Mahashivratri 2023: शिवरात्रि हर महीने अमावस्या से एक दिन पहले मनाई जाती है। एक वर्ष में 12 से 13 शिवरात्रि होती है। इनमें से फाल्गुन मास में आने वाली शिवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसे महाशिवरात्रि के रूप में पूरे भारत में मनाया जाता है। शिवभक्त इस दिन उपवास रखते हैं , मंदिरो को सजाया जाता है और रात्रि में महादेव और पार्वती जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इस बार शिवरात्रि 18 फरवरी शनिवार को पड़ रही है।
महाशिवरात्रि की रात को जागने के फायदे
- महाशिवरात्रि की रात बहुत खास होती है। शिव भक्त इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। यह रात भगवान शिव की आराधना करने के लिए बहुत अच्छी होती है। महाशिवरात्रि की रात साधना और ध्यान करना चाहिए।
- महाशिवरात्रि की रात को सोना नहीं चाहिए बल्कि रात को शिव और पार्वती का ध्यान करना चाहिए। इससे शक्ति का संचार होता है।
- महाशिवरात्रि की रात्रि ऊर्जा और ज्ञान से भरपुर होती है। महाशिवरात्रि की रात मानव तंत्र के भीतर ऊर्जाओं का एक स्वाभाविक उभार होता है।
- इस रात रीड की हड्डी को सीधा करके सीधी मुद्रा में बैठना चाहिए और रात भर जागकर ध्यान लगाना चाहिए इससे ना केवल धार्मिक पथ पर चलने वालों को बल्कि अन्य लोगों को भी लाभ होता है।
- अगर आप योगी हैं तो शिवरात्रि की रात को आपको जागकर शिव भगवान की स्तुति करनी चाहिए। रीड की हड्डी को सीधी कर सीधी मुद्रा में बैठे और ध्यान लगाने से आपके भीतर एक नई शक्ति का संचार होता है।
- महाशिवरात्रि आपके और आपके परिवेश के भीतर एक गहरी आयामी धारणा के लिए आपके मन की तीसरी आंख खुलने की दिशा में आपकी यात्रा को सुगम बनाती है।
- मान्यता है कि शिवरात्रि पर रात में जागकर भगवान शिव की आराधना करने से हर इच्छा पूरी होती है।
महाशिवरात्रि का महत्व (Maha Shivratri Significance)
महाशिवरात्रि भगवान शिव और देवी पार्वती के पवित्र मिलन का प्रतीक है। इस दिन भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लोग कई तरह के उपाय करते हैं। शिवरात्रि पर्व में रात्रि के चार पहर में पूजा होती है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात रहस्यमय और महान होती है। इसलिए महाशिवरात्रि की रात में सोना नहीं चाहिए। शिवरात्रि को रात में जागने से शक्ति का संचार होता है ।
