Atul Subhash Suicide : इंजीनियर अतुल सुभाष की खुदकुशी के बाद उनके परिवार पर एक तरह से मुसीबतों का पहाड़ टूट गया है। अतुल के माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। बेटे की जुदाई वे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। बुधवार को मीडिया से बातचीत करते-कते उनकी मां मूर्छित हो गईं। मां ने कहा कि उनके बेटे को प्रताड़ित किया गया। अपने पति के साथ मीडिया से मुखातिब अतुल की मां रोती रहीं और अपने बेटे के साथ हुए दुर्व्यवहार एवं उसकी पीड़ा के बारे में बताती रहीं। उन्होंने कहा कि अतुल को इतना परेशान किया जाने लगा कि वह अपने दुख एवं पीड़ा को हम लोगों से छिपाने लगा था। वह नहीं चाहता था कि उसके बारे में जानकर हम लोग परेशान हों।
उकसाने का मामला दर्ज
उत्तर प्रदेश निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर की आत्महत्या के मामले में मंगलवार को उसकी पत्नी और उसके परिजनों के खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि बेंगलुरु की एक निजी कंपनी में काम करने वाले अतुल सुभाष ने 24 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उसने शादी के बाद जारी तनाव और उसके खिलाफ दर्ज कई मामलों तथा उसकी पत्नी, उसके रिश्तेदार एवं उत्तर प्रदेश के एक न्यायाधीश द्वारा प्रताड़ित किए जाने का विस्तृत विवरण दिया है।
‘न्याय मिलना बाकी’
पुलिस ने बताया कि सुभाष का शव मंजूनाथ लेआउट क्षेत्र में स्थित उनके आवास पर फंदे से लटका मिला। उनके कमरे में एक तख्ती भी लटकी मिली जिसमें लिखा था ‘न्याय मिलना बाकी’है। अतुल सुभाष ने आत्महत्या करने से पहले डेढ़ घंटे का एक वीडियो बनाया जिसमें उन्होंने उन सभी परिस्थितियों का जिक्र किया, जिसके कारण उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
'लगता है कि मुझे आत्महत्या कर लेनी चाहिए'
सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में सुभाष यह कहते हुए नजर आ रहे हैं, ‘मुझे लगता है कि आत्महत्या कर लेनी चाहिए क्योंकि मैं जो रुपये कमा रहा हूं उससे मेरे दुश्मन और मजबूत हो रहे हैं। उन्हीं रुपयों का इस्तेमाल मुझे बर्बाद करने के लिए किया जा रहा है और यह चक्र यू हीं चलता रहेगा। मेरे द्वारा चुकाए गए करों से प्राप्त धन से यह न्यायालय और पुलिस व्यवस्था मुझे, मेरे परिवार को और अन्य सज्जन लोगों को परेशान करेगी।’
'अस्थियों को अदालत के नाले के बाहर फेंक दें'
सुभाष ने मांग की कि उनकी मौत के बाद पत्नी और उसके परिवार को उनके शव के पास जाने की अनुमति न दी जाए। उन्होंने वीडियो में अपने परिजनों से कहा कि जब तक उनका कथित उत्पीड़न करने वालों को सजा नहीं मिल जाती तब तक वे उनकी अस्थियों का विसर्जन न करें।
सुभाष ने न्याय की मांग करते हुए अपने परिजनों से आग्रह किया कि यदि उसका उत्पीड़न करने वालों को दोषी नहीं ठहराया जाता है तो वे उसकी अस्थियों को अदालत के नाले के बाहर फेंक दें।
