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भारतीय नजरिए के आगे अमेरिका झुका, रूस से तेल खरीद पर ऐतराज नहीं

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Feb 9, 2023, 10:17 AM IST

रूस से तेल खरीद के मामले में अमेरिका की नजर भारत पर टेढ़ी रही है। उसने धमकाने की भी कोशिश की। लेकिन भारत के रुख के बाद नजरिए में बदलाव आया है। अमेरिका का कहना है कि भले ही रूस से भारत तेल खरीद रहा हो उसके साथ रिश्ते अहम है। इन सबके बीच अमेरिका ने कहा कि प्रतिबंध का कोई इरादा नहीं है।

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रूस से भारत खरीद रहा है कच्चा तेल

यूक्रेन-रूस युद्ध (Ukraine russia war)में अमेरिका पूरी तरह जेलेंस्की के साथ है। लेकिन भारत का नजरिया साफ है। भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि लड़ाई किसी के हित में नहीं। दोनों देशों को एक दूसरे से बातचीत कर युद्ध को खत्म करने पर आगे बढ़ना चाहिए। इन सबके बीच भारत ने रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर साफ कर दिया कि वो किसी पश्चिमी देश के दबाव में नहीं आने वाला है। भारत के इस रुख के बाद अमेरिका(India America Relationship) मे दबी जुबान यह कहना शुरू किया कि भारत को तेल खरीद(crude oil purchase from russia) पर विचार करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो हम कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं। यह बात अलग है कि विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने साफ कर दिया कि पश्चिमी देशों को पहले अपने बारे में सोचना चाहिए। इन सबके बीच अमेरिका ने बड़ा बयान दिया है कि अगर रूस से नई दिल्ली तेल की खरीद करता है तो किसी तरह की आपत्ति नहीं और ना ही हम प्रतिबंध के बारे में सोच रहे।

भारत के खिलाफ प्रतिबंध नहीं

यूरोपियन- यूरेशियन के असिस्टेंट सेक्रेटरी कारेन डॉनफ्रायड ने कहा कि हम भारत के खिलाफ प्रतिबंधों के बारे में नहीं सोच रहे। भारत और अमेरिका के संबंध अहम है। इसके साथ ही एनर्जी रिसोर्स के असिस्टेंट सेक्रेटरी ज्याफ्री पायट ने कहा कि दोनों देशों के बीच एनर्जी सेक्यूरिटी का मुद्दा यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच दोनों देशों के लिए अहम है। रूस ने पिछले कुछ सालों से ग्लोबल एनर्जी मार्केट को अस्थिर कर रखा है। जिस तरह से रूस अपने ऑयल और गैस रिजर्व को हथियारों के साए रखा हुआ है उससे साफ है कि रूस भरोसेमंद पार्टनर नहीं हो सकता। इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऑयल और गैस की कीमतों में इजाफा हुआ है।

रूस नहीं हो सकता भरोसेमंद साझीदार

पायट ने कहा कि यद्यपि भारत प्राइस कैप का हिस्सा नहीं है। हालांकि भारत प्राइस कैप में भागीदार नहीं है, लेकिन उसने प्रभावी रूप से अपने नेगोशिएशन लीवरेज का उपयोग किया है, जो कि प्राइस कैप और इस तथ्य से प्राप्त होता है कि रूसी कच्चे तेल की कीमत को कम करने के लिए वैश्विक बाजार के बड़े हिस्से अब रूस के लिए सुलभ नहीं हैं। 2024 में एक नए रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए यूएस क्रूड का उत्पादन बढ़ना जारी है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने बैंगलोर में कहा था कि हमने अमेरिका के साथ संसाधनों को साझा किया है और कार्बन फुटप्रिंट में भूमिका को कम किया है। भारत अमेरिका के लिए शीर्ष दस बाजारों में से एक है।ब्लूमबर्ग के मुताबिक दिसंबर 2022 में भारत ने एक दिन में औसतन 1.2 मिलियन बैरल की खरीदारी की जो कि नवंबर में भारत द्वारा खरीदे गए से 29 फीसद से अधिक है।

ललित राय
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