Ratha Saptami Sloka: सनातन धर्म में रथ सप्तमी के त्योहार का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है इस दिन ये वही दिन है जब सूर्य भगवान ने पूरे दुनिया का ज्ञान वर्धन करना शुरू किया था। इसलिए इस दिन को सूर्य देव के जन्म दिवस के रूप में भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन से गर्मी की शुरुआत हो जाती है। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व माना गया है। जानिए रथ सप्तमी के दिन किस श्लोक का जाप करना चाहिए।
Ratha Saptami Sloka
अर्कपत्र स्नान श्लोकाः
सप्तसप्तिप्रिये देवि सप्तलोकैकदीपिके ।
सप्तजन्मार्जितं पापं हर सप्तमि सत्वरम् ॥ 1 ॥
यन्मयात्र कृतं पापं पूर्वं सप्तसु जन्मसु ।
तत्सर्वं शोकमोहौ च माकरी हन्तु सप्तमी ॥ 2 ॥
नमामि सप्तमीं देवीं सर्वपापप्रणाशिनीम् ।
सप्तार्कपत्रस्नानेन मम पापं व्यापोहतु ॥ 2 ॥
अर्घ्य श्लोकम् ।
सप्त सप्ति वहप्रीत सप्तलोक प्रदीपन ।
सप्तमी सहितो देव गृहाणार्घ्यं दिवाकर ॥ 1 ॥
रथ सप्तमी अन्य पाठः
यदा जन्मकृतं पापं मया जन्मसु जन्मसु ।
तन्मे रोगं च शोकं च माकरी हन्तु सप्तमी ॥ 1
एतज्जन्म कृतं पापं यच्च जन्मान्तरार्जितम् ।
मनो वाक्कायजं यच्च ज्ञाताज्ञाते च ये पुनः ॥ 2
इति सप्तविधं पापं स्नानान्मे सप्त सप्तिके ।
सप्तव्याधि समायुक्तं हर माकरि सप्तमी ॥ 3
सप्त सप्त महासप्त सप्त द्वीपा वसुन्धरा ।
श्वेतार्क पर्णमादाय सप्तमी रथ सप्तमी ॥ 4
इति श्री रथ सप्तमि श्लोकाः ||
रथ सप्तमी श्लोक का महत्व
रथ सप्तमी श्लोक एक शक्तिशाली मंत्र है। जिसका जप रथ सप्तमी के दिन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अगर आप सूर्य देव की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो भक्तिपूर्वक इसका जाप करें।
