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कौन है इंजीनियरिंग कोर्स का जन्मदाता, किस यूनिवर्सिटी से शुरू हुई पढ़ाई

First University in the World to Introduce Engineering Education: जब भी इंजीनियरिंग शिक्षा की बात होती है, तो दिमाग में तुरंत आईआईटी, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और ईटीएच ज्यूरिख जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम आते हैं। ये संस्थान अत्याधुनिक लैब, रिसर्च सुविधाओं और टेक्नोलॉजी के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन एक दिलचस्प सवाल यह है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई की शुरुआत आखिर सबसे पहले कहां से हुई?

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कौन है इंजीनियरिंग कोर्स का जन्मदाता, किस यूनिवर्सिटी से शुरू हुई पढ़ाई (Image - AI Generated)

Which University in the World was the First to Introduce Engineering Education: जब भी दुनिया के शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेजों की बात होती है, तो सबसे पहले Indian Institutes of Technology, Stanford University और Massachusetts Institute of Technology जैसे नाम सामने आते हैं। ये संस्थान न केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के लिए जाने जाते हैं, बल्कि वैश्विक रैंकिंग में भी इनकी मजबूत स्थिति है। हालांकि, एक दिलचस्प सवाल अक्सर नजरअंदाज हो जाता है-आखिर दुनिया की पहली इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी कौन-सी थी? वहां किन विषयों की पढ़ाई होती थी, और इंजीनियरिंग शिक्षा की शुरुआत किस तरह हुई? असल में यह सवाल हमें इतिहास की ओर ले जाता है, जहां हमें यह समझना होगा कि किस विश्वविद्यालय ने इंजीनियरिंग को पहली बार एक व्यवस्थित अकादमिक विषय के रूप में पढ़ाना शुरू किया। हैरानी की बात यह है कि इसका जवाब अमेरिका, ब्रिटेन या जर्मनी नहीं है।

इंजीनियरिंग शिक्षा की जड़ें मध्य यूरोप के ऐतिहासिक शहर प्राग में मिलती हैं। यहां 1707 में एक ऐसे संस्थान की स्थापना हुई, जिसने इंजीनियरिंग को औपचारिक रूप से पढ़ाना शुरू किया—वह भी उस दौर में, जब आधुनिक मशीनें, बिजली या कंप्यूटर अस्तित्व में नहीं थे।

जवाब है सीटीयू

प्राग स्थित Czech Technical University (CTU) को दुनिया का पहला ऐसा विश्वविद्यालय माना जाता है, जिसने इंजीनियरिंग को एक स्वतंत्र अकादमिक विषय के रूप में स्थापित किया। शुरुआत में यह संस्थान सैन्य आवश्यकताओं से जुड़ा था, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यापक तकनीकी शिक्षा का केंद्र बन गया।

1717 तक आते-आते CTU में गणित, विज्ञान, सर्वेक्षण, नक्शानवीसी और निर्माण जैसे विषयों की व्यवस्थित पढ़ाई होने लगी। उस समय अन्य विश्वविद्यालय मुख्य रूप से दर्शन, कानून, चिकित्सा और धर्मशास्त्र जैसे विषयों तक सीमित थे, जबकि इंजीनियरिंग सीखने का तरीका केवल अनुभव या प्रशिक्षण पर आधारित था।

CTU ने बदली पारंपरिक सोच

CTU ने इस पारंपरिक सोच को बदल दिया। इसने इंजीनियरिंग को एक वैज्ञानिक और सिद्धांत-आधारित दृष्टिकोण से पढ़ाना शुरू किया। छात्रों को पहले गणित, भौतिकी, ज्यामिति और यांत्रिकी की गहरी समझ दी जाती थी, जिसके बाद उन्हें वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए तैयार किया जाता था।

यह शिक्षण पद्धति आज के आधुनिक इंजीनियरिंग सिस्टम से काफी मिलती-जुलती है, जिसमें कक्षा में सिद्धांत, प्रयोगशाला में अभ्यास और फील्ड में समस्या समाधान शामिल होता है। इस मॉडल ने इंजीनियरिंग को एक व्यवस्थित और भरोसेमंद पेशा बना दिया।

दुनिया भर में छा गई इंजीनियरिंग शिक्षा

CTU के इस मॉडल ने दुनिया भर में इंजीनियरिंग शिक्षा को नई दिशा दी। इसके प्रभाव से सिविल, स्ट्रक्चरल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों की मजबूत नींव पड़ी और आगे चलकर यही मॉडल आधुनिक तकनीकी विश्वविद्यालयों के विकास का आधार बना।

(Image - Canva AI)
Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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