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'कड़ा जवाब मिलेगा...' जम्मू-कश्मीर में टारगेट किलिंग पर भड़के अमित शाह, TRF ने ली आतंकी हमले की जिम्मेदारी

Target Killing in Jammu Kashmir: जम्मू कश्मीर के गांदरबल में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। इस टारगेट किलिंग में आतंकियों ने एक डॉक्टर समेत 7 लोगों की हत्या कर दी।

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अमित शाह ने आतंकी हमले की निंदा की।

Target Killing in Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में हुए आतंकी हमले पर गृहमंत्री अमित शाह ने दुख जताया है। अमित शाह ने कहा है कि इस जघन्य कृत्य में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें सुरक्षा बलों की कठोरतम कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। बता दें, गांदरबल में रविवार को एक बार फिर टारगेट किलिंग का मामला सामने आया। जब आतंकियों ने टनल मजदूरों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इसमें एक डॉक्टर के अलावा 6 श्रमिकों की मौत हो गई।

घटना के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, जम्मू कश्मीर के गगनगीर में नागरिकों पर किया गया नृशंस आतंकवादी हमला कायरना हरकत है। इस जघन्य कृत्य में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें हमारे सुरक्षा बलों की कठोरतम कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। गृहमंत्री ने इस हमले में लोगों की मौत होने पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।

दो आतंकवादियों ने घटना को दिया अंजाम

अधिकारियों ने बताया कि गांदरबल जिले के गुंड इलाके में एक सुरंग परियोजना पर कार्यरत मजदूर एवं अन्य कर्मी देर शाम जब अपने शिविर में लौटे तब अज्ञात आतंकवादियों ने उनपर हमला कर दिया। उन्होंने बताया कि आतंकवादियों ने मजदूरों के समूह पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें स्थानीय और बाहरी लोग दोनों शामिल थे। माना जाता है कि आंतकवादियों की संख्या कम से कम दो थी। अधिकारियों ने बताया कि दो श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि चार अन्य घायल श्रमिकों एवं एक डॉक्टर ने बाद में दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि पांच घायलों का इलाज जारी है।

कविंदर गुप्ता का भी आया बयान

वहीं, जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता ने गगनगीर आतंकी हमले पर कहा कि कश्मीर में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हो चुकी है, शायद यह उन्हें पसंद नहीं आ रहा, इसीलिए वह (आतंकवादी) अपनी मौजूदगी दिखाने की कोशिश करते हैं। आतंकवाद को सुरक्षाबलों ने पहले भी रोका है लेकिन जब ऐसी घटना होती है तो ये चिंता का विषय बन जाता है। पिछले दो दिनों में लगातार हो रही ये घटनाएं दुखद हैं। मैं यही कहूंगा कि सभी को सतर्क रहने की जरूरत है... संदिग्धों पर नजर रखने की जरूरत है। कश्मीर में पर्यटन का अच्छा दौर था, आज जो घटना हुई उससे साफ है कि पाकिस्तान को स्वाभाविक तौर पर ये पसंद नहीं है और वो ऐसी कोशिशें करता है।

TRF ने ली हमले की जिम्मेदारी

श्रमिकों को निशाना बनाकर किए गए इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। वहीं, जिस इलाके में आतंकी हमला हुआ, उसे सुरक्षा बलों ने घेर लिया है। अपराधियों का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान जारी है। कश्मीर पुलिस के महानिरीक्षक वी.के. बर्डी स्थिति की निगरानी के लिए घटनास्थल पर पहुंचे हैं। ऑपरेशन जारी रहने के कारण अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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