भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच शोर्ड मारिन ने स्वीकार किया कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ में उनकी टीम काफी ’नर्वस’ थी लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विश्व कप में पांचवें-छठे स्थान के प्लेऑफ में पहुंचना अभी भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारत करो या मरो के मैच के दबाव में आकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रविवार को गोलरहित ड्रॉ खेलने के बाद सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया।
मारिन ने बाद में भाषा से कहा, "ऐसा लग रहा था कि हमारे खिलाड़ी काफी नर्वस हैं। हम उस तरह का खेल नहीं खेल पाए जैसा हम खेलना चाहते थे। हमारे खेल में निरंतरता का अभाव था, पासिंग और रिसीविंग में तालमेल नहीं था और कई अनावश्यक गलतियां हुईं। ऐसा नहीं है कि हम जीत नहीं सकते, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम ऐसा क्यों नहीं कर पाए। हम जानते हैं कि हम इससे कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। टीम का प्रत्येक सदस्य बहुत निराश है।’’
भारत अब पांचवें-छठे स्थान के लिए होने वाला क्लासिफिकेशन मैच खेलेगा और मारिन ने इसे पिछले कुछ महीनों में महत्वपूर्ण प्रगति करार देते हुए कहा कि टीम इस मुकाम तक पहुंचने पर गर्व कर सकती है। उन्होंने कहा, "अगर पांच या छह महीने पहले कहा जाता कि हम पांचवें-छठे स्थान के लिए मैच खेलेंगे तो कोई भी हम पर विश्वास नहीं करता। मैंने लड़कियों से यह भी कहा कि हमें इससे सबक लेने की बहुत जरूरत है।’’
नीदरलैंड के रहने वाले कोच ने कहा कि भारत मौकों का फायदा उठाने में नाकाम रहा। भारत को सेमीफाइनल की अपनी उम्मीदों को जीवंत रखने के लिए इस मैच में हर हाल में जीत चाहिए थी। उन्होंने कहा, "यह हमारे लिए पहला झटका था। हम हारे नहीं। ऑस्ट्रेलिया को ड्रॉ पर रोकना भी एक सकारात्मक पहलू है। हमारे लिए यह मैच जीतना जरूरी था। इस तरह के मैचों में आपको डटे रहना होता है और मौकों का फायदा उठाना होता है। मैच जीतने के लिए गोल करना जरूरी होता है और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हम ऐसा नहीं कर पाए।’’
मारिन ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने और गोल के सामने संयम बनाए रखने को उन प्रमुख क्षेत्रों के रूप में पहचाना जिनमें भारत को सुधार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "डिफेंस के मामले में हम बहुत अच्छी तरह से व्यवस्थित और संगठित थे। टीम बहुत अनुशासित थी और अपने लक्ष्य पर टिकी रही। टूर्नामेंट से हमें जो सबसे महत्वपूर्ण सीख मिली है, वह है पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करना और मौकों का फायदा उठाना। हमें गोलकीपर के आसपास स्कोरिंग पोजीशन में थोड़ा और संयम बरतने की जरूरत है।"
महिला विश्व कप में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1974 में चौथा स्थान रहा, जब अजिंदर कौर की अगुवाई वाली टीम फ्रांस में पदक जीतने से चूक गई थी। मारिन ने कहा कि टीम की मौजूदा उपलब्धि को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैंने लड़कियों से कहा कि हम सभी निराश हैं, लेकिन हम पांचवें-छठे स्थान के लिए होने वाला मैच खेलने जा रहे हैं, जो ऐतिहासिक भी है। हम कई दशकों बाद इस मुकाम पर पहुंचे हैं। हमें यह भी पता लगाना होगा कि आज हम क्यों नहीं जीत पाए।’’
कोच ने विश्व कप 2018 में आयरलैंड से क्वार्टर फाइनल में मिली हार के बाद भारत के अनुभव का भी जिक्र किया और कहा कि मुश्किल मैचों से मिले सबक बड़े टूर्नामेंटों में महत्वपूर्ण साबित सकते हैं। उन्होंने कहा, "मुझे याद है कि 2018 में लंदन में आयरलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में हम हार गए थे, लेकिन हमने उस मैच से बहुत कुछ सीखा। तोक्यो ओलंपिक में हम उनके खिलाफ खेले और जीत हासिल की। इसलिए ये सीख भविष्य के लिए उपयोगी होंगी।’’
मारिन ने कहा, "हम परिणाम तो नहीं बदल सकते, लेकिन मुझे लड़कियों पर बहुत गर्व है। हम साथ मिलकर जीतते हैं, साथ मिलकर हारते हैं और साथ मिलकर ड्रॉ भी खेलते हैं। सभी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। मुझे उन पर हमेशा गर्व रहेगा।’’ उन्होंने कहा, "हमने इस सप्ताह कई मैच खेले हैं। हम मैच देखेंगे और विश्लेषण करेंगे कि हम कहां बेहतर कर सकते हैं। इसी रणनीति के साथ हम अगला मैच खेलेंगे।"
(भाषा इनपुट के साथ)
