सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा सभी 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। बरी किए गए आरोपियों में गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के 21 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। सोहराबुद्दीन के छोटे भाई नयाबुद्दीन शेख ने अधिवक्ता अचिंत कुमार के माध्यम से शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की है। इस याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अश्विन अंखड की पीठ के उस फैसले को खारिज करने की मांग की गई है, जिसने ट्रायल कोर्ट की रिहाई के आदेश को बरकरार रखा था।
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, 2005 में हैदराबाद से महाराष्ट्र जा रही एक बस से सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति को कथित तौर पर अगवा कर लिया गया था। आरोप है कि सोहराबुद्दीन को अहमदाबाद के पास मुठभेड़ में मार दिया गया, जबकि तीन दिन बाद कौसर बी की हत्या कर दी गई। बाद में 2006 में तुलसीराम प्रजापति को भी एक मुठभेड़ में मार गिराया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
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क्यों बरकरार रहा था बरी करने का फैसला?
वर्ष 2018 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस फैसले पर मुहर लगाते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष अपहरण और आपराधिक साजिश के ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा। कुल 210 गवाहों में से 92 गवाह अपने बयान से मुकर गए। हालांकि कोर्ट ने माना कि केवल गवाहों के मुकरने से केस को दोषपूर्ण नहीं माना जा सकता। मुठभेड़ के पीछे किसी पुलिस-नेता गठजोड़ का कोई सबूत नहीं मिला।
