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रची जा रही साजिश: 15 अगस्त पर पीएम के संबोधन के दौरान हो सकती है नारेबाजी, अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 13, 2023, 09:13 AM IST

Independence Day Security Review: स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले पर कुकी व मैतेई समुदाय के लोग विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री जब लाल किले से देश को संबोधित कर रहे होंगे, उस दौरान भी सरकार विरोधी तत्वों द्वारा नारेबाजी की जा सकती है। खुफिया एजेंसियों को इस बारे में इनपुट मिले हैं।

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स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मणिपुर हिंसा पर हो सकता है प्रदर्शन

Photo : BCCL

Independence Day Security Review: स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान भी मणिपुर हिंसा का मामला छाया रह सकता है। सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले पर कुकी व मैतेई समुदाय के लोग विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री जब लाल किले से देश को संबोधित कर रहे होंगे, उस दौरान भी सरकार विरोधी तत्वों द्वारा नारेबाजी की जा सकती है।

इस इनपुट के सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं और निगरानी बढ़ा दी गई है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली की सुरक्षा तैयारियों को लेकर खुफिया एजेंसियों एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस मुद्दे पर भी चर्चा की गई। इस बैठक में विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी), सीआईएसएफ, दिल्ली पुलिस के साथ आरपीएफ के अधिकारी भी शामिल थे।

देश की छवि धूमिल करने की कोशिश

एक अधिकारी ने बताया, बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि इस साल स्वतंत्रता दिवस के बाद दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाना है। ऐसे में किसी भी प्रतिकूल घटना का देश की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। खुफिया एजेंसियों ने बताया कि देश विरोधी तत्वों द्वारा ऐसे अहम मौकों पर विरोध प्रदर्शन का सहारा लेकर देश की छवि खराब की जाती है।

सोशल मीडिया के जरिए खराब किया जा सकता है माहौल

एक अधिकारी ने बताया, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने सोशल मीडिया के बारे में भी चेतावनी दी है। कहा गया है कि कट्टरपंथी इसका इस्तेमाल लोगों को संगठित करने, प्रतिष्ठित लोगों को धमकियां देने और देश विरोधी गतिविधियों के लिए कर सकते हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों द्वारा चर्चा किए गए अन्य प्रमुख मुद्दों में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक पाकिस्तान स्थित ऑपरेटिव का मामला भी शामिल था, जिसने अपने सहयोगियों को दिल्ली में कुछ स्थानों की रेकी का निर्देश दिया था, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी और दिल्ली का मुख्यालय भी शामिल था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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