देश

अब हिसाब बराबर करने की बारी: बारामूला में 1 आतंकी ढेर, अनंतनाग में सेना ने उतारे रॉकेट लॉन्चर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 16, 2023, 10:29 AM IST

Anantnag Encounter: कोकरनाग में सेना और आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ का आज चौथा दिन है। रह-रहकर आतंकी फायरिंग कर रहे हैं, जिससे पता चलता है कि उनके पास पर्याप्त मात्रा में गोला-बारूद है। कश्मीर के एडीजीपी का कहना है कि इस इलाके में दो से तीन आतंकी फंसे हुए हैं। उन सभी को मार गिराया जाएगा।

Image

जम्मू-कश्मीर में सेना का ऑपरेशन

Photo : ANI

Anantnag Encounter: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में बीते चार दिन से चल रहे ऑपरेशन में अब भारतीय सेना की बारी हिसाब बराबर करने की है। कोकरनाग इलाके में छिपे आतंकियों को सबक सिखाने के लिए सेना ने अब रॉकेट लॉन्चरों को उतार दिया है। इस बीच बारामूला जिले से सेना ने बड़ी खबर सुनाई है। यहां उरी सेक्टर में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को मार गिराया है। सुरक्षा बलों का कहना है कि पूरे इलाके को घेर लिया गया है, यहां कुछ और आतंकियों के छिपे होने की आशंका है।

इस बीच अनंतनाग के कोकरनाग से एक वीडियो भी सामने आया है, इसमें एक आतंकी जान बचाकर भागता हुआ नजर आ रहा है। दरअसल, जिस जगह आतंकी छिपे हैं वह पहाड़ी और जंगली एरिया है, जिससे सेना के ऑपरेशन में मुश्किल आ रही है। हालांकि, ड्रोन से आतंकियों पर नजर रखी जा रही है और उन के खात्मे लिए रॉकेट लॉन्चरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

चार दिन से जारी है ऑपरेशन

कोकरनाग में सेना और आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ का आज चौथा दिन है। रह-रहकर आतंकी फायरिंग कर रहे हैं, जिससे पता चलता है कि उनके पास पर्याप्त मात्रा में गोला-बारूद है। कश्मीर के एडीजीपी का कहना है कि इस इलाके में दो से तीन आतंकी फंसे हुए हैं। उन सभी को मार गिराया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि छिपे हुए आतंकियों में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी उजैर खान के छिपे होने का संदेह है।

सेना ने की कड़ी घेरेबंदी

सैन्य अधिकारियों का कहना है कि पूरे इलाक की कड़ी घेरेबंदी की गई है, जिससे आतंकी बचकर निकल ना पाएं। एक अधिकारी ने बताया, आतंकियों के छिपने की जगह को बमबारी कर ध्वस्त कर दिया गया है। यह ऑपरेशन एक विशिष्ट इनपुट के आधार पर शुरू किया गया था। बता दें, चार दिन से जारी इस एंटी टेररिस्ट ऑपरेशन में मेजर आशीष धोंचक, कर्नल मनप्रीत सिंह, डीएसपी हुमायूं भट, और एक सैनिक शहीद हो गए थे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article