Vastu Tips: सनातन धर्म में प्राचीन काल से ही घर या भवनों के मुख्य द्वार के पर मांगलिक चिन्हों का प्रयोग करना शुभ माना गया है। ये प्रतीक चिन्ह आस्था और विश्वास का आधार है साथ ही इनका आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व भी है। इन चिन्हों का प्रयोग अधिकांशतः सभी सनातन धर्म अनुयायी किसी न किसी अनुष्ठान में करते ही हैं। इन चिन्हों के पीछे छुपे महत्व का आधार वास्तु शास्त्र भी है। वास्तु शास्त्र के नजरिये समझें आध्यात्मिक चिन्हों का महत्व।
ओउम ऊँ का महत्व
ऊँ शब्द नाद का प्रतीक है, क्योंकि सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मांड में नाद ही था। नाद से ही शब्दों की उत्पत्ति हुयी और इसी नाद को परम ब्रह्म भी कहा गया है। इसे ही ओंकार उच्चारित किया गया है। नाद शब्द अनश्वर है। इसका उच्चारण सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है।
वेदाें का शुभारंभ भी इसी शग्द से हुआ है। भवनों में इसका प्रयोग मंगल चिन्हों के रूप में किया जाता है। यही परमब्रह्म है। जिसने भभ इसके रहस्य को जान लिया, उसे मनवांछित फल प्राप्त होता है। यह शब्द संपूर्ण ब्रह्मांड, अपरिमित बल और प्रणव का प्रतीक है। इस शब्द को ध्यान लगाकर देखने व उच्चारण करने मात्र से ही मन एकाग्र हो जाता है और शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।
स्वास्तिक
प्राचीनकाल से स्वास्तिक को मांगलिक चिन्ह के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है। इस शुभ चिन्ह को अति मंगलकारी माना जाता है। इस शुभ चिन्ह को प्रत्येक शुभ, मांगलिक और धार्मिक अनुष्ठान के अवसर पर भवन के मुख्य द्वार के दोनों ओर बनाया जाता है। जिससे भवन अनिष्टकारी दृष्टि से बचा रहे। विघ्न बाधाएं और अमंगल दूर रहें। यह गणेश जी का चिन्ह है। इसका प्रयोग दिशापति देवों की पूजा अर्चना में भी किया जाता है।
मंगल कलश
प्राचीन समय से ही जल भरा हुआ, आम्रपत्र, पुष्प और नारियल से ढका शुभ मंगल कलश शुभता, संपन्नता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता रहा है। सृष्टि का उदभव जल से हुआ है, इसलिए ब्रह्मांड की उत्पत्ति का जल ही प्रतीक है। नारियल सुख सौभाग्य का सूचक है। शुभ अवसर या धार्मिक अनुष्ठान के समय वस्तुओं आदि के उपर नारियल रखकर देते हैं।
मीन
मीन यानी मछली, यह सच्चे प्रेम का प्रतीक मानी गयी है। यात्रा शुरू करने से पहले मीन दर्शन करना कार्य सफलता का सूचक और शुभ माना जाता है। भवन के मुख्य द्वार पर जुड़वा मछलियों के चित्र बनाने के पीछे शायद यही उद्देश्य है कि मत्स्य के साक्षात दर्शन नहीं होते हैं तो चित्र में ही उनके दर्शन हो जाएं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु का प्रथम अवतार मत्स्य को ही माना जाता है। प्रलय के समय मीन ने ही मनु एवं सृष्टि की रक्षा की थी। इसे कामदेव की ध्वजा का प्रतीक भी माना जाता है। इसे मुख्य द्वार पर मांगलिक चिन्ह के रूप में अंकित करना शुभता का सूचक है।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
