआं उठ रहा है और स्क्रीन पर बेटी देख रही है। तभी कॉल पर बेटी कहती है और कितनी देर लगेगी? काम खत्म हो गया? हमें नहाना भी है। यह वाक्य सुनते ही वहां मौजूद समाजसेवियों की आंखें छलक आईं और कलेजा मुंह को आ गया। इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। यूजर्स बेटियों की इस कदर बेरुखी देखकर आक्रोशित हैं। लोग कह रहे हैं कि "शिक्षा और करियर कितना भी बड़ा हो जाए, अगर संस्कारों की कमी है तो सब व्यर्थ है।"
