प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैसे तो वक्त के बड़े पाबंद हैं, मगर रविवार (27 नवंबर, 2022) को गुजरात में एक रैली में वह दो मिनट लेट हो गए। आने में देरी की असल वजह उन्होंने जब बताई तो लोग भी जज्बाती हो तालियां बजाने लगे। दरअसल, पीएम इस दौरान गुजरात के दो भाइयों से मिलने पहुंच गए थे, जो कि अनाथ, अकेले और आदिवासी हैं।
पीएम के मुताबिक, आदिवासी पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले ये दोनों बच्चे जब छह से आठ साल के बीच थे, तब इनके सिर से माता-पिता का हाथ उठ गया था। ये दोनों ही एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं। मुझे जब इनके बारे में पता लगा तो मैंने अपने पार्टी नेता सीआर पाटिल से इनकी मदद करने को कहा। हमने किसी तरह इनकी शिक्षा का बंदोबस्त कराया और इन्हें रहने के लिए घर भी दिलाया।
उन्होंने बताया कि आज जब मैं इन दोनों लड़कों को इंजीनियर और कलेक्टर बनने के संकल्प के साथ खड़ा देखता हूं तो मेरा हृदय गर्व से फूल जाता है! इन लड़कों के पास न सिर छुपाने के लिए छत है और न ही माँ-बाप। जब इनके ऐसे सपने और अरमान होते हैं तो मेरा दिल गर्व से फूल जाता है और मुझे मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है!
पीएम ने आगे कहा, "मां-बाप और घर के न होने के बाद भी ये दोनों लड़के इतना बड़ा सोचते हैं...यह वाकई में बड़ी प्रेरणा देता है।" गुजरात बीजेपी अध्यक्ष सीआर पाटिल के मुचाबिक, उन्हें जब छह साल पहले इन बच्चों के बारे में पता चला था तो वह इन लड़कों के हाल को लेकर चिंतित थे। उन्होंने इसके लिए पढ़ाई और घर की व्यवस्था कराई। सुनें, जन सभा में पीएम मोदी ने दोनों बच्चों के बारे में क्या कहा?
