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हां, मेरे पिता ने गिराए थे बम, लेकिन..., अमित मालवीय के ट्वीट पर सचिन पायलट का पलटवार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 16, 2023, 10:57 AM IST

Sachin Pilot Amit Malviya Twitter war: अमित मालवीय ने ट्वीट कर कांग्रेस नेता राजेश पायलट पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया, 'राजेश पायलट और सुरेश कलमाड़ी भारतीय वायुसेना के उन विमानों को उड़ा रहे थे जिन्होंने 5 मार्च 1966 को मिज़ोरम की राजधानी आइज़वाल पर बम गिराये।

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सचिन पायलट

Sachin Pilot Amit Malviya Twitter war: भाजपा नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस नेता सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट को लेकर एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने दावा किया था कि राजेश पायलट ने मार्च 1966 में बतौर वायुसेना पायलट मिजोरम में बम गिराए थे। अब सचिन पायलट ने इस ट्वीट पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि अमित मालवीय के दावे पूरी तरह से काल्पनिक, तथ्यहीन और भ्रामक हैं।

सचिन पायलट ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया है कि आपके तथ्य और दिनांक दोनों ही गलत हैं। क्योंकि अक्टूबर, 1966 में मेरे पिता राजेश पायलट भारतीय वायुसेना में कमीशन हुए थे। इस ट्वीट के साथ सचिन पायलट ने अपने पिता राजेश पायलट के वायुसेना में कमीशन होने का सर्टिफिकेट भी अटैच किया है।

क्या है पूरा मामला?

बता दें, बीते सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर राज्यों में स्थिरता को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आलोचना की थी। प्रधानमंत्री ने इंदिरा गांधी द्वारा 1966 में मिजोरम में भारतीय वायुसेना के उपयोग करने के फैसले की निंदा की थी। इसके बाद भाजपा नेता अमित मालवीय ने ट्वीट कर कांग्रेस नेता राजेश पायलट पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया, 'राजेश पायलट और सुरेश कलमाड़ी भारतीय वायुसेना के उन विमानों को उड़ा रहे थे जिन्होंने 5 मार्च 1966 को मिज़ोरम की राजधानी आइज़वाल पर बम गिराये। बाद में दोनों कांग्रेस के टिकट पर सांसद और सरकार में मंत्री भी बने। स्पष्ट है कि नार्थ ईस्ट में अपने ही लोगों पर हवाई हमला करने वालों को इंदिरा गांधी ने बतौर इनाम राजनीति में जगह दी, सम्मान दिया।"

सचिन पायलट ने दिया जवाब

अमित मालवीय के ट्वीट पर सचिन पायलट ने पलटवार किया। उन्होंने ट्विटर हैंडल पर लिखा, "स्व. श्री राजेश पायलट जी दिनांक 29 अक्टूबर, 1966 को भारतीय वायु सेना में कमीशन हुए थे। यह कहना कि उन्होंने 5 मार्च 1966 में मिज़ोरम में बमबारी करी थी... काल्पनिक है, तथ्यहीन है और पूर्ण तरह भ्रामक है। हां, भारतीय वायु सेना के पायलट के रूप में मेरे दिवंगत पिता ने बम गिराए थे। लेकिन वह 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान पर था, न कि मिजोरम में। 80 के दशक में उन्होंने एक राजनेता के रूप में मिज़ोरम में युद्ध विराम करवाने और स्थाई शांति संधि स्थापित करवाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका ज़रूर निभाई थी।"

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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