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2024 में अक्षय कुमार लड़ेंगे लोकसभा चुनाव? जानें क्यों उठने लगे ये सवाल

Akshay Kumar Political Connection: बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार ने ट्वीट इस बात की खुशी जाहिर की है कि उन्हें भारत की नागरिकता मिल गई है। बीते लंबे समय से ये कयास जताई जा रही है कि अक्षय भाजपा के दरवाजे से राजनीति में एंट्री ले सकते हैं। पीएम मोदी से उनकी करीबी के चलते कई बार ऐसे दावे किए जा चुके हैं।

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क्या नागरिकता मिलने के बाद राजनीति में उतरेंगे अक्षय कुमार?

Akshay Kumar News: बॉलीवुड के जाने माने अभिनेता मिस्टर खिलाड़ी यानी अक्षय कुमार को भारत की नागरिकता मिल गई है। उन्होंने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस बात की जानकारी साझा की है और खुशी जाहिर की है। उन्होंने अपनी नागरिकता से जुड़ी जानकारी 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शेयर की। अब ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या अब भारतीय नागरिकता पाने के बाद अक्षय कुमार की राजनीति में एंट्री हो सकती है और वो आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में अपनी उम्मीदवारी पेश कर सकते हैं।

किस राजनीतिक पार्टी को लेकर हो रहे हैं दावे?

अक्षय कुमार राजनीति में आएंगे या नहीं? इस सवाल का जवाब फिलहाल तो कोई नहीं जानता है, यदि वो सियासत में कदम रखते हैं तो किस पार्टी के सहारे एंट्री लेंगे? ऐसा दावा किया जाता रहा है कि पीएम मोदी और अक्षय कुमार के बीच अच्छे रिश्ते हैं। ये करीबी इस बात की वजह बन सकती है कि वो भाजपा के दरवाजे से राजनीति में आ सकते हैं। हालांकि अक्षय के ससुर राजेश खन्ना कांग्रेस पार्टी से सांसद थे, ऐसे में उनके लिए राजनीति को लेकर पार्टी का फैसला कर पाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।

राजनीति को लेकर खुद क्या सोचते हैं अक्षय कुमार?

इन सबके बीच ये बात अहम है कि खुद अक्षय का पॉलिटिक्स को लेकर क्या सोचना है? एक मीडियाहाउस से बात करते हुए कुछ समय पहले अक्षय कुमार ने खुद को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने राजनीति से जुड़ने की कयासों पर कहा था कि 'मुझे राजनीति में आने का कोई शौक नहीं है। मैं सिर्फ अच्छी फिल्में करना चाहता हूं। मैं देश का नागरिक होने के नाते ऐसी फिल्में करता हूं, जो आम लोगों से जुड़ी हों। मैं खुद वहां (राजनीति में) नहीं जा सकता। मैं फिल्में बनाकर खुश हूं।' अब अक्षय के इस एक साल पुराने बयान के बाद इस वक्त ये संशय बढ़ गई है कि वो राजनीति में एंट्री लेंगे या फिर नहीं।

क्या अपने साथियों से प्रेरित होंगे अक्षय कुमार?

सोशल मीडिया पर ये दावे किए जाते रहे हैं कि अक्षय कुमार का झुकाव भाजपा के प्रति काफी अधिक है। 2019 में जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का इंटरव्यू किया था, उसके बाद ये चर्चा तेज हो गई थी। राजनीति में कुछ भी संभव है, क्या पता अक्षय कुमार का भी मन वक्त के साथ बदल जाए। अब उन्हें भारत की नागरिकता भी मिल चुकी है। बॉलीवुड से राजनीति में आने वाले अपने साथियों से शायद अक्षय भी प्रेरित हो सकते हैं। धर्मेंद्र, सनी देओल, विनोद खन्ना... ऐसे न जाने कितने नाम हैं, जिन्होंने मनोरंजन के बाद सियासत में कदम रखा।

अक्षय कुमार कैसे बने थे कनाडा के नागरिक?

साल 2019 में भी इस बात की चर्चा तेज हुई थी कि अक्षय कुमार पंजाब के गुरदासपुर से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि उन्होंने खुद उस वक्त इन दावों को खारिज कर दिया था। जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नॉन पॉलिटिकल इंटरव्यू किया था। 1990-2000 के दशक की बात है, जब अक्षय की ज्यादातर फिल्में फ्लॉप हो रही थी। उन्होंने कनाडा जाकर काम करना शुरू किया, उन्हें वहां की नागरिकता मिली और इसी के बाद उनकी फिल्में भी चलने लगीं। अक्षय के ससुर राजेश खन्ना ने कांग्रेस में रहते हुए भाजपा के शत्रुघ्न सिन्हा को वर्ष 1991 में नई दिल्ली लोकसभा सीट पर उपचुनाव में हराया था। अब अक्षय अगर राजनीति में आते हैं तो देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा चुनाव किस सीट से लड़ते हैं या फिर ये तमाम दावे एक बार खारिज हो जाते हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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