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Jammu-Kashmir: पुंछ में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, सेना ने बॉर्डर से पाकिस्तानी युवक को दबोचा

Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर के पुंछ से बड़ी खबर सामने आई है, जहां सुरक्षाबलों ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया है। सेना ने बॉर्डर से पाकिस्तानी युवक को दबोच लिया, जो भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहा था।

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जम्मू-कश्मीर के पूंछ में सेना की बड़ी कार्रवाई।

Pakistani Intruder caught: जम्मू कश्मीर में भारतीय सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। जहां, पुंछ में एक घुसपैठिये को पकड़ लिया गया है। नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्तानी घुसपैठिया पकड़ा गया। इस शख्स की पहचान मोहम्मद सादिक के रूप में हुई है, जो करीब 18 साल की उम्र का है। बताया जा रहा है कि उसके पास से कोई हथियार या कोई संदिग्ध सामान बरामद नहीं हुआ है।

पुंछ में बॉर्डर के पास पकड़ा गया पाकिस्तानी घुसपैठिया

जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में सेना ने नियंत्रण रेखा के पास से एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को पकड़ा है। सुरक्षा अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि सीमा के उस पार से मोहम्मद सादिक (18) कथित तौर पर भारतीय क्षेत्र में घुसने का प्रयास कर रहा था और इस दौरान सतर्क जवानों ने उसे बुधवार देर शाम सीमा पर तारबंदी के पास नूरकोट गांव में रोक लिया।

उन्होंने बताया कि व्यक्ति के पास कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली है और वह भारत में किस मकसद से प्रवेश कर रहा था यह पता लगाने के लिए उससे पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच से लगता है कि वह अनजाने में नियंत्रण रेखा पार कर गया है।

जम्मू कश्मीर के राजौरी में सैनिक ने खुद को मारी गोली

वहीं दूसरी ओर जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले में सेना के एक जवान ने कथित रूप से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मंजाकोटे क्षेत्र के अंजावली गांव में अपने ‘कैंप’ में ‘संतरी’ की ड्यूटी कर रहे हवलदार इंदेश कुमार ने मंगलवार देर शाम अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली। उन्होंने कहा कि सैनिक ने यह कदम क्यों उठाया इसका फिलहाल पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों के अनुसार पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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