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संभल से सपा सांसद बर्क के घर पर चलेगा 'बाबा का बुलडोजर'! प्रशासन ने जारी किया नोटिस, हिंसा भड़काने का था आरोप

Ziaur Rahman Barq News: सपा सांसद जियाउर्रहमान का यह आवास संभल के नखासा थाना इलाके के दीपा सराय में स्थित है। नोटिस में कहा गया है कि क्यों न आपके द्वारा कराए गए अवैध निर्माण को नष्ट कर दिया जाए? बर्क से इस संबंध में जवाब मांगा गया है।

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सपा सांसद जिया उर रहमान

Photo : ANI

Ziaur Rahman Barq News: उत्तर प्रदेश के संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क को प्रशासन ने नोटिस भेजा है। उन पर बिना नक्शा पास कराए घर बनाने का आरोप है। सपा सांसद का यह आवास संभल के नखासा थाना इलाके के दीपा सराय में स्थित है। नोटिस में कहा गया है कि क्यों न आपके द्वारा कराए गए अवैध निर्माण को नष्ट कर दिया जाए? बर्क से इस संबंध में जवाब मांगा गया है।

बता दें, संभल में हाल ही में भड़की हिंसा के बाद सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क विवादों में आ आए थे। उन पर भीड़ को उकसाने वाला भाषण देने का आरोप है। इस संबंध में पुलिस ने बर्क के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है। इस मामले के बाद सपा सांसद को यह नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने उनपर अवैध निर्माण कराने का आरोप लगाया है।

क्या है नोटिस में?

सपा सांसद को भेजे गए नोटिस में उन पर उत्तर प्रदेश में रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशन एक्ट 1958 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। इसके तहत निर्माण कार्य नहीं रोकने पर 10 हजार का जुर्माना व सजा का प्रावधान है। नोटिस में कहा गया है कि तहसील संभल से अनुज्ञा प्राप्त किए बिना आपके द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जो बिना मानचित्र स्वीकृत कराए किया जा रहा है, जबकि आपको नियमानुसार मानचित्र स्वीकृत कराना आवश्यक था। इसमें कहा गया है कि उपजिलाधिकारी संभल के कार्यालय में उपस्थित होकर स्पष्ट करें कि उपरोक्त निर्माण विनिष्ट करने का आदेश क्यों न पारित कर दिया जाए।

बुधवार को चला था बुलडोजर

बता दें, बर्क को यह नोटिस ऐसे समय में मिला है, जब बुधवार को सपा सांसद के इलाके में बिजली के एक पोल को अवैध तरीके से कब्जाने पर बुलडोजर एक्शन लिया गया था। नखासा थाना इलाके के पास एक बिजली के खंबे को दुकान के अंदर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। सपा सांसद ने इस बुलडोजर एक्शन का विरोध किया था। इसके बाद संभल डीएम व एसपी ने सपा सांसद बर्क के घर के पास पुलिस फोर्स के साथ भ्रमण किया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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