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Kisan Andolan Latest News: कहां अटकी है किसानों की बात? जारी रहेगा दिल्ली कूच या मानेंगे अन्नदाता, सरकार के साथ वार्ता आज

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Feb 21, 2024, 07:26 AM IST

Kisan Andolan Latest Updates: किसान नेता सरवन सिंह पंढेर का कहना है कि हमें पूरी उम्मीद है कि सरकार हमारी मांगो को मान लेगी और हम वापस लौट जाएंगे। हालांकि, बात नहीं बनने पर किसानों का दिल्ली कूच जारी रहेगा। इस समय बड़ी संख्या में किसान हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर डटे हुए हैं।

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किसान आंदोलन

Photo : BCCL

Delhi Kisan Andolan Latest News: किसान एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी और कर्जमाफी जैसी 13 सूत्रीय मांगो को लेकर सैकड़ों किसान 13 फरवरी को दिल्ली कूच के लिए निकले थे, जिन्हें पंजाब-हरियाणा सीमा पर रोक लिया गया। इसके बाद से ये किसान यहीं पर डटे हुए हैं और दिल्ली पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि, सरकार और किसानों के बीच आज एक बार फिर से बैठक होने जा रही है। इस बैठक में किसान सरकार से अपनी मांगे मनवाने की पूरी कोशिश करेंगे।

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर का कहना है कि हमें पूरी उम्मीद है कि सरकार हमारी मांगो को मान लेगी और हम वापस लौट जाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर मांगे नहीं मानी जाती हैं तो दिल्ली कूच जारी रहेगा। बता दें, इससे पहले किसानों और सरकार के बीच तीन दौर की बैठक हो चुकी है। ये बैठकें 8, 12 और 15 फरवरी को हुई थी, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

किसान आंदोलन: कहां अटका है पेंच?

किसानों ने सरकार के सामने 13 मांगे रखी थीं, जिसमें से सरकार 10 पर सहमत हो गई है। हालांकि, किसान न्यूनत समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग पर अड़े हुए हैं। किसानों का कहना कि न्यनूतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी के लिए स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू किया जाए, जिस पर सहमति नहीं बन पा रही है। इसके अलावा किसानों की कर्ज माफी और 60 साल के अधिक उम्र के किसानों को पेंशन देने पर भी पेंच अटका हुआ है। ऐसे में केंद्र सरकार के मंत्री एक बार फिर किसानों को मनाने का प्रयास करेंगे। संभव है कि आज केंद्र सरकार एमएसपी पर कमेटी बनाने का प्रस्ताव दे सकती है।

पिछली किसान आंदोलन बैठक में क्या-क्या हुआ?

  • सरकार ने कहा न्यूनतम समर्थन मूल्य की लीगल गारंटी के आर्थिक पहलू पर विचार करना जरूरी, इससे महंगाई बढ़ेगी, सरकार पर और खर्च करने का दबाव बढ़ेगा
  • किसानों ने अगली बैठक में सरकार से एमएसपी लागू करने के फ्रेमवर्क के साथ आने को कहा है
  • स्वामीनाथन फार्मूले के हिसाब से ही एमएसपी मिले
  • सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान किसान नेताओं का कर्ज माफी के मुद्दे पर नरम रुख दिखाई दिया
  • बिजली संशोधन बिल पर सरकार ने किसान संगठनों को बताया कि किसानों को बिजली बिल में छूट मिलेगी
  • किसान संगठन सरकार को पहले आंदोलन के दौरान हुए केसों की सूची सौंपेंगे, जिन्हे सरकार देखने के बाद वापस लेने पर फैसला लेगी
  • लाल किले पर हुए हंगामे के विषय में बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई

किसान आंदोलन: सूत्रों के मुताबिक, तीन मुद्दे जो सुलझ नहीं पा रहे

  1. एमएसपी की लीगल गारंटी यानी कि इसके लिए कानून
  2. एमएसपी तय करने का फॉर्मूला (एमएस स्वामीनाथन फॉर्मूला)
  3. 60 साल से अधिक उम्र के किसानों को पेंशन और कर्जमाफी
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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