Mayawati Slams Congress: लोकसभा चुनाव से पहले मायावती ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने कांग्रेस के न्योते पर विचार करने से साफ इनकार करते हुए तीखा पलटवार किया है। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो पहले ही लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं। अब कांग्रेस के बुलावे के बाद उन्होंने कहा है कि आएदिन गठबंधन सम्बंधी अफवाह फैलाना यह साबित करता है कि बीएसपी के बिना कुछ पार्टियों की यहां सही से दाल गलने वाली नहीं है।
कांग्रेस के न्योते पर मायावती ने किया तीखा पलटवार
मायावती ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि 'आगामी लोकसभा आमचुनाव बीएसपी द्वारा किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करने की बार-बार स्पष्ट घोषणा के बावजूद आएदिन गठबंधन सम्बंधी अफवाह फैलाना यह साबित करता है कि बीएसपी के बिना कुछ पार्टियों की यहां सही से दाल गलने वाली नहीं है, जबकि बीएसपी को अपने लोगों का हित सर्वोपरि है। अतः सर्वसमाज के ख़ासकर ग़रीबों, शोषितों एवं उपेक्षितों के हित व कल्याण के मद्देनज़र बीएसपी का देश भर में अपने लोगों के तन, मन, धन के सहारे अकेले अपने बलबूते पर लोकसभा आमचुनाव लड़ने का फैसला अटल है। लोग अफवाहों से जरूर सावधान रहें।'
मायावती की अहमियत समझती हैं विपक्षी पार्टियां
कांग्रेस ने मायावती को विपक्षी दलों के साथ आने के लिए न्योता दिया है, क्योंकि सभी विपक्षी पार्टियां उनकी अहमियत समझती हैं। उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटें हैं, ऐसे में पिछले लोकसभा चुनाव में जब सपा-बसपा साथ मिलकर चुनाव लड़ी थीं, उस वक्त मायावती का अच्छा खासा प्रदर्शन देखने को मिला था। मगर अब सपा-बसपा के बीच दरार इस कदर बढ़ चुकी है कि अखिलेश और मायावती एक-दूसरे को पानी पी-पीकर कोसते रहते हैं।
2019 के आंकड़ों से समझिए बसपा की कितनी अहम
पिछले लोकसभा चुनाव 2019 के आंकड़ों पर नजर डालें तो जब कांग्रेस ने सपा-बसपा से अलग मिलकर चुनाव लड़ा था तो यूपी की 80 सीटों में से भाजपा को 62 जीटों पर जीत हासिल हुई थी, जबकि बसपा यहां दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। मायावती के खाते में 10 सीटें गई थीं, जबकि अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को महज 5 सीटों से संतोष करना पड़ा था। वहीं अपना दल को 2 सीट और कांग्रेस को महज एक सीट नसीब हुई थी।
मायावती को साथ लाने की कोशिश में कांग्रेस
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने रविवार को कहा था कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के दरवाजे खुले हैं और अब मायावती को तय करना है कि वह आगामी लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना चाहती हैं या अकेले अपने दम पर। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि विपक्षी गठबंधन 'INDIA' खुले दिल से चाहता है कि बसपा भी इस गठबंधन का हिस्सा बने, लेकिन मायावती पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि वह लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेंगी।
लोकसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो चुकी है। विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस (INDIA) को लगातार एक के बाद एक झटका लग रहा है। पहले ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस, फिर नीतीश कुमार की जदयू और अब जयंत चौधरी की आरएलडी... इस बीच कांग्रेस मायावती की पार्टी बसपा को अपने साथ लाने की कोशिश में जुट गई, लेकिन एक बार फिर मायावती ने विपक्षी दलों की उम्मीदों को झटका दिया है।
