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PM Modi in Lok Sabha: 'कांग्रेस के माथे से नहीं धुलेगा इमरजेंसी का पाप...' संसद में बोले पीएम मोदी

PM Modi on Constitution Debate: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद को संबोधित करते हुए कहा, संविधान बदलने का कांग्रेस के मुंह में ऐसा खून लगा गया कि वह समय-समय पर संविधान का शिकार करती रही। जो बीज देश के पहले प्रधानमंत्री ने बोया था, उस बीज को खाद-पानी देने का काम इंदिरा गांधी ने किया।

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लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी।

Photo : Twitter

PM Modi on Constitution Debate: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान कहा, हम सब के लिए, सभी देशवासियों के लिए, इतना ही नहीं विश्व के लोकतंत्र प्रेमी नागरिकों के लिए भी ये गौरव का पल है कि बड़े गर्व के साथ लोकतंत्र के उत्सव को मनाने का अवसर है। यह संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने पर उत्सव मनाने का पल है। खुशी की बात है कि संसद भी उत्सव में शामिल होकर अपनी भावनाओं को प्रकट कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमारे संविधान निर्माण की प्रक्रिया में, हमारी नारी शक्ति ने संविधान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मौलिक चिंतन के आधार पर उन्होंने संविधान सभा के चिंतन को समृद्ध किया था। संविधान में उन्होंने जो सुझाव दिए, उनका संविधान निर्माण में बड़ा प्रभाव रहा था। हमारे लिए गर्व की बात है कि दुनिया के कई देशों को महिलाओं को अधिकार देने में दशकों बीत गए, लेकिन हमारे यहां शुरुआत से ही महिलाओं को वोट का अधिकार दिया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमारी महिला शक्ति को भारतीय लोकतंत्र में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हमलोगों ने कदम उठाए हैं। हम देख रहे हैं कि हर योजना के केंद्र में महिलाएं होती हैं। यह संयोग है कि भारत के राष्ट्रपति के पद पर एक आदिवासी महिला विराजमान है। इस सदन में हमारे महिला सदस्यों की संख्या बढ़ रही है, उनका योगदान बढ़ रहा है। हर क्षेत्र में महिलाओं का योगदान, महिलाओं का प्रतिनिधित्व देश के लिए गौरव दिलाने वाला है। स्पेस सेक्टर में उनके योगदान की सराहना हर हिंदुस्तान कर रहा है। इन सबकी प्रेरणा हमारा संविधान है।

गुलाम मानसिकता वाले लोगों ने विविधिता में विरोधाभास ढूंढा

पीएम मोदी ने कहा, हमारा संविधान भारत की एकता का आधार है। हमारे संविधान के निर्माण में, देश के बड़े-बड़े दिग्गज थे और सभी भारत की एकता के प्रति सजग थे। बाबा साहेब आंबेडकर ने चेताया था कि समस्या यह है कि देश में जो विविधता से भरा जनमानस है, उसे किस तरह एकमत किया जाए, कैसे देश को लोगों को एकसाथ होकर निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया जाए, जिससे देश को लोगों में एकता की भावना हो। मैं दुख के साथ कह रहा हूं कि आजादी के बाद विकृत मानसिकता के कारण, या स्वार्थवश सबसे बड़ा प्रहार देश की एकता के मूलभाव पर हुआ। हम विविधता को सेलीब्रेट करते हैं। इस देश की प्रगति भी इसी में है, लेकिन गुलामी की मानसिकता में पले बढ़े लोगों ने विविधता में विरोधाभास ढूंढते रहे। ये लोग विविधता में जहरीले बीज बोने के प्रयास करते रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, एकता के भाव को मजबूत करने के लिए हमने वन नेशन-वन राशन कार्ड की वकालत की। देश के सामान्य नागरिक को, अगर मुफ्त में इलाज मिले तो गरीबी से लड़ने की ताकत बढ़ जाती है। इसलिए हम लोगों ने तय किया कि वन नेशन- वन हेल्थ कार्ड, इसलिए हमने आयुष्मान योजना लागू की।

कांग्रेस के माथे से नहीं धुलेगा इमरजेंसी का पाप

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान इमरजेंसी लागू करने के लिए भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, जब देश संविधान के 25 वर्ष पूरे कर रहा था। हमारे देश के संविधान को नोच लिया गया, इमरजेंसी लगाया गया। संवैधानिक व्यवस्थाओं को समाप्त कर दिया गया, लोगों को जेल में डाल दिया गया। प्रेस की स्वतंत्रता को ताले लगा दिए गए। उन्होंने कहा, कांग्रेस के माथे पर यह पाप धुलने वाला नहीं है। क्योंकि, लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया था, संविधान निर्माताओं की तपस्या को मिट्टी में मिलाने का प्रयास किया गया था।

कांग्रेस समय-समय पर करती रही संविधान का शिकार पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस के एक परिवार ने संविधान को चोट पहुंचाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। इस परिवार ने 55 साल तक राज किया है, इसलिए देश को क्या-क्या हुआ, यह जानने का अधिकार है। इस परिवार के कुविचार, कुनीति की परंपरा निरंतर चल रही है। हर स्तर पर इस परिवार ने संविधान को चुनौती दी है। 1947 से 1952 तक इस देश में चुनी हुई सरकार नहीं थी, एक अस्थाई व्यवस्था थी। 1952 के पहले राज्यसभा का भी गठन नहीं हुआ था, राज्यों में चुनाव नहीं हुए थे, उसके बावजूद भी 1951 में अध्यादेश लाकर संविधान को बदला और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला किया। ये संविधान निर्माताओं का अपमान था। अपने मन की चीजें जो सविंधान सभा के अंदर नहीं कर पाए, उन्होंने पिछले दरवाजे से कीं। पीएम मोदी ने कहा, उस समय के प्रधानमंत्री पंडित नेहरू जी ने मुख्यमंत्रियों को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें कहा था कि "अगर संविधान हमारे रास्ते के बीच में आ जाए, तो हर हाल में संविधान में परिवर्तन करना चाहिए।" प्रधानमंत्री ने कहा, संविधान बदलने का कांग्रेस के मुंह में ऐसा खून लगा गया कि वह समय-समय पर संविधान का शिकार करती रही। जो बीज देश के पहले प्रधानमंत्री ने बोया था, उस बीज को खाद-पानी देने का काम इंदिरा गांधी ने किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संविधान में परिवर्तन करके बदल दिया गया, उन्होंने हमारे देश की अदालत के पंख काट दिए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, संविधान में परिवर्तन करने का जो बीज नेहरू जी ने शुरू किया, इंदिरा जी ने उस बीच को खाद-पानी दिया और राजीव गांधी जी ने भी उसे ताकत दी, क्योंकि संविधान के साथ खिलवाड़ करने का लहू उनके मुंह लग गया था। अगली पीढ़ी भी इसी में लगी पड़ी है।

35A पर भी कांग्रेस को घेरा

पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस ने निरंतर संविधान की अवमानना की। संविधान का पहला पुत्र संसद है, उसका भी गला कांग्रेस ने घोंट दिया था। आर्टिकल 370 की चर्चा बहुत होती है, लेकिन 35A की चर्चा नहीं होती। प्रधानमंत्री ने कहा, 35A संसद में लाए बिना देश पर थोप दिया, यह न होता तो जम्मू-कश्मीर में ऐसे हालत नहीं होते। ये संसद का अधिकार था, कोई अपनी मनमानी से नहीं कर सकता था। उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि उनके पेट में पाप था। ये बात वे देश से छिपाना चाहते थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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