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भारत-पाक क्रिकेट के जॉनी दुश्मन, बंटवारा-युद्ध और आतंक के साये ने बढ़ाई तल्खी

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 10, 2022, 08:03 PM IST

India-Pakistan Cricket Rivalry: 1947 में जब बंटवारे के तहत और भारत और पाकिस्तान आजाद हुए तो उस दौरान जो मौत का तांडव खेला गया। उससे दोनों देशों के लोगों के बीच दुश्मनी की ऐसी दीवार खड़ी कर दी, कि वह खेल के मैदान में भी दिखने लगी। लोगों ने जख्म भुलाने के लिए खेल में जीत का सहारा लेना शुरू कर दिया।

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भारत-पाकिस्तान में ऐसे बढ़ी तल्खी

KEY HIGHLIGHTS
  • पहली भारत-पाक क्रिकेट सीरीज 1954 में खेली गई। उस समय पाकिस्तान टीम भारत आई थी।
  • 1965 और 1971 के युद्ध ने दोनों देशों के खेल संबंधों पर ब्रेक लगा दिया था।
  • आजादी के समय क्रिकेट से ज्यादा हॉकी दोनों देशों के बीच लोकप्रिय थी।

India-Pakistan Cricket Rivalry: भारत और पाक के बीच क्रिकेट का मैच हो, तो आज के दौर में दुनिया में उससे ज्यादा खेल दुश्मनी किसी और दो देशों के बीच नहीं देखी जाती है। दुनिया के किसी भी कोने में समर्थक हो वह अपनी क्रिकेट टीम को चीयर करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। ऑस्ट्रेलिया में हो रहे T-20 क्रिकेट मैच की बात की जाय तो, दूसरे देश में होने के बावजूद, मेलबर्न क्रिकेट स्टेडियम 90 हजार दर्शकों के खचाखच भरा था। दोनों देशों में खेल की दुश्मनी इतनी तल्ख होने की वजह भारत-पाक का राजनीतिक इतिहास है। उतार-चढ़ाव भरे रिश्ते की वजह से कई बार दोनों देशों के दर्शक हार पचा नहीं पाते हैं। और टीवी सेट फोड़ने से लेकर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी तक की नौबत आ जाती है। हालांकि भारत-पाक के बीच शुरू से ही क्रिकेट ही आत्मसम्मान का जरिया नहीं बना था। बल्कि एक समय दोनों देशों के बीच हॉकी कहीं ज्यादा लोकप्रिय हुआ करती थी।

बंटवारे ने पैदा कर दी न भूलने वाली दुश्मनी

1947 में जब बंटवारे के तहत और भारत और पाकिस्तान आजाद हुए तो उस दौरान जो मौत का तांडव खेला गया। उससे दोनों देशों के लोगों के बीच दुश्मनी की ऐसी दीवार खड़ी कर दी, कि वह खेल के मैदान में भी दिखने लगी। लोगों ने नरसंहार, बलात्कार, दंगे का जख्म भुलाने के लिए खेल में जीत का सहारा लेना शुरू कर दिया। ऐसे में प्रशंसक खेल की हार को पचा ही नहीं पाते थे। और यही तल्खी क्रिकेट पर भी दिखने लगी।

आजादी के समय हॉकी का क्रिकेट से ज्यादा रसूख

जहां तक क्रिकेट की बात है, तो आजादी के समय हॉकी कहीं ज्यादा लोकप्रिय थी।बंटवारे के पहले भारत ओलंपिक चैंपियन था। और इसी का असर था दोनों देशों के बीच पहली भारत-पाक क्रिकेट सीरीज 1954 में जाकर खेली गई। उस समय पाकिस्तान टीम भारत आई थी। पहला मैच दिल्ली में खेला गया था। और उद्घाटन के मौके पर राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद मौजूद थे। उसके बाद भारतीय टीम पाकिस्तान गई। इसके लिए दोनों देशों के तरफ से हजारों की संख्या में लोगों को वीजा दिए गए। लेकिन क्रिकेट अभी भी दोनों देशों के बीच ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुआ था। इसी कारण साल 1947 से 1965 के बीच दोनों देशों के बीच केवल 3 टेस्ट सीरिज हुई। इस बीच भारत-पाक के बीच युद्ध का दौर शुरू हुआ तो 17 साल तक, दोनों देशों के बीच क्रिकेट बैन हो गया।

युद्ध से बिगड़े संबंध

इसके बाद दोनों देशों के संबंधों के बीच युद्ध का साया पड़ा। साल 1965 और 1971 में दोनों देशों के बीच युद्ध होने के कारण, आपसी संबंध बिगड़ गए और क्रिकेट सीरिज पर ब्रेक लग गया। और साल 1978 तक दोनों देशों के बीच क्रिकेट नहीं खेला गया। इस बीच दोनों देशों के राजनीतिक समीकरण बदलने का असर, क्रिकेट संबंधों पर भी दिखा । पाकिस्तान में सैन्य शासक जिया-अुल हक सत्ता पर काबिज हो चुके थे। और भारत में इंदिरा गांधी की नेतृत्व वाली सरकार की जगह मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार आई और उसके बाद फिर से क्रिकेट संबंध सामान्य हुए। इस बीच देसाई ने पाकिस्तान में भारत की रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) की जासूसी गतिविधियों को रोकने के आदेश दिए। इसने उन्हें पाकिस्तान में बेहद लोकप्रिय बना दिया और 1990 में उन्हें पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया गया। जो कि एक मात्र भारतीय राजनेता हैं, जिन्हें यह सम्मान मिला।

आतंकवाद और मोदी सरकार की सख्ती

इस बीच कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को पाकिस्तान की तरफ से बढ़ावा मिलता गया। 90 के दशक में दोनों देशों के बीच हालात इतने खराब हो गए कि क्रिकेट का मैच कश्मीर की जंग जैसा हो गया। इस बीच 1998 में जब अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार और नवाज शरीफ ने फिर से दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर करने की कोशिश की। इसी का असर था कि लाहौर और दिल्ली के बीच डायरेक्ट बस सेवा शुरू की गई। तो 1999 में पाकिस्तान टीम भारत आई। उस वक्त करीब 10 साल बाद दोनों देशों के बीच कोई द्विपक्षीय सीरिज खेली गई। लेकिन 2008 में मुंबई हमले के बाद एक बार फिर रिश्ते पटरी से उतर गए और उसके बाद मोदी सरकार ने आपसी संबंधों पर रोक लगा दी। उसकी सीधी शर्त है कि जब तक पाकिस्तान आतंकी गतिविधियां बंद नहीं करेगा, तब तक रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते हैं। इसके बाद से दोनों देश आपस में आईसीसी टूर्नामेंट में ही खेलते हैं।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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