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पाताल में ईरानी रियाल! डॉलर के मुकाबले 20 लाख पार, फिर भी ₹1 लीटर से सस्ता पेट्रोल

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल की कीमत लुढ़कर 20 लाख प्रति डॉलर पहुंच गई है। हालांकि, इसके बाद भी ईरान में आम लोगों के लिए रोजमर्रा की कई चीजें बेहद सस्ती हैं।

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ईरान अमेरिका युद्ध आर्थिक मोर्चे पर पहुंचा

Iran US War : ईरान की करेंसी रियाल के लिए 24 अगस्त 2026 का दिन बेहद खराब रहा। खुले बाजार में डॉलर के मुकाबले रियाल 20.2 लाख तक गिर गया। यानी सिर्फ एक डॉलर खरीदने के लिए 20 लाख से ज्यादा रियाल देने पड़ रहे हैं। यह रियाल का नया रिकॉर्ड निचला स्तर है। अमेरिका की तरफ से नए और कड़े प्रतिबंधों की तैयारी, महीनों से जारी युद्ध, आर्थिक पाबंदियों और लगातार बढ़ती महंगाई ने ईरान की मुद्रा पर भारी दबाव डाला है। डॉलर के लिहाज से देखा जाए, तो ईरान में बेहताशा महंगाई है। इसके अलावा युद्ध के चलते ईरान में जमीन पर जीवन मुश्किल होता जा रहा है। लेकिन, इस संकट के बाद भी ईरान कई मामलों बेहद सस्ता है। बेतहाशा महंगाई के बाद भी यहां डीजल-पेट्रोल इतना सस्ता है कि यकीन नहीं होता है।

रुपये लीटर से कम डीजल पेट्रोल का दाम

भले ही 1 डॉलर के मुकाबले रियाल 20 लाख पार हो गया है। भारतीय मुद्रा के हिसाब से देखें, तो 1 रुपये में करीब 14357.77 ईरानी रियाल बनते हैं।

ईरान में निजी कार मालिकों को मौजूदा व्यवस्था के तहत हर महीने 60 लीटर पेट्रोल 15,000 रियाल प्रति लीटर की सब्सिडी वाली कीमत पर मिलता है। इसके बाद अगले 50 लीटर के लिए कीमत 30,000 रियाल और तय सीमा से ज्यादा खपत पर 50,000 रियाल प्रति लीटर तक जाती है। अगर 24 अगस्त के खुले बाजार के 20.2 लाख रियाल प्रति डॉलर वाले रेट से हिसाब लगाएं, तो 15,000 रियाल का एक लीटर पेट्रोल करीब ₹0.70 बैठता है। यानी ₹1 से भी कम। इसके साथ ही डीजल भी बेहद सस्ता है। ईरान में भारी वाहनों के लिए लंबे समय से 3,000 रियाल प्रति लीटर का भारी सब्सिडी वाला डीजल रेट बताया जाता रहा है। इसी विनिमय दर पर यह करीब ₹0.14 प्रति लीटर बैठता है।

भारत से कई गुना सस्ता ईंधन

तुलना के लिए देखें, तो 24 अगस्त को दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर है। इसी तरह अमेरिका में पेट्रोल करीब 104 और डीजल करीब 140 रुपये लीटर के आसपास है। यानी भले ही ईरान एक भयानक युद्ध और बेहद कड़े आर्थिक प्रतिबंधों से गुजर रहा है। लेकिन, इसके बाद भी यहां आम लोगों का रोजमर्रा के जीवन में ईंधन पर मामूली है।

मुद्रा इतनी क्यों गिरी?

ईरान दुनिया के बड़े तेल और गैस उत्पादकों में शामिल है। अगर इस लिहाज से देखें, तो ईरानी रियाल दुनिया की सबसे मजबूत मुद्राओं में शामिल होनी चाहिए। लेकिन, अमेरिका की तरफ से ईरान पर डॉलर में तेल बेचने पर प्रतिबंध के चलते ईरान अपना तेल खुले बाजार में नहीं बेच पाता है। इसके अलावा हाल में ही अमेरिका की तरफ से ईरान पर अभूतपूर्व कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने का ऐलान करने के बाद डॉलर के सामने रियाल की मांग और घट गई है। यही एक वजह है कि रियाल बेहद कमजोर नजर आता है।

बेलगाम हुई महंगाई

जुलाई 2026 में ईरान की सालाना महंगाई 66% पहुंच गई थी, जबकि खाद्य महंगाई 128% रही। यानी खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर करेंसी और सप्लाई संकट का बहुत बड़ा असर पड़ रहा है। वेतन और पारिश्रमिक बढ़ने के बावजूद रियाल की गिरती कीमत ने ईरान के लोगों की वास्तविक क्रय शक्ति को कमजोर किया है। चूंकि, ईरान के पास खुद के तेल भंडार है, ऐसे में सस्ती ऊर्जा की वजह से हालात थोड़े संभले हुए हैं।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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