दुनिया की सबसे तेज पनडुब्बी, जिसकी SPEED बन गई उसके अंत का कारण

भले अमेरिका दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में से एक हो, लेकिन जरूरी नहीं ​हर बेहतरीन चीज उसके पास है। जैसे दुनिया की सबसे तेज पनडुब्बी अमेरिका के पास नहीं बल्कि क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़े देश रूस के पास है। (Fastest Submarine in the World) जानें इस पनडुब्बी की स्पीड कितनी है, और इससे दूसरे देश क्यों हैरान हैं? इसके अलावा पनडुब्बी से जुड़े दूसरे इंट्रेस्टिंग फैक्ट

Authored by: नीलाक्ष सिंहUpdated Feb 10 2026, 16:54 IST
दुनिया की सबसे तेज पनडुब्बी, जिसकी SPEED बन गई उसके अंत का कारणImage Credit : Canva and tnn01 / 07

दुनिया की सबसे तेज पनडुब्बी, जिसकी SPEED बन गई उसके अंत का कारण

पनडुब्बी के बारे में आज भी हम हवाई जहाज और पानी के जहाज के मुकाबले कम जानकारी रखते हैं। (The Fastest Submarine in History) इसका एक सबसे बड़ा कारण है पनडुब्बी ज्यादातर समय पानी के अंदर रहती है, तो ये जहन में कम रहती है, लेकिन इससे जुड़े फैक्ट बहुत दिलचस्प हैं, आपको जरूर पढ़ना चाहिए - पनडुब्बी क्या है? पनडुब्बी की स्पीड कितनी होती है, पनडुब्बी कितने समय बाद पानी के बाहर आती है? इत्यादि

दुनिया की सबसे तेज पनडुब्बी K-222Image Credit : Canva and tnn02 / 07

दुनिया की सबसे तेज पनडुब्बी K-222

बात करेंगे आज दुनिया की सबसे तेज पनडुब्बी के बारे में, जिसका नाम है K-222 सबमरीन, जो कि रूस के पास है। ये सोवियत इंजीनियरिंग का एक कमाल है, जो कोल्ड वॉर के समय में हुई टेक्नोलॉजी में तरक्की का सबूत है।

K 222 FeatureImage Credit : Canva and tnn03 / 07

K 222 Feature

यह न्यूक्लियर सबमरीन है, जो क्रूज मिसाइल और एटॉमिक बम ले जाने के लिए डिजाइन की गई थी। इसका मुख्य मकसद पश्चिमी देशों को अपनी ताकत दिखाना और उन्हें उन्हें ये एहसास कराना था कि हम देश की सुरक्षा के लिए कितना तैयार हैं।

सबसे तेज पनडुब्बी की स्पीड Fastest Submarine SpeedImage Credit : Canva and tnn04 / 07

सबसे तेज पनडुब्बी की स्पीड Fastest Submarine Speed

K-222 की सबसे खास बात इसकी जबरदस्त स्पीड थी। शुरू में, इंजीनियरों को उम्मीद थी कि सबमरीन लगभग 38 नॉट (70.37 km/h) की स्पीड तक पहुंचेगी। लेकिन, 1971 में ट्रायल के दौरान, K-222 ने (Fastest Submarine Ever) 44.7 नॉट (82.78 km/h) की शानदार बति हासिल करके रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस शानदार कामयाबी ने एक ऐसा स्पीड रिकॉर्ड बनाया जो आज तक नहीं टूटा है।

K 222 LengthImage Credit : Canva and tnn05 / 07

K 222 Length

106.6 मीटर लंबी K-222 में 82 लोगों का क्रू बैठ सकता था। लहरों के नीचे से हमला करने की इसकी काबिलियत ने दोहरा खतरता​क बना दिया। यह समुद्र और जमीन दोनों जगह टारगेट पर हमला करने में काबिल थी।

टेक्निकल कमाल और चुनौतीImage Credit : Canva and tnn06 / 07

टेक्निकल कमाल और चुनौती

K-222 की जबरदस्त स्पीड की एक कीमत चुकानी पड़ी। इतनी तेज रफ्तार की वजह से स्ट्रक्चर में दिक्कतें आने लगीं और जहाज के अंदर लगभग 100 डेसिबल का कान फाड़ देने वाला शोर हुआ, जिसे ज्यादा देर सहन नहीं किया जा सकता था। बता दें, 80 से 100 डेसिबल के बीच की आवाजों के लंबे समय तक संपर्क में रहना इंसानों के सुनने के लिए खतरनाक माना जाता है।

कैसे हुआ इसका अंतImage Credit : Canva and tnn07 / 07

कैसे हुआ इसका अंत

इन चुनौतियों के बावजूद, K-222 सोवियत हथियारों के जखीरे में एक मजबूत हथियार बना रहा। दूसरे नेवी के जहाजों से तेज रफ्तार से चलने की इसकी काबिलियत ने इसे स्ट्रेटेजिक ऑपरेशन के लिए एक कीमती चीज बना दिया था, ये अपनी स्पीड से किसी को भी चौंका सकती थी और जब तक कोई समझें वहां अटैक कर सकती थी, 30 सितंबर, 1980 को K-222 के रिएक्टर के रूटीन मेंटेनेंस के दौरान एक बड़ी गलती हुई। सही तरीकों का पालन न करने की वजह से रिएक्टर अनकंट्रोल्ड स्टार्ट-अप हो गया, जिससे उसके कोर को काफी नुकसान हुआ। इस घटना ने दुनिया की सबसे तेज सबमरीन के अंत की शुरुआत कर दी। K-222 को ऑफिशियली 1988 में डीकमीशन कर दिया गया था और आखिरकार 2010 में इसे अलग कर दिया गया।

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!