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Sarvan Singh Pandher: कौन हैं सरवन सिंह पंढेर? जिनकी एक आवाज पर दिल्ली बॉर्डर पर इकट्ठा हो गए हजारों किसान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Feb 13, 2024, 05:18 PM IST

Kisan Andolan Leader Sarvan Singh Pandher: कृषि कानूनों के खिलाफ जो आंदोलन हुआ था, उसे राकेश टिकैत ने लीड किया था। हालांकि, इस बार वो गायब हैं और माझा के किसान नेता सरवन सिंह पंढेर पूरे आंदोलन के अगुआ बने हुए हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में...

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किसान नेता सरवन सिंह पंढेर

Photo : Times Now Digital

Kisan Andolan Leader Sarvan Singh Pandher Biography(सरवन सिंह पंढेर जीवन परिचय ): कृषि कानूनों के खिलाफ 2020-21 में हुए किसान आंदोलन में राकेश टिकैट प्रमुख चेहरा थे। उन्होंने ही पूरे किसान आंदोलन को लीड किया था। वो राकेश टिकैट ही थे, जिनको टीवी पर रोता हुआ देखकर हजारों किसान रातों-रात दिल्ली के लिए कूच कर गए थे। हालांकि, इस बार हो रहे किसान आंदोलन से राकेश टिकैट गायब हैं। फिर इस ट्रैक्टर परेड को कौन लीड कर रहा है? किसके इशारे पर हजारों किसान दिल्ली के लिए निकल पड़े हैं? चलिए आपको इस नेता से मिलवाते हैं...

किसानों के इस दिल्ली मार्च को किसान आंदोलन 2.0 कहा जा रहा है, क्योंकि किसान उसी पुराने पैटर्न पर दिल्ली पहुंच रहे हैं, जैसे 2020-21 में पहुंचे थे। हालांकि, इस बार किसान आंदोलन का चेहरा अलग है। पूरे आंदोलन को किसान नेता सरवन सिंह पंढेर लीड कर रहे हैं। वही मुख्य भूमिका में भी दिखाई दे रहे है और किसान आंदोलन की पटकथा लिखने में भी वही आगे रहे हैं। बताया जा रहा है कि सरकार के साथ बातचीत में शामिल किसानों की कमेटी में भी सरवन सिंह पंढेर शामिल रहे हैं।

सरवन सिंह पंढेर: पंजाब माझा के किसान नेता

सरवन सिंह पंढेर पंजाब के अमृतसर के रहने वाले हैं और माझा के किसान संगठन किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव भी हैं। किसान संघर्ष कमेटी से अलग होकर सतनाम सिंह पन्नू ने 2007 में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी का गठन किया था। पंढेर इसी संगठन का बड़ा चेहरा बन चुके हैं। करीब 45 साल के सरवन सिंह पंढेर किसानों के हितों के लिए मुखर रहे हैं, यही वजह है कि किसानों के बीच उनकी एक अलग जगह है। बीते किसान आंदोलन के दौरान उन पर दिल्ली में हिंसा भड़काने का भी आरोप लगा था।

सरवन सिंह पंढेर पंजाब शिक्षा: 10वीं तक की है पढ़ाई

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने 10वीं तक ही पढ़ाई की है, इसके बाद वे खेती-किसानी से जुड़ गए। जानकारी के मुताबिक, अपने छात्र जीवन के दौरान भी वे आंदोलनों में शामिल रहे हैं और अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए जाने जाते हैं। वे अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के करीबी भी रह चुके हैं, इसके अलावा पंढेर के पास करीब सवा दो एकड़ जमीन भी है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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