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सिजोफ्रेनिया क्या होता है? ट्विशा शर्मा केस के बाद क्यों है चर्चा, डॉक्टर से जानें मिथक और फैक्ट

Schizophrenia: मेंटल हेल्थ से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं, इसमें सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक रोग है। इसकी चर्चा बीते दिनों सामने आए ट्विशा शर्मा केस के बाद ज्यादा हो रही है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

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क्या है सिजोफ्रेनिया

Schizophrenia: आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन कुछ बीमारियां अब भी डर, भ्रम और गलतफहमियों के घेरे में हैं। ऐसी ही एक गंभीर मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) है। हाल ही में ट्विशा शर्मा केस के बाद यह शब्द अचानक चर्चा में आ गया और लोग जानना चाहते हैं कि आखिर यह बीमारी क्या होती है, इसके लक्षण क्या हैं और क्या इससे पीड़ित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है?

इसको लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिजोफ्रेनिया को लेकर समाज में जितनी बातें फैली हुई हैं, उनमें से कई तो पूरी तरह गलत हैं। जैसा कि फिल्मों और सोशल मीडिया ने भी कई बार इसे गलत तरीके से दिखाया जाता है। यही कारण है कि इसे लोग 'पागलपन' या 'दोहरे व्यक्तित्व' जैसी चीजों से जोड़ने लगते हैं। जबकि वास्तविकता इससे काफी अलग है। इस रोग के बारे में और जानकारी लेने के लिए हमने बात की मनोचिकित्सक, डॉ.सामंत दर्शी से।

क्या होता है सिजोफ्रेनिया - What is schizophrenia

सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक रोग है, जो व्यक्ति के दिमाग के काम करने के तरीके को प्रभावित करता है। इस बीमारी में मरीज को वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने में कठिनाई होने लगती है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति कई बार व्यक्ति ऐसी चीजें देखने या सुनने लगता है जो वास्तव में मौजूद नहीं होती हैं। इसके अलावा कुछ मरीजों को लगता है कि कोई उनका पीछा कर रहा है, कोई उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहता है या लोग उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं।

यह बीमारी धीरे-धीरे गंभीर हो सकती है और शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य तनाव या मूड बदलाव जैसे लगते हैं। यही वजह है कि कई मामलों में इसका इलाज देर से शुरू होता है।

सिजोफ्रेनिया के लक्षण - Symptoms of Schizophrenia

1. आवाजें सुनाई देना

2. भ्रम और शक

3. असामान्य सोच

4. लोगों से दूरी बनाना

5. भावनात्मक बदलाव महसूस होना

6. रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होना

सिजोफ्रेनिया के कारण - Causes of schizophrenia

  • आनुवंशिक कारण
  • दिमाग के केमिकल बदलाव
  • अत्यधिक तनाव
  • नशे की आदत
  • गर्भावस्था और जन्म से जुड़ी समस्याएं

सिजोफ्रेनिया से जुड़े मिथक और फैक्ट - Schizophrenia Myths And Facts

क्या सिजोफ्रेनिया 'डबल पर्सनालिटी' है?

डॉ.सामंत दर्शी की मानें तो यह इस रोग का सबसे बड़ा मिथक है। बहुत से लोग सिजोफ्रेनिया को 'दोहरे व्यक्तित्व' यानी Split Personality समझ लेते हैं, जबकि ये दोनों पूरी तरह अलग स्थितियां हैं। डॉक्टर के अनुसार, डबल पर्सनालिटी को Dissociative Identity Disorder कहा जाता है, जो एक अलग बीमारी है। जबकि सिजोफ्रेनिया में व्यक्ति की सोच और वास्तविकता को समझने की क्षमता प्रभावित होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसके अंदर दो अलग-अलग व्यक्तित्व मौजूद हैं।

क्या सिजोफ्रेनिया वाले लोग हिंसक होते हैं?

डॉक्टर के अनुसार, हमारी यह धारणा भी काफी हद तक गलत है। जैसा कि फिल्मों और टीवी में अक्सर सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों को हिंसक दिखाया जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि ज्यादातर मरीज किसी के लिए खतरा नहीं होते हैं। बल्कि कई बार वे खुद डर, भ्रम और सोशल इग्नोरेंस का सामना कर रहे होते हैं। ऐसे में अगर मरीज को समय पर इलाज, दवा और भावनात्मक सहयोग मिले तो वह सामान्य सामाजिक जीवन जी सकता है।

क्या सिजोफ्रेनिया का इलाज नहीं हो सकता है?

सिजोफ्रेनिया का इलाज संभव है और सही उपचार से मरीज की स्थिति काफी बेहतर हो सकती है। डॉक्टर के मुताबिक, हालांकि यह बीमारी लंबे समय तक चल सकती है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि व्यक्ति कभी सामान्य जीवन नहीं जी पाएगा। इसके इलाज के लिए एंटीसाइकोटिक दवाएं लेना, काउंसलिंग और थेरेपी कराना, सोशल स्किल ट्रेनिंग और फैंमिली थेरेपी ये सभी चीजें

क्या सिजोफ्रेनिया पूरी तरह ठीक नहीं होता

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर सामंत दर्शी कहते हैं कि हर मरीज की स्थिति अलग होती है। कुछ लोग नियमित इलाज से लगभग सामान्य जीवन जीने लगते हैं, जबकि कुछ लोगों को लंबे समय तक मेडिकल सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है। इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बीमारी उम्मीद खत्म होने का नाम नहीं है। दुनिया भर में लाखों लोग सिजोफ्रेनिया से पीड़ित होने के बावजूद नौकरी कर रहे हैं, परिवार संभाल रहे हैं और अपनी जिंदगी सामान्य तरीके से जी रहे हैं।

सिजोफ्रेनिया के मिथम और फैक्ट

schizophrenia myths and facts

किस उम्र के लोगों को ज्यादा होती है ये बीमारी?

एक्सपर्ट्स की मानें तो सिजोफ्रेनिया अक्सर किशोरावस्था के बाद या युवावस्था में सामने आती है। इसके लक्षण आमतौर पर 16 से 30 वर्ष की उम्र के बीच दिखाई देने लगते हैं। वहीं पुरुषों में यह बीमारी अपेक्षाकृत जल्दी शुरू हो सकती है, जबकि महिलाओं में इसके लक्षण थोड़ी अधिक उम्र में दिखाई देते हैं। हालांकि ये बीमारी किस उम्र में शुरू होगी इसको लेकर कोई सत्यापित डाटा उपलब्ध नहीं है।

परिवार का सहयोग है जरूरी

सीजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को ठीक करने में परिवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस तरह के मेंटल डिसऑर्डर से जूझ रहे कई मरीज इलाज से ज्यादा समाज के व्यवहार से परेशान हो जाते हैं। यदि परिवार मरीज को 'पागल' कहकर अलग करने लगे या उसकी बातों को मजाक समझे, तो उसका कंडीशन और खराब हो सकती है।

क्या कर सकता है मरीज का परिवार

  • मरीज की बातों को धैर्य से सुनें
  • इलाज जारी रखने के लिए प्रेरित करें
  • दवाइयां समय पर दिलाएं
  • आलोचना या गुस्से से बचें
  • मरीज को अकेला महसूस न होने दें

मेडिकल इलाज के दौरान भावनात्मक सुरक्षा भी मरीज के आत्मविश्वास को मजबूत करती है। इसलिए मरीज के परिवार का सहयोग उसे ठीक होने में काफी महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।

क्या है सिजोफ्रेनिया

क्या है सिजोफ्रेनिया

इलाज में देरी क्यों खतरनाक हो सकती है?

कई लोग मानसिक बीमारी के नाम से डरते हैं और ऐसे में डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं। यदि आप किसी तरह की मेंटल प्रॉब्लम से परेशान हैं, तो आपको समझ लेना चाहिए कि जितनी जल्दी इलाज शुरू होता है, उतनी ही बेहतर रिकवरी की संभावना रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती हो सकती है।

इलाज में देरी होने पर क्या खतरा है

  • लक्षण गंभीर हो सकते हैं
  • रिश्तों पर असर बढ़ सकता है
  • पढ़ाई या नौकरी प्रभावित हो सकती है
  • मरीज सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ सकता है

मेंटल हेल्थ पर खुलकर हो बात

आज तेजी से बदलते दौर में हमें मेंटल हेल्थ पर खुलकर बात करने की जरूरत है। आज लेना है कि सिजोफ्रेनिया सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि समाज की समझ और संवेदनशीलता की भी परीक्षा है। जरूरत इस बात की है कि हम मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चुप्पी तोड़ें और लोगों को सही जानकारी दें। हर मरीज को डर, शर्म और भेदभाव नहीं, बल्कि सहानुभूति, सम्मान और इलाज का अधिकार मिलना चाहिए।

ट्विशा शर्मा केस और सिजोफ्रेनिया का संबंध

ट्विशा शर्मा केस का सिजोफ्रेनिया से संबंध तब जुड़ा, जब उनके ससुराल पक्ष ने दावा किया कि वह मानसिक स्वास्थ्य संबंधी इलाज ले रही थीं और उन्हें सिजोफ्रेनिया की दवाइयां दी जाती थीं। हालांकि, ट्विशा के परिवार ने इन आरोपों को गलत बताते हुए खारिज किया है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस की ओर से किसी मानसिक बीमारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस केस के बाद सिजोफ्रेनिया को लेकर लोगों में चर्चा बढ़ी है, खासकर इस बीमारी से जुड़े मिथकों और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर बात की जा रही है। इसके साथ ही हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना मेडिकल पुष्टि के किसी भी व्यक्ति को मानसिक रोगी कहना गलत और संवेदनशीलता के खिलाफ है।

gulshan kumar
गुलशन कुमार author

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लो... और देखें

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