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गुजरात में भाजपा की आदिवासियों पर नजर, 2017 में ऐसे बिगड़ गया था खेल

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  • Updated Nov 4, 2022, 06:58 PM IST

Gujarat Assembly Election 2022: भाजपा राज्य में वोटरों की बीच पैठ बनाने के लिए पिछले महीने अक्टूबर में मेहसाणा से गौरव यात्रा शुरू कर चुकी है। इसके तहत 5 रूट से यात्रा निकाली गई है। इसमें सबसे ज्यादा फोकस आदिवासी वोटरो पर हैं। आदिवसी वोटर आम तौर पर कांग्रेस के समर्थक रहे हैं।

KEY HIGHLIGHTS
  • राज्य में करीब 89 लाख आदिवासी आबादी है। जो कि कुल आबादी का करीब 15 फीसदी है।
  • 2017 के चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 27 सीटों में से भाजपा केवल 9 सीटों पर जीत हासिल कर पाई थी।
  • भाजपा ने इस बार 182 में से 150 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।

Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात चुनाव का आगाज हो चुका है। राज्य में दो चरणों में एक और 5 दिसंबर को वोटिंग होगी, । इन चुनावों के नतीते तो 8 दिसंबर को आएंगे लेकिन इस बीच एक महीने में राजनीति के कई रंग देखने को मिलेंगे। 2022 का चुनाव भाजपा, कांग्रेस और आम आमदी पार्टी तीनों के लिए बेहद अहम है। और इसके लिए पार्टियां हर वोटर को लुभाने की कोशिश में हैं। इसी कड़ी में 27 साल से सत्ता में बैठी भाजपा ने इस बार 150 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। जो लक्ष्य वो आज तक हासिल नहीं कर पाई है। लेकिन भाजपा के इस लक्ष्य में सबसे कमजोर कड़ी आदिवासी वोटर हैं। जहां पर 2017 में उसका जादू नहीं चला था। ऐसे में इस बार भाजपा गौरव यात्रा के जरिए उन 27 सीटों पर खास फोकस कर रही हैं, जहां से उसे पिछली बार केवल 9 सीटें हासिल हुईं थीं। राज्य में करीब 89 लाख आदिवासी आबादी है। जो कि कुल आबादी का करीब 15 फीसदी है।

आदिवासी वोट बैंक पर नजर

भाजपा राज्य में वोटरों की बीच पैठ बनाने के लिए पिछले महीने अक्टूबर में मेहसाणा से गौरव यात्रा शुरू कर चुकी है। इसके तहत 5 रूट से यात्रा निकाली गई है। करीब 500 किलोमीटर सबसे लंबी गौरव यात्रा उनई से अंबाजी तक निकाली गई है। इस रूट पर ही सबसे ज्यादा आदिवासी आबादी के प्रभाव वाली विधानसभाएं पड़ती हैं। इसके अलावा उनई से फगवेल रूट भी आदिवासी बेल्ट के लिए जाना जाता है। भाजपा की कोशिश है कि परंपरागत रूप से कांग्रेस के वोटर रहे, आदिवासी समाज को अपने पाले में लाया जाय। 2017 के चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 27 सीटों में से भाजपा केवल 9 सीटों पर जीत हासिल कर पाई थी। जबकि कांग्रेस को 16 सीटों पर और 2 सीटों पर भारतीय ट्राइबल को जीत मिली थी।

भाजपा के लिए क्यों चुनौती

गुजरात में 2017 के विधानसभा चुनाव में भले ही भाजपा को जीत मिली थी। लेकिन जहां तक सीटों की बात है, तो 1990 के बाद ऐसा पहली बार हुआ था, जब 182 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी को 100 से कम सीटें मिली थी। 2017 में भाजपा को 99 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। जबकि 1990 के बाद उसे कभी भी 115 से कम सीटें नहीं मिली थीं। इन चुनावों में कांग्रेस को 77 सीटें मिली थीं। जो कि कांग्रेस का साल 1985 के चुनावों के बाद सबसे अच्छा प्रदर्शन था।

इसे देखते हुए उसके लिए आदिवासी वोटों में सेंध लगाने की चुनौती है, क्योंकि अगर वह इन 27 सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करती है, तो उसके लिए फिर से सत्ता में वापसी करना आसान हो जाएगा।

चौथी गौरव यात्रा

भाजपा ने पहली बार साल 2002 में गौरव यात्रा निकाली थी। यह यात्रा 2002 में गोधरा कांड और उसके बाद हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद निकाली गई थी, इसके बाद से वह लगातार गौरव यात्रा निकाल रही है।पिछले चुनाव के वक्त पाटीदार आंदोलन और जीएसटी को लेकर भाजपा के खिलाफ एक तरह का माहौल बन गया था। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में भाजपा बहुमत हासिल करने में कामयाब हो गई थी। इस बार फिर बीजेपी ने यात्रा निकालने का निर्णय लिया है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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