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शुरू हुआ Chandrayaan-3 और ISRO कमांड सेंटर के बीच कम्यूनिकेशन, 'चंदा मामा' की गोद में बैठ भेजी पहली तस्वीर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 23, 2023, 11:33 PM IST

Chandrayaan-3: इसरो ने बताया है कि चंद्रयान-3 के लैंडर और और MOX-ISTRAC(ISRO Telemetry, Tracking and Command Network) के बीच संचार लिंक स्थापित हो गया है और कम्यूनिकेशन शुरू हो गया है। चंद्रयान-3 के लैंडर उतरने के बाद इसरो कमांड सेंटर को चंद्रमा की पहली तस्वीरें भी भेजी हैं।

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चंद्रयान-3 के लैंडर से भेजी गई पहली तस्वीर

Photo : Twitter

Chandrayaan-3: इसरो का चंद्रयान-3 चंद्रमा पर सफलता पूर्वक लैंड कर चुका है। इसी के साथ भारत ने इतिहास रच दिया है। पूरी दुनिया इस उपलब्धि के लिए भारत को बधाई दे रही है। इस बीच इसरो ने चंद्रयान-3 को लेकर नया अपडेट दिया है। इसरो की ओर से दी गई ताजा जानकारी के मुताबिक, चंद्रयान-3 के लैंडर ने चांद की जमीन पर उतरकर अपना काम शुरू कर दिया है।

इसरो ने बताया है कि चंद्रयान-3 के लैंडर और और MOX-ISTRAC(ISRO Telemetry, Tracking and Command Network) के बीच संचार लिंक स्थापित हो गया है और कम्यूनिकेशन शुरू हो गया है। चंद्रयान-3 के लैंडर उतरने के बाद इसरो कमांड सेंटर को चंद्रमा की पहली तस्वीरें भी भेजी हैं। ये तस्वीरें चंद्रयान-3 के लैंडर हॉरिजॉन्टल वेलोसिटी कैमरे द्वारा ली गई थीं। लैंडर ने उतरते समय इन तस्वीरों को क्लिक किया था।

पूरे देश ने देखा ऐतिहासिक क्षण

इसरो को इतिहास रचते हुए पूरे देश ने देखा। इसरो की ओर से चंद्रयान-3 की लैंडिंग का लाइव प्रसारण दिखाया गया था। जैसे-जैसे चंद्रयान-3 चंदा मामा के करीब आ रहा था, पूरे देश की धड़कनें भी तेज होती जा रही थीं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए दक्षिण अफ्रीका दौरे पर गए प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस ऐतिहासिक क्षण को लाइव देखा। सफल लैंडिंग के बाद उन्होंने इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी। इस दौरान उन्होंने इसरो चीफ से फोन पर बात भी की।

पीएम बोले- 'चंदा मामा टूर के'

चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कभी ऐसा कहा जाता था कि "चंदा मामा बहुत दूर के", मगर एक दिन ऐसा भी आएगा जब बच्चे कहा करेंगे कि "चंदा मामा बस एक टूर के हैं"। उन्होंने कहा, हमारे साइंटिस्ट्स की मेहनत और प्रतिभा से देश चांद के उस दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा है, जहां आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच सका है। अब आज के बाद से चांद से जुड़े मिथक बदल जाएंगे। कथानक भी बदल जाएंगे। और नई पीढ़ी के लिए कहावतें भी बदल जाएंगी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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