ग्रेटर नोएडा

Greater Noida Mahashivratri: ग्रेटर नोएडा के इस शिव मंदिर से जुड़ी है रावण के जन्म की कहानी, ऐसे पहुंचकर करें दर्शन

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Feb 16, 2023, 02:36 PM IST

Shiva Temples of Greater Noida: ग्रेटर नोएडा के बिसरख में स्थित शिव मंदिर का संबंध रावण से बताया जाता है। यहां पर महाशिवरात्री के पावन अवसर पर भक्तों का तांता लगा रहता है। यहां पर भगवान शिव का अनोखा शिवलिंग हैं। यहां का शिवलिंग अष्टभुजी स्वरूप में है। बताया जाता है कि, रावण भी यहां भोलनाथ का पूजन किया करता था।

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ग्रेटर नोएडा के बिसरख स्थित शिव मंदिर में रावण किया करता था भगवान भोलनाथ का पूजन

KEY HIGHLIGHTS
  • ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में है प्रसिद्ध शिव मंदिर
  • अष्टभुजी स्वरूप में विराजमान है शिवलिंग
  • शिवपुराण में मिलता है बिसरख गांव का उल्लेख


Greater Noida News: अगर आप ग्रेटर नोएडा में रहते हैं और इस महाशिवरात्री किसी शिव मंदिर में परिवार के साथ दर्शन करने का प्लान बना रहे हैं तो हम आपको एक अनोखे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। यह शिव मंदिर ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में स्थित है। ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव का उल्लेख शिवपुराण में मिलता है। ऐसा माना जाता है कि, ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में ही रावण का जन्म हुआ था। रावण के पिता विश्रवा ऋषि ने बिसरख गांव में एक अष्टभुजी शिवलिंग की स्थापना की है। यह शिवलिंग आज भी अपने पूरे वैभव के साथ विराजमान है।

बता दें कि, सबसे बड़ी बात ये कि, गांव में भगवान राम और रावण की साथ में पूजा करने की परंपरा है। उससे भी हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि, इस गांव में रामलीला का आयोजन नहीं किया जाता है। इस गांव में रावण का पुतला दहन भी नहीं होता है।

रहस्य है शिवलिंग की गहराई

बिसरख गांव में एक भव्य शिव मंदिर मौजूद है। यहां पर महाशिवरात्री पर दर्शन पूजन करने आसपास के इलाकों के साथ-साथ दूर-दूर से लोग आते रहते हैं। बताया जाता है कि, शिव मंदिर में जो अष्टभुजी शिवलिंग हैं, उसकी स्थापना रावण के पिता विश्रवा ऋषि के हाथों हुई थी। उस शिवलिंग की गहराई आज तक रहस्य बनी हुई है। बहुत पहले यहां खुदाई भी करवाई गई थी, लेकिन कोई छोर नहीं मिलने के कारण खुदाई बंद करा दी गई थी।

यहीं मिला था रावण को वरदान

बिसरख धाम ट्रस्ट के मुताबिक, रावण भी इसी गांव के अष्टभुजी शिवलिंग की पूजा अर्चना किया करता था। रावण की पूजा से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने रावण को इसी जगह बुद्धिमान और पराक्रमी होने का वरदान दिया था। बिसरख धाम ट्रस्ट के अनुसार, गांव में आज भी खुदाई करने पर कभी-कभी शिवलिंग निकल जाते हैं। यही वजह है कि सालों साल गांव में पूजा- अर्चना करने आने वालों का तांता लगा रहता है। मंदिर की भव्यता और दिव्यता लाजवाब है।
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